मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की घोषणा विहार करने वाले जैन साधु-साध्वीजी के लिए...

मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की घोषणा विहार करने वाले जैन साधु-साध्वीजी के लिए राज्य में पगदंडी रास्ते बनाए जाएंगे

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देश में दुर्घटनाओं  से प्रतिवर्ष ४० से ५० जैन साधु साध्वीजी की मौत होती है

भारत में प्रतिवर्ष ४० से ५० एवं सिर्फ गुजरात में १५ जैन साधु साध्वीजी की विहार करने के दौरान मौत होती है। इस बारे में जानकारों का मानना है कि विहार करने वाले साधु-साध्वीजी की मौत सुबह ही होती है क्योंकि इस समय पूरी रात ड्राईवर को ड्राईविंग करने के कारण थकान होती है और वे अपना संयम खो देते है। हाइवे होने के कारण समय पर इलाज की सुविधाए नहीं मिलती। अब सरकार ने पगदंडी बनाने की घोषणा की है जिससे दुर्घटनाओं में कमी होने की संभावना हैं।

अहमदाबाद। विहार करने वाले जैन साधु-साध्वीजीयों के साथ बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं के बारे में आखिर सरकार की नींद खुल गयी। गुजरात सरकार द्वारा २५० करोड़ खर्च कर पालिताणा तीर्थ से गरियाधार तक २०० कि.मी. लंबी एवं पगदंडी का निर्माण किया जाएगा इसके साथ ही अहमदाबाद से शंखेश्वर तीर्थ तक पगदंडी रास्ते का निर्माण भी किया जाएगा।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने पेटलाद तालुका के माणेज में श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में माणेज लक्ष्मी परिवार द्वारा निर्मित मणी लक्ष्मी तीर्थ के द्वारोद्घाटन के अवसर पर घोषणा की। श्री रुपाणी ने कहा कि पैदल विचरण करने वाले धर्माचार्यो एवं धर्म प्रेमीयों के होने वाले ये अकस्मात चिंता का विषय है। जिसके निराकरण हेतु पालीताणा तीर्थ से गारियाघर तक २०० कि.मी. लंबे पगदंडी रास्ते का निर्माण २५० करोड़ की राशी खर्च कर बनाई जाएगी। जैन समाज मांगने वाला नहीं देनेवाला समाज हैं। सरकार ने इस समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया हैं एवं जैन सहित तमाम समाज के गरीबों की जानकारी सरकार द्वारा ली जा रही है। गुजरात सरकार जीवमात्र की चिंता करती हैं। जिसके लिए उत्तरायण के पहले राज्यव्यापी करुणा अभियान के तहत पक्षीयों की जीवन रक्षा की गई थी। अध्यात्मिको ने गुजरात का पोषण किया हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जो प्रतिष्ठा बढ़ाई हैं इसमें संतो-भगवंतो का मार्ग दर्शन हैं। अनुकंपा जैन समाज का स्वभाव है, ये ही हमारी संपत्ति है एवं अहिंसक गुजरात हमारा लक्ष्य हैं। मणी लक्ष्मी तीर्थ के बारे में उन्होंने कहा की ये तीर्थ देश के लिए ताज के समान बनकर रहेगा। तेरा तुज को अर्पण की भावना को साकार करते हुए इस जिनालय की गणना देश के श्रेष्ठ जिनालयों में होगी। इस अवसर पर पावन निश्रा प्रदान करने वाले आचार्य श्री युगभूषणसूरीश्वरजी म.सा. ने आर्शिवचन दिया। इसके साथ ही पालिताणा सहित अन्य जैन धर्मस्थलों में यात्रियों के लिए जरुरी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु भी मुख्यमंत्री श्री रुपाणी से मांग की।