श्री कनकराज लोढा /Shree Kanakrajji Lodha :कनकराज लोढा ऐसे लोगों में हैं,...

श्री कनकराज लोढा /Shree Kanakrajji Lodha :कनकराज लोढा ऐसे लोगों में हैं, जिन्होंने मुंबई महानगर में कड़ी मेहनत की और अपना एक अलग मुकाम बनाया|

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Kanakraj Lodha
Kanakraj lodha

श्री कनकराज लोढा /Shree Kanakrajji Lodha

कनकराज लोढा ऐसे लोगों में हैं, जिन्होंने मुंबई महानगर में कड़ी मेहनत की और अपना एक अलग मुकाम बनाया| अगर सेल्फ मेड अर्थात स्वनिर्मित व्यक्ति की परिभाषा कोई पूछे और हम कनकराज लोढा कहें तो ये गलत नहीं होगा| सेल्फ मेड की युक्ति कनकराज लोढा पर पूरी तरह चरितार्थ होती है| पेशे से व्यवसायी, मन से महनती और स्वभाव से समाजसेवी कनकराज लोढा न केवल मुंबई बल्कि देशभर में गोडवाड के सिरमौर माने जाते है| अपने कार्यों से जिसने सफलता पाई या यूँ कहे केवल सफलता ही नहीं उसके उच्च शिखर पर विराजमान हुए, ऐसे ही कड़ी में कनकराज लोढा का नाम बड़े आदर और सम्मान से लिया जाता है|

शूरवीरों की भूमि राजस्थान के घाणेराव की पवित्र धरा पर जन्मे और वहीँ पले – बढे कनकराज लोढा ने मुंबई को अपनी कर्मभूमि बनाया| एम्ब्रोयडरी लेसेस और फेब्रिक्स निर्माण का काम शुरू किया| इसमें उन्हें खूब सफलता मिली| जल्द ही वे गार्मेंट एक्सेसरीज़ के इम्पोर्टर एक्सपोर्टर बन गए| मुंबई और राजस्थान में भी कोई ऐसा जाना मन व्यक्ति नहीं जो कनकराज लोढा को न जानता हो| जानने का अर्थ लोगों में उनकी प्रसिद्धि और सम्मान से है| सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों की लंबी सूची कनकराजजी लोढा को लोगों से अलग करती है| उनके कार्य करने का तरीका और उनका काम ही उन्हें उच्च शिखर पर बिठाता है| बहुत शान्ति से काम करना उनके चरित्र का हिस्सा है| अपनी मातृभूमि का क़र्ज़ उन्होंने अपने कामों से चूका दिया है| घाणेराव में स्कूल, कॉलेज और छात्रावास के अलावा चिकित्सा केन्द्र और अस्पताल का निर्माण अपनी मातृभूमि के प्रति उनकी अपनी ज़िम्मेदारी को दर्शाते है| राजस्थान और मुंबई की अनगिनत संस्थाओं के मुखिया कनकराजजी क्षेत्रपाल अतिथि गृह, गोडवाड ओसवाल जैन संघ (गोडवाड हाउस), ओसवाल संघ-घाणेराव, लोढा भाइपा मुंबई, ओसवाल जैन सेवा संघ – मुंबई और श्री दयालशा किल्ला भोजनशाला के अध्यक्ष है| वे पार्श्वनाथ उम्मेद जैन शिक्षण संघ – फालना, वरकाणा विद्यालय और विद्यावाडी के प्रमुख ट्रस्टी है| इनके अलावा भी कई संस्थाओं में उनका योगदान रहा है|

