जय जिनेंद्र सेवा संघ, पुणे द्वारा आयोजित श्री जीरावला महातीर्थ पर ऐतिहासिक...

जय जिनेंद्र सेवा संघ, पुणे द्वारा आयोजित श्री जीरावला महातीर्थ पर ऐतिहासिक ओली आराधना संपन्न

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जीरावला। जय जिनेंद्र सेवा संघ, पुणे, ने श्री सम्मेतशिखरजी की स्पेशल ट्रेन यात्रा, ऐतिहासिक श्री १०८ पार्श्वनाथ की ३८ दिवसीय यात्रा, १०० श्वेत सुमो गाडीयों से मालवा यात्रा, श्री २४ तीर्थंकरों की १२० कल्याणक भूमियों की ३३ दिवसीय अदभूत यात्रा व श्री अयोध्यापुरम तीर्थ से श्री शंत्रुजय तीर्थ छ:री पालक संघ यात्रा, श्री गोडवाड ९९ गावों की गौरवमय यात्रा एवं श्री सिध्दाचल तीर्थ से गढ गिरनार छ:री पालक संघ यात्रा के साथ कुल १८ संघो के पश्चात, भारत ही नही विश्व में पहली बार अनेक अनुठी यात्राओं के आयोजन कर्ता, जय जिनेंद्र सेवा संघ, पुणे ने इस वर्ष श्री जीरावला महातीर्थ की पुण्य भूमि पर, प्रतिष्ठा के बाद की प्रथम चैत्रमासी ओली में ७०० आराधकों को ओली आराधना के साथ-साथ ६३ सजी-धजी तुफान गाडीयो द्वारा अर्बुदाचल परिक्रमा के ५२ प्राचिन महातीर्थो की  यात्रा करवाने का अनुपम सौभाग्य प्राप्त किया। पू. दीक्षा दानेश्वरी आ. श्री. गुणरत्नसूरिजी के शिष्यरत्न प्रवचन प्रभावक पू. आ. श्री जिनेशरत्नसूरिजी म.सा.आ.ठा.सह कुल ५० श्रमण श्रमणीवृंद की निश्रा में भारतवर्ष के कोने कोने से पधारे ७०० ओली आराधको ने उत्कृष्ट आराधना का सुंदर लाभ प्राप्त किया। संगठन ने इनकी आराधना के अनुमोदनार्थ तपोत्सव के संग संघोत्सव का बेमिसाल आयोजन कर इन्हें ६३ सजी-धजी तुफान गाडीयो द्वारा ५२ अतिप्राचिन महातीर्थों की अलौकिक यात्रा करवाने का सौभाग्य प्राप्त किया। दैनिक क्रिया के बाद हर रोज ५ महातीर्थों की यात्रा का प्रारंभ होता था, ‘नाणा-दियाणा-नाँदिया-जीवित स्वामी वांदीयाँÓ ५२ जिनालय से सुशोभित जीरावला तीर्थ, नाणा, दियाणा, नांदियाँ, बामणवाजी, वीरवाडा, पिण्डवाडा, अजारी, सिरोही, मीरपुर, गोहिली, नितोडा के अलावा प्राचिन मुंगथला, वरमाण, धवली, सिरोडी, अनादरा, अंदौर, झाडोली, आदि ५२ महातीर्थों की सुखरूप यात्राएँ संपन्न हुई। सभी तीर्थ पेढीयों द्वारा ओली आराधकों का सन्मान किया गया।

तपोत्सव के साथ संघोत्सव के मुख्य आधारस्तंभ का अनुपम लाभ नगराज वालचंदजी रांका परिवार – सादडी (राणकपुर) के पूत्र ओमप्रकाश रांका (रांका ज्वेलर्स, पुणे) परिवार ने लिया। सह-आधारस्तंभ में १३ श्रेष्ठिवर्यों व रत्नस्तंभ के तहत ९ लाभार्थी परिवारों ने  लाभ लेकर महोत्सव को पूर्णता प्रदान की। ओली आराधना के प्रथम दिन, श्री पार्श्व पदमावती महापुजन व अंतिम दिन चैत्र पौर्णिमा को श्री सिध्दचक्र महापूजन का विशेष आयोजन हुआ। विधिकारक श्री हेमुभाई शाह (मलाड) व संगीतकार नरेंद्रभाई वाणीगोता एवं ओमप्रकाश लालराई ने भक्ति की धुम मचाई। भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक का भव्यतम ऐतिहासिक वरघोडा सभी की वाह-वाही का निमित्त बना। उत्कृष्ट चढावों ने रंग लगाया। ओमप्रकाश नगराजजी रांका परिवार ने ओली आराधकों के सन्मानार्थ व अनुमोदनार्थ प्रतियात्री को कॉची का संपुर्ण थाली सेट संघ पुजन में प्रथम दिन उत्तरपारणे में भेट दिया, ताकि संपुर्ण ओली नई थाली सेट मे कर सके। सभी ओली आराधको द्वारा ५२ तीर्थों पर प्रतितीर्थ ११०००/- की राशी साधारण व जीवदया में लिखवार्ई, संघवी भेरूतारक तीर्थ पर ४५,०००/- व श्री जीरावला तीर्थ पर रू. एक लाख आठ हजार की राशी लिखवाकर लाभ प्राप्त किया। संगठन संस्थापक अध्यक्ष संघवी विमलचंद आनंदराजजी वेदमुथ्था (भूति/पुना) द्वारा संकलन एवं संपादीत ‘श्री अर्बुदाचल परिक्रमा के प्राचिन महातीर्थ ‘लघुग्रंथ का विमोचन पू. आ. श्री. जिनेशरत्न सूरिजी म.सा. के कर कमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री. ललितजी भैरूमलजी बाफना (मालगाव) का स्मृतीचिन्ह शाल, श्रीफल सें विशेष बहुमान किया गया।

