चमका राजनीति के आकाश का नया पुरोहित

चमका राजनीति के आकाश का नया पुरोहित

SHARE

मुंबई। मुंबई की राजनीति के आकाश में राज पुरोहित के बेटे ने नये सितारे के रूप में अपनी शानदार चमक बिखेरी है। महानगरपालिका के चुनाव में जबरदस्त जीत करके उन्होंने सभी को चौंका दिया है। आकाश की राजनीतिक पारी की शुरूआत लगभग उसी उम्र में हुई है, जब करीब बत्तीस साल पहले उनके पिता राज के पुरोहित ने चुनावी राजनीति में कदम रखा था। राज की राजनीति की शुरूआत भी बेटे की तरह सबसे पहले नगरसेवक बनने के साथ ही शुरू हुई। बाद में तो खैर, वे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी बने और भारतीय जनता पार्टी के मुंबई के अध्यक्ष भी। सन 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद अब तक कुल 5 बार विधायक बननेवाले राज पुरोहित पहले ऐसे नेता है, जो देश भर के राजस्थानी समाज में समान रूप से सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इतनी भारी भरकम राजनीतिक विरासत के वारिस आकाश राज पुरोहित की सबसे पहली खासियत यह है कि वे युवा हैं। अब आकाश पुरोहित मुंबई के नगरसेवक हैं, और सेवा का भाव उनके मन में है, जिसे पूरा करने की ललक भी उनमें है और लोगों के सहयोग की उनको अपेक्षा भी है।

नहीं चली जनक की जादूगरी – देखा जाए, तो आकाश अभी राजनीति की धाराओं को गहराई से समझने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनका सामथ्र्य, सेवाभाव और समाज के प्रति सकारात्मक समर्पण ही उन्हें महानगरपालिका के सदन तक ले गया। हालांकि सडक़ से सदन का यह चुनाव आकाश के लिए कोई बहुत आसान खेल नहीं था। महानगरपालिका के इस चुनाव मैदान में आकाश पुरोहित के सामने शिवसेना के उम्मीदवार कन्नुभाई रावल और बीजेपी छोडक़र कांग्रेस का दामन थामनेवाले मजबूत दावेदार जनक संघवी भी थे। लेकिन आकाश सबको धूल चटाते हुए पहले दौर से ही लगातार बढ़त बनाते हुए चुनाव मैदान में सबसे आगे निकल गए। उनके पिता राज के पुरोहित ने जिसे सडक़ से उठाकर नगरसेवक बनाया था, वही जनक संघवी उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़े थे। पहले तो वे टिकट में बहुत आड़े आए, लेकिन आकाश जब बीजेपी का टिकट पाने में सफल हो गए, तो अपनी पार्टी बीजेपी के प्रति निष्ठा छोडक़र जनक संघवी कांग्रेस का टिकट ले आए। लेकिन लोगों ने जनक को खारिज करके आकाश को भारी बहुमत से जिता दिया।

aakash purohit

जैन समाज के नाम पर विरोध – राजनीति के रास्ते में अकसर रोड़े वे ही खड़े करते हैं, जो आपके अपने होते हैं। आकाश की सफलता के रास्ते में जनक संघवी तो रोड़ा थे ही, जो निपट गए। लेकिन दो और लोग भी थे, जिन्होंने आकाश को हराने की कोशिशों में कोई कमी नहीं रखी। ये दोनों वे लोग थे, जिनको आकाश के पिता राज पुरोहित ने ही राजनीति और समाज में पहचान दी। इनमें से एक तो भूतपूर्व नगरसेवक हैं, जो कहीं नजर नहीं आते। और दूसरे जैन समाज की एक जेबी संस्था के स्वयंभू सर्वेसर्वा हैं। राज के पुरोहित ने ही जिनको बीस साल पहले नगरसेवक बनाया था और जिनको अपने अध्यक्षीय काल में बीजेपी में बड़ा पदाधिकारी बनाया, उन दोनों ने मिलकर राज- षडय़ंत्र रचे।। दोनों ने जैन समाज के मतदाताओं को आकाश के खिलाफ भडक़ाया और जनक को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। लेकिन उनकी हर कोशिश हार गई। बीजेपी के होने के बावजूद बीजेपी के खिलाफ इन दोनों की कोई बात जैन समाज ने नहीं मानीं। लेकिन पूरे चुनाव में दो पूर्व नगरसेवक शांतिलाल जैन एवं वीणा जैन हर कदम पर पुरोहित को जिताने के लिए ईमानदारी से उनके साथ रहे। जैन समाज के बहुत सारे संभ्रांत लोगों ने भी राज के पुरोहित के बेटे को जिताने की हर संभव कोशिश की। देश भर में जैन समाज के बहुत बड़े नेता राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात श्रमवेलफेयर के चेयरमेन सुनील जे. सिंघी, सिद्धराज लोढ़ा, पारस लुणिया, विमल रांका, साकलचंद संघवी, मनोज शोभावत और किशन डागलिया जैसे जैन समाज के अन्य कई प्रमुख लोगों के साथ गली गली पुरोहित की जीत के लिए घूमे और रोड़ शो भी किया। गृह मंत्री कटारिया ने जैन समाज के उन लोगों को आड़े हाथों भी लिया, जो आकाश को हराने में लगे थे। राजनीति में जीतना सबसे बड़ा काम होता है, जो राज के पुरोहित ने अपनी मेहनत से करके दिखा दिया।

आकाश ने बहुत कुछ सीखा – अब आखिरकार, आकाश पुरोहित जीतकर आज नगरसेवक के रूप में हमारे सामने हैं। इस चुनाव ने आकाश को बहुत कुछ सिखा दिया है। कौन, कब, कैसे कैसे खेल करता है। लेकिन कुल मिलाकर इस सारे खेल में राजनीति के आकाश पर एक  नया पुरोहित चमक रहा है। जीत के बाद जो लोग मिले, उनका कहना था कि – आकाश की सादगी उम्मीद जगाती है और उनकी सरलता में सहज अपनापन नजर आता है। विश्वसनीयता उनके व्यवहार में झलकती है और धमाकेदार राजनेता के कदवाले उनके पिता राज के पुरोहित का साया तो उनके साथ है ही। फिर उनकी पार्टी बीजेपी भी अब एक बहुत बड़ी ताकत के साथ केंद्र और प्रदेश दोनों जगह सत्ता में है, सो उनकी राजनीतिक सफलता में वैसे तो कोई कमी नजर नहीं आती। बाकी आपकी और हम सबकी दुआएं, सहयोग और विश्वास तो आकाश के साथ है ही। देखते हैं, आगे क्या होता है।