पंन्यास चिदानंदविजयजी बन गए आचार्य विजय चिदानंदसूरिजी

पंन्यास चिदानंदविजयजी बन गए आचार्य विजय चिदानंदसूरिजी

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जेतपुरा। ज्येष्ठ सुदी 4 तदनुसार दिनांक 29 मई 2017 के शुभ दिन शांतिदूत गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी आदि श्रमण श्रमणीवृन्द एवं भारत भर से पधारे। करीबन ५००० हजार श्रावक श्राविकाओं की साक्षी में पंन्यास चिदानंद विजय जी को पंच परमेष्ठी के तृतीय पद – आचार्य पदवी से अलंकृत किया गया।

भव्य प्रवेश महोत्सव: विजय वल्लभ सूरि समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य विजय नित्यानंद सूरीश्वर जी, पंन्यास चिदानंद विजय जी, मुनिराज मोक्षानंद विजय जी, मुनि पद्मशील विजय जी, मुनि महानंद विजय जी, मुनि मोक्षेश विजय जी, मुनि तत्त्वानंद विजय जी, मुनि ज्ञानानंद विजय जी आदि श्रमण वृन्दो का सभा स्थल पर भव्यातिभव्य प्रवेश हुआ। गुरु वल्लभ के जयकारों से पूरी प्रवेश यात्रा गूंज उठी। आचार्य विजय नीति सूरि जी समुदायवर्ती प्रवर्तक श्री मणिप्रभ विजय जी आदि, एवं आचार्य विजय नीति सूरि जी समुदायवर्ती गोड़वाड़ दीपिका साध्वी ललितप्रभा श्री जी (लेहरा म. सा. ), साध्वी हर्षप्रभा श्री जी आदि एवं विजय वल्लभ सूरि समुदायवर्ती साध्वी पूर्णप्रज्ञा श्री जी आदि श्रमणी वृन्द भी इस ऐतिहासिक समारोह में उपस्थित रहे। गच्छाधिपति जी का उदबोधन: गच्छाधिपति गुरुदेव ने अपने सुमधुर स्वर में मंगलाचरण किय़ा। तत्पश्चात श्री ओम आचार्य एवं अशोक गेमावत ने गुरुभक्ति के स्वर बुलंद किये। गच्छाधिपति गुरुदेव ने अपने उदबोधन में फरमाया – पंन्यास श्री चिदानंद विजय जी हमारी वल्लभ वाटिका के महकते सन्त हैं। आज से 35 वर्ष पूर्व पहली बार संक्रांति श्रवण करने आये कपिल कुमार ने सच मे अपने जीवन की सम्यक क्रांति घटित की और संयम जीवन का संकल्प किया। पंन्यास जी का अनुशासन, उनकी निखालसता, उनकी प्रवचन शक्ति से आप सभी परिचित हैं। दीक्षा के समय उन्होंने अपनी माँ को वचन दिया था कि मैं तेरे दूध को कभी लज्जाउंगा नहीं, बल्कि इस पीली चादर की चमक को सदा ऊपर ही ऊपर लेकर जाऊंगा और सच में, आज दिन तक वो उस वचन को निभा रहे हैं। पंन्यास जी के जीवन का निर्माण करने वाले आचार्य विजय जनकचन्द्र सूरिजी और आचार्य विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वर जी का भी अनंत उपकार है। पंन्यासजी मेरे ज्येष्ठ और श्रेष्ठ शिष्य हैं और उन्हें आचार्य पदवी से अलंकृत करते हुए मुझे अतिशय आनंद की अनुभूति हो रही।

आचार्य पदवी प्रदान विधि: आचार्य पदवी प्रदान की विधि के अंतर्गत गच्छाधिपति गुरुदेव ने मंगल मुहूर्त में शास्त्र वचनों का उच्चारण किया। मुनिराज श्री मोक्षानंद विजय जी ने 700 गाथायुक्त महाप्रभावक आगम – श्री नंदीसूत्र का श्रवण पंन्यास जी के कानों में कराया। देववन्दन, गुरुवंदन आदि क्रियाएं भी मांगलिक रूप से सम्पन्न हुई।

 