ओली आराधना के अंतिम चरण में पू. आचार्य श्री की प्रेरणा सें १५० आराधकों ने अठ्ठम-तप का उत्कृष्ट तप किया व श्री प्रकाश जैन ने १० उपवास की सुंदर आराधना की। सभी ओली आराधकों का ५०० रू. की राशी से व अठ्ठम तप के आराधको का अलग से ५०० रू. की राशी के साथ तिलक व माला पहनाकर सन्मान किया गया।

मुख्य पारणे के बाद आयोजित सन्मान-सत्र में प्रमुख गुरू भगवंतों को कांबली व्होराने के पश्चात  मुख्य लाभार्थी ओमप्रकाश नगराजजी रांका परिवार का रजत सन्मान पत्र, अष्ठमंगल कलशसह सिध्दचक्र, कलायुक्त काष्ठका सन्मान पत्र व श्री १०८ पार्श्वनाथ ग्रंथ सह साफा चुंदडी सह श्रीफल तिलक व माला द्वारा संघठन अध्यक्ष विमल संघवी ने सपत्निक सन्मान कर रांका परिवार का आभार व्यक्त किया। सहआधार स्तंभ व रत्नस्तंभ के लाभार्थी परिवारों का भी श्री सिध्दचक्र महायंत्र स्मृतिचिन्ह सह सन्मान पत्र सह संपूर्ण बहुमान किया गया। जीरावला तीर्थ पेढीके ट्रस्टी सह-सचिव किशोर गांधी व पोपट मुथ्था द्वारा जय जिनेंद्र सेवा संघ, पुणे के संस्थापक अध्यक्ष विमल संघवी का व मुख्य लाभार्थी ओमप्रकाश रांका का भव्य सन्मान पत्र प्रदान कर विशेष बहुमान किया गया। इसी अवसर पर तीर्थ पेढी का विशेष आभार व्यक्त करते हुए विमल संघवी ने ट्रस्ट मंडलको श्री सिध्दचक्र स्मृतिचिन्ह व सन्मानपत्र देकर ट्रस्टी गणोंका बहुमान किया। एक लाख आठ हजार की राशी साधारण में घोषित की। तीर्थ व्यवस्थापक  सिध्दराज लोढा सह समस्त कर्मचारी वर्ग को सहकार्य हेतू धन्यवाद दिया। तपोत्सव संग संघोत्सव को सफल बनाने में दानवीर परिवारों के साथ संस्थापक अध्यक्ष संघवी विमलचंद ए. वेदमुथ्था की दूरदृष्टि, अथक प्रयास व कठोर परिश्रम ने सफलता अर्जित करने में महत्ती भूमिका निभाई, वही भोजन समिती के प्रमुख मान्यवरो, संघठनसह अनेक कर्मठ कार्यकर्ताओंका अमूल्य योगदान सफलता प्राप्त करने में मील का पत्थर शाबित हुये, सभी की जितनी भी अनुमोदना करे, वह कम है, सभी का स्मृती गिफ्ट, पगडी, हार तिलक के साथ सन्मान किया गया। ओमप्रकाश रांका ने विमल संघवी सह सहकारी कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करते हुये बधाई दी व स्वयं की ओरसे सभी संघवी परिवारो व कार्यकर्ताओ को भी काँची का संपूर्ण थाली सेट भेट स्वरूप दिया। विमल संघवी ने भी जीवन में पहली ओली करने का सौभाग्य प्राप्त करते हुये ओली व्यवस्था की संपूर्ण जबाबदारी बखूबी रूपसे संभाली। अंत में विमल संघवी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुये संपूर्ण कार्यक्रम में हुई किसी भी भूल हेतू क्षमायाचना की, ओली आराधकों को धन्यवाद अदा करते हुये उनका अभिनंदन किया। गुरू प्रेरणासे सत्तावीस हजार की राशी साधर्मिक भक्तिमें अर्पित की।

चैत्र पूर्णिमा के शुभ दिन, ५०० वर्ष प्राचीन शैलीपर आधारित आगामी संघ  श्री. भीलडियाजी ५२ जिनालय तीर्थ से श्री शंखेश्वर ५२ जिनालय तीर्थ हेतू छ:रीपालित संघ की घोषणा के साथ ही भागचंद हिम्मतमलजी सोनिगरा व सौ. चंद्राबेन भागचंदजी सोनिगरा, मरूधर में धणा निवासी, सोनिगरा ज्वेलर्स – निगडी, पुना ने मुख्य संघवी पद का लाभ लेकर हमे उपकृत किया। उनकी खुब खुब अनुमोदना व अभिनंदन, साथ ही अनेक श्रेष्ठिवर्यो ने  ‘सहयोगी संघवीÓ बनने का लाभ लेकर कार्य को गती प्रदान की। आगामी संघमें जुडने हेतू व लाभ लेने हेतू अध्यक्ष विमल संघवी (९८२२८८७८१८) से संपर्क कर सकते है।