श्री प्रकाश भूरमलजी जैन / Shri Prakash B. Jain: “आपकी सोच ही...

श्री प्रकाश भूरमलजी जैन / Shri Prakash B. Jain: “आपकी सोच ही सफलता की सीढ़ी है”

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सन १९७३ : एक २२ वर्षीय युवा सूर्य के प्रकाश में अपने उज्ज्वल भविष्य के सपनों को देखते हुए उन सपनों को पूरा करने की सोच पर पहले कदम को बढ़ाने की योजना बना रहा था।

सन २०१६:एक सफल उद्योगपति, समाजसेवी, तीन प्रतिभावान पुत्रों के पिता और पांच पोते पोतियों के दादा ६५ वर्षीय प्रकाश भूरमलजी जैन आज भी उसी युवा जोश और उत्साह से लबालब अपनी सोच को सच में तब्दील होने की संतुष्टि का आनंद लेते दिखाई देते हैं।

प्रकाश भूरमलजी जैन। जन्म १.१.१९५१ – साल के पहले दिन और ५१ के शगुन पर जन्मे, सदैव मुस्कुराते ऐसे व्यक्तित्व है जिनका जीवन किसी प्रेरणा से कम नहीं है। अपनी दूरदृष्टि और महत्वकांक्षाओं की बदौलत समय से आगे बढक़र प्रकाश बी. जैन ने अनगिनत मुकाम हासिल किए हैं।

बड़ा सोचो, जल्दी सोचो और आगे की सोचो इस कहावत को अपना जीवन मंत्र बनाकर कोसेलाव (राजस्थान) निवासी श्री भूरमलजी व श्रीमती मानसीबाई जैन के पुत्र प्रकाश जैन ने दुनियाभर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। प्रकाशमय व्यक्तित्व के धनी प्रकाश बी. जैन की कंपनी इंस्पीरा एंटरप्राइज आज ११७० करोड़ के टर्नओवर के साथ अपनी सफलता की कहानी खुद बयान करती है।

with wife Manjula Jain
with wife Manjula Jain

मुंबई में जन्मे प्रकाश जैन अपनी प्राथमिक शिक्षा पुरी कर पुणे में अपनी इंजिनयरींग की पढ़ाई पुरी की और १९७३ में अपने माता-पिता के सहयोग और आशीर्वाद के साथ अमेरिका कूच कर गए। प्रकाश जैन की दादीजी ने उनके अमेरिका जाने की बात को इसी शर्त पर मानी कि वे शादी करने के बाद ही अमेरिका जाए। वहां MS की डिग्री हासिल की और १७ वर्षों तक दुनिया की अग्रणी कंपनीयों अपना जौहर दिखाते रहें। डिजीटल इक्वीपमेंट्स, आईबीएम और झेरॉक्स में काम करते हुए टेक्नोलोजी क्षेत्र में गहन अनुभव प्राप्त किया। ज्ञात रहें कि वह दौर है जब भारत में शायद ही किसी को कम्प्युटर या उससे संबंधित तकनीकों की जानकारी थी। अमेरिका में पढ़ाई करते हुए भी उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए नौकरी भी की। १७ घंटो तक पढ़ाई और फिर काम और देश व अपनों से दूर प्रकाश जैन ने ढाढस और मेहनत के साथ सफलता की नई कहानी शुरू की। इस सफर में उनकी पत्नी मंजुला जैन ने भी काफी सहयोग दिया। अपने स्वभाव और अपनी पत्नी व सहयोगियों के प्रोत्साहन के साथ प्रकाश जैन ने २० वर्षों तक लगातार नई तकनीकों और अनुभव को सीखा और १९९३ में फिर से अपने देश में उन अनुभव को आजमाने वापिस आए। भारत में आने के बाद सफलता के लिए प्रकाश जैन ने काफी उतार चढाव देखें पर कभी हार न मानने वाले प्रकाश जैन ने मुस्कुराते हुए सभी मुश्किलों का सामना किया।

 

Receiving the Citation of “Samaj Ratna” in 2012 from Honorable President of India SmtPratibha Devi Singh Patil at RashtrapatiBhavan, New Delhi
Receiving the Citation of “Samaj Ratna” in 2012 from Honorable President of India SmtPratibha Devi Singh Patil at RashtrapatiBhavan, New Delhi