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बोलियों के मंगल लाभ: सूरिमन्त्र प्रदान महोत्सव अंतर्गत कई बोलियां और चढ़ावे हुए – नूतन आचार्य श्रीजी को सबसे पहले कांबली ओढाने का लाभ उनके सांसारिक परिवार – श्री नत्थुमल दीवानचंद जी लिगा परिवार (हृष्ठ त्रह्म्शह्वश्च), शिवपुरी – जयपुर – दिल्ली – लुधियाना वालों ने लिया। सभी साधु साध्वी जी भगवंतों को कांबली ओढाने का लाभ श्री बादामी बाई केवलचन्द जी तेलिसरा (खौड/पुना) परिवार ने लिया। नूतन आचार्य श्री जी को सूरिमन्त्र का पट्ट वोहराने का लाभ श्री खुडाला जैन संघ, राजस्थान ने अर्जित किया। इसके अतिरिक्त नूतन आचार्य श्रीजी को स्थापनाचार्य जी, आसन, माला आदि वोहराने की भी बोली है जिसमें गुरुभक्तों ने बढ़चढक़र भाग लिया। तपागच्छीय प्रवर समिति के कार्यवाहक एवं डहेलावाला समुदाय के गच्छाधिपतिआचार्य विजय अभयदेव सूरीश्वर जी ने पंन्यास श्री चिदानंद विजय जी की आचार्य पदवी निमित्त आशीर्वाद एवं अनुमोदना स्वरूप सोने से लिखा हुआ स्वर्णाक्षरी सूरिमंत्र भिजवाया। उसे नूतन आचार्य श्रीजी को अर्पित करने का लाभ फतेहचंद मिश्रीमलजी राणावत, बिजोवा (राज.) ने लिया।

सूरिमन्त्र प्रदान: विधि अनुसार समस्त साधु साध्वी जी भगवंतों ने पंन्यास जी को वासक्षेप प्रदान किया एवं श्रावक श्राविकासंघ ने अक्षत से वधाया। तत्पश्चात गच्छाधिपति गुरुदेव ने चन्दन आदि से कर्ण शुद्धिकरण किया। सन 1993 में परमार क्षत्रियोद्धारक आचार्य विजय इंद्रदिन्न सूरि जी ने जो सूरिमंत्र आचार्य विजय नित्यानंद सूरि जी को दिया था, वोही सूरिमन्त्र आज आचार्य विजय नित्यानंद सूरि जी ने पंन्यास जी के कानों में सूरि मन्त्र प्रदान किया। गुरुदेवों के जयजयकारों से सम्पूर्ण सभा गूंज उठी। नामकरण विधि अनुसार पंन्यास चिदानंद विजय जी की आचार्य पदवी पँर उनका नाम परिवर्तित किया गया। गच्छाधिपति गुरुदेव ने उनके नाम की उदघोषणा करते हुए उनका नाम – ‘आचार्य विजय चिदानंद सूरीश्वर जीÓ घोषित किया गया। परंपरा अनुसार गच्छाधिपति गुरुदेव ने नूतन आचार्य विजय चिदानंद सूरीश्वरजी को पाट पर विराजमान करकर स्वयं पाट से नीचे उतरकर आये और उन्हें विधिवत वन्दन किया। हज़ारों लोगों की जनमेदिनी इस अलौकिक दृश्य को देखकर रोमांचित हो उठी। आचार्य विजय चिदानंद सूरि जी ने मौनपूर्वक मंद मुस्कान और लघुता एवं विनय से भरी निगाहों से समस्त साधु साध्वी श्रावक श्राविकाओं का अभिवादन स्वीकार किया। नूतन आचार्य विजय चिदानंद सूरीश्वर जी को बिसलपुर, शिवपुरी आदि संघो द्वारा सन 2018 के चातुर्मास की विनती की गई। कार्यक्रम में घिसुलाल बदामिया, इन्दरचंद राणावत, बाबुलाल मंडलेचा, पारसमल संचेती, विमलचंद बोराना, सुरजमल परमार, विमल रांका, शांतिलाल पारेख, सुकन परमार, दिलीप पुनमिया, बाबुलाल लोढ़ा, कांतिलाल कितावत, लालचंद संचेती, जयचंद मेहता, सिद्धार्थ तलेसरा, घिसुलाल संचेती, मांगीलाल पुनमिया, सुकनराज परमार, संघवी केशरीमल फागणीया, सज्जन रांका, किरणराज चौपड़ा, घिसुलाल सुराणा, भंवरलाल सुराणा, चंदुलाल तलेसरा, जगदीश मेहता, सुभाष जगावत उपस्थित थे।