१९९३ में उन्होंने नाशिक में नेशनल टेलीकॉम ऑफ इंडिया लि. कंपनी की स्थापना की। एक टेलीकॉम मैन्युफेक्चरींग कंपनी NTIL तकनीकी फाइबर प्रोडक्ट्स और टेलीकॉम उत्पादकों का निर्माण करने वाली कंपनी थी। १९९३ में एमटीएनएल का टर्नओवर २५० करोड रूपये था। पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। १९९६ में भारत सरकार ने टेलीकॉम उत्पादों पर आयात ड्युटी नीति में बदलाव किए और आयात दर को इतना कम किया कि देश में बनाने की बजाए इन उत्पादों को आयात करना काफी सस्ता हो गया। भारत में बनने वाले इन्हीं उत्पादों पर लगे ऑक्ट्राय और करों की वजह से मैन्युफेक्चरींग महंगी हो गई। प्रकाश बी. जैन को अपनी फैक्टरी बंद करनी पड़ी। सरकार के एक फैसले की वजह से अचानक ही एक सफल बिजनस घाटे का बन गया पर फिर भी प्रकाश जैन ने समय के बदलते रंग में स्वयं को ढाला और व्यापार की एक नई शुरूआत में जुट गए। यह कोई आसान काम नहीं था पर जिन्हें अपनी प्रतिभा पर विश्वास होता है वे अपनी किस्मत खुद लिखते हैं। १९९६ में ही प्रकाश बी. जैन ने i2i एंटरप्राइज की शुरूआत की और बीपीओ सेक्टर में प्रवेश किया। और इसी के साथ उन्होंने दो नई कंपनीयों की शुरू से शुरूआत की – एक जो बीपीओ सेवाएं प्रदान करती थी (३००० कर्मचारियों को रोजगार दिया) जिसके बाद में अमेरिका के कार्लाइल ग्रुप ने अधिगृहण किया और दुसरी डेटा और नेटवर्क सुविधा वाली कंपनी जिसे लंदन (U.K.) की ब्रिटीश टेलीकॉम ने खरीद लिया। समय के साथ-साथ चलते हुए, व्यापारिक चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए प्रकाश जैन ने अपनी कार्यकुशलता और दूरदृष्टि का परिचय हर कदम पर दिया। २००९ में प्रकाश जैन ने अपने तीसरे उपक्रम इन्सपीरा एंटरप्राइज की शुरूआत की। २०१२ में इन्सपीरा ग्रुप ने सौर उर्जा क्षेत्र में प्रवेश किया और अब तक  ३०MV सोलार पावर प्लांट को GRID से जोडकर अपने नए बिजनस उपक्रम की शुरूआत की। फिलहाल इन्सपीरा PTC India के साथ पावर पर्चेस एग्रीमेंट के अंतर्गत सोलार के साथ राजस्थान में १०० रूङ्क सोलार पार्क के अनुबंध प्रक्रिया में कार्यरत है।

Honorary Doctorate to Mr Ratan Tata (Chairman Tata Enterprise) by Mr Prakash Jain for his great humanitarian work after the 26/11 terrorist attack in Mumbai
Honorary Doctorate to Mr Ratan Tata (Chairman Tata Enterprise) by Mr Prakash Jain for his great humanitarian work after the 26/11 terrorist attack in Mumbai

आज ७ वर्ष के सफर में इन्सपीरा उच्च क्षमता वाले IT नेटवर्क प्रोजेक्ट, उद्यम संसाधन आयोजना, टेलीकॉम सेवाएं, सुरक्षा और बायोमेट्रीक अनुप्रयोग और PV युक्त ग्रीड के साथ नवीनकरणीय उर्जा जैसी विविध सेवाओं में अपनी दक्षता के लिए जानी जाती है।

अपने जीवन और व्यापार से मिली सफलता का पूरा श्रेय प्रकाश बी. जैन अपनी मेहनत को देते हैं। वे कहते हैं कि बिना मेहनत के सफलता नहीं मिल सकती। अपने आस-पास के वातावरण को समझो और स्वयं को उसके अनुसार बदलो, जैसे पानी स्वरूप बदलता है। अपना नजरिया बदलो, दूसरों को दोष मत दो। अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्हें फिर से मत दोहराओ। समय का सदुपयोग करो, आज के कार्यों को कल पर मत छोड़ो। दुसरों से सम्मान के साथ पेश आओ, और वे भी आपको सम्मान देंगे। ऐसे ही कुछ जीवन मुल्यों पर चलकर प्रकाश बी. जैन ने आज अपने उद्यमों में अपार सफलता पाई है।

वे युवाओं को हमेशा समझाते रहें हैं कि अपनी सफलताओं के चलते मेहनत करना कभी नहीं रोकना चाहिए। कभी कभार ऐसा होता है कि अति-आत्मविश्वास के कारण लोग चीजों को थोडा हलके में ले लेते हैं, पर उन्होंने यही सीखा है कि ऐसा करना ही लोगों को सफलता से एक कदम दूर लाकर रोक देती है। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक रहा है। सफलता उनकी गुलाम है जो चुनौती का डटकर सामना करते हैं। दूसरों को दोष देना या उन पर निर्भर करना ही आपको सफल बनने से रोकती है। अपनी कहानी के लेखक आप स्वयं हो, और आपकी सफलता सिर्फ आप पर ही निर्भर करती है।

अपने जीवन और व्यापार से मिली सफलता का पूरा श्रेय प्रकाश बी. जैन अपनी मेहनत को देते हैं। वे कहते हैं कि बिना मेहनत के सफलता नहीं मिल सकती। अपने आस-पास के वातावरण को समझो और स्वयं को उसके अनुसार बदलो, जैसे पानी स्वरूप बदलता है। अपना नजरिया बदलो, दूसरों को दोष मत दो। अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्हें फिर से मत दोहराओ। समय का सदुपयोग करो, आज के कार्यों को कल पर मत छोड़ो। दुसरों से सम्मान के साथ पेश आओ, और वे भी आपको सम्मान देंगे। ऐसे ही कुछ जीवन मुल्यों पर चलकर प्रकाश बी. जैन ने आज अपने उद्यमों में अपार सफलता पाई है।

Prakash Jain9वे युवाओं को हमेशा समझाते रहें हैं कि अपनी सफलताओं के चलते मेहनत करना कभी नहीं रोकना चाहिए। कभी कभार ऐसा होता है कि अति-आत्मविश्वास के कारण लोग चीजों को थोडा हलके में ले लेते हैं, पर उन्होंने यही सीखा है कि ऐसा करना ही लोगों को सफलता से एक कदम दूर लाकर रोक देती है। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक रहा है। सफलता उनकी गुलाम है जो चुनौती का डटकर सामना करते हैं। दूसरों को दोष देना या उन पर निर्भर करना ही आपको सफल बनने से रोकती है। अपनी कहानी के लेखक आप स्वयं हो, और आपकी सफलता सिर्फ आप पर ही निर्भर करती है।

व्यापार व पारिवारीक जीवन के साथ-साथ प्रकाश बी. जैन ने जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JITO) के जरिए अपनी सामाजिक दायित्वों को भी निभाया है। उन्होंने जीतो के वाइस प्रेसीडेंट के कार्यभार को २००९-१३ के बीच संभाला और जीतो एडमिनिस्ट्रेटीव ट्रेनिंग फाउंडेशन (JATF) के अध्यक्ष पद पर २०१३ – १५ तक आसिन रहें। JATF एक भूतपूर्व कदम है जिसके अंतर्गत जैन समाज के ३५० से ज्यादा विद्यार्थियों को केन्द्रीय व राज्य स्तर के उच्च श्रेणी के अफसर पदों पर पहुंचाया है। वे मानते हैं कि किसी भी समाज की उन्नति उसके युवाओं की जिम्मेदारी है और हर संभव कोशिश करते हैं कि वे युवाओं को सहयोग देकर उनकी वे समाज व राष्ट्र की तरफ अपनी जिम्मेदारी पुरी करें।

Mr. Prakash Jain with Family
Prakash B. Jain with his family. Wife – Manjula Jain, Sons & Daughters-in-law – Jigar & Deepa, Chetan & Paridhi, Vishal & Hemali, Grandsons & Granddaughters – Ishita, Yashvita, Anaya. Maisha and Avyaan

इन सबके साथ-साथ प्रकाश बी. जैन अफ्रीकी देश रवांडा के कॉन्सुलेट जनरल (महावाणिज्य दूत) के आदरणीय पद पर आसीन है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित वायब्रंट गुजरात के मौके पर रवांडा सरकार और प्रतिनिधियों को प्रकाश बी. जैन ने बुलाया था। उनके व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर रवांडा के तत्कालीन राष्ट्रपति ने उन्हें कोन्सुलेट जनरल के पद पर नियुक्त किया। भारत से रवांडा में प्रकाश जैन के अथक प्रयासों से रू १३०० करोड़ का निवेश भारत से रवांडा में किया गया है। प्रकाश बी. जैन का जीवन सफर को चंद शब्दों में उतारना कोई आसान काम नहीं हैं। लाखों लोगों में से कोई एक ही होता जो अपने उच्च आदर्श, सिद्धांत, संस्कार और मेहनत के चार जीवन स्तंभों के समन्वय से अपने सफलता की गाथा स्वयं लिखता है। अपने पिता से मिले संस्कारों को जी रहे प्रकाश बी. जैन समाज, संस्कृति और सामाजिक सिद्धांतों के प्रति पूरी श्रद्धा रखते हैं। उसी तरह उनके पुत्र जिगर, चेतन और विशाल भी उनके नक्शे कदम पर चलते हुए सफलताओं की नई कहानियाँ लिख रहे हैं। शताब्दी गौरव के ‘रत्न’ प्रकाश बी. जैन युवाओं व समाज के एक प्रेरक के रूप में उभरे हैं।

 

At the 7th convocation of Jain VishwaBharati University, Ladnun Acharya Shri Mahapragya Ji, Prakash Jain, Board Member of University with Chief Guest HRD Minister Shri M M P Raju in 2013
At the 7th convocation of Jain VishwaBharati University, Ladnun Acharya Shri Mahapragya Ji, Prakash Jain, Board Member of University with Chief Guest HRD Minister Shri M M P Raju in 2013
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At Foundation Laying Ceremony; Mr Prakash Jain, Chairman of IIIT (Indian Institute of Information Technology) Kakinada, AP with Cabinet Minister HRD Shri M M P Raju in 2014
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At a Seminar organized to promote Rwanda Tourism with High Commissioner (India, Sri Lanka, Bangladesh) Mr. Earnest Vyamuko, Marketing and Tourism Manager of Rwanda Tourism Linda Mutesi and Chief Editor Shatabdi Gaurav Mr. Sidhraj Lodha