kanakraj_lodha_udaan_awardजीवन के 73 वसंत पार कर चुके कनकराज लोढा की धर्म में भी खूब आस्था है। संतों का वे सम्मान करते हैं एवं समाजसेवा उनका पहला कर्म है। इसीलिए तो धर्मङ्क्तकर्म उनकी पहली प्राथमिकताओं में है। कहा गया है कि धार्मिक कार्यों में अधिक रूचि रखने वाले मनुष्य अपने कर्म फलों को इसी जन्म में पा लेता हैं। कनकराज लोढा के साथ यह बात बिलकुल लागु होती है। उन्होंने इसी जन्म में वह सब कुछ पा लिया हैं, जिसे पाने के लिए लोग जीवन भर भटकते रहते है, पर वे सारे सुख और वैभव प्राप्त नहीं कर पाते जिनकी वे अभिलाषा रखते हैं। अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों को ही अपने कर्मो से सींचा हैं कनकराज लोढा ने। राजस्थान में न केवल घाणेराव, वरन समूचे राय में कनकराजजी द्वारा किये गए कार्यों को देखा जा सकता है। उनके द्वारा किये गए ये ऐसे कार्य हैं, जिन्होंने जीते जी अमर कर दिया हैं। उन्होंने अपने कर्मों से मुंबई को अछुता नहीं रहने दिया। दीन दुखियों की सहायता से लेकर सामाजिक भवन निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों की अनुदान से लेकर जगह-जगह धर्मशालाएं चलाने, गौशाला खोलने और प्याऊ बनवाने जैसे धर्मादा कार्यों को पूरा कराने में कनकराज जी सदैव आगे रहते हैं। मान-सम्मान और यश को वे इश्वर का वरदान मानते हैं। कभी उनकी बाते सुनेंगे तो लगता हैं किसी परम ज्ञानी से बात कर रहे है। वे कहते हैं कि हम महनत में पूरी इमानदारी रखें, तो सफलता कहीं नहीं जायेगी। वे यह भी मानते हैं कि फल देना ऊपर  वाले के हाथ हैं।

kanakraj_lodhaवह हमें जीवन में क्या देता है यह उसी के ऊपर छोड देना चाहिए। उनकी यह बात ही उन्हें एक ऊँचे व्यक्तित्व का धनी बनाती हैं। मृदुभाषी और सरल स्वभाव के धनी कनकराजजी ने शायद ही जीवन में कभी किसी का दिल दुखाया हो। उन्होंने हमेशा यही कोशिश की हैं कि कोई भी व्यक्ति उनकी बातों या उनके आचरण से दुखी न हो। इसका उन्होंने जीवन के हर पल ध्यान भी रखा। समाज सेवा के लिए उन्हें अनगिनत सम्मान और पुरस्कार मिले हैं। मरुधर विभूषण, शताब्दी भूषण , मारवाड गौरव, मारवाड रत्न, शिखर पुरुष जैसे अनेकों सम्मान से विभूषित कनकराज जी में ज़रा भी अभिमान नहीं हैं। सभी को एक समान समझते हैं और सभी में इश्वर का रूप देखते हैं। व्यवसाय-व्यापर को एक तरह से अपने परिवार की अगली पीढ़ी को सुपुर्द कर चुके हैं। फिर भी व्यवसाय का ख्याल ज़रूर रखते हैं। बिजनेस के अहम फैसले आज भी वही लेते हैं। घर-परिवार को अपने अपने संस्कारों से सीचने वाले कनकराज लोढा पक्के उसूलों वाले व्यक्ति हैं। श्री कनकराज लोढा की इस सफलता में उनकी अर्धांगनी श्रीमती रतनबेन लोढा का महत्वपूर्ण योगदान है। वे ममता एवं वात्सल्य की मूर्ति है। तभी तो अपने बच्चों और नाती-पोतों को भी उन्होंने उन्हीं संस्कारों से सींचा हैं। तभी तो आज परिवार और समाज के लोग उनके मुरीद हैं। श्री लोढा के तीनों पुत्र सुरेश, नरेश, राजेश एवं पुत्रवधुएं श्रीमती चंन्द्रिका, शीला एवं नीता लोढा व्यवसाय एवं सामाजिक कार्यों में अपने पिता हाथ बटा रहे है। अपने देश और समाज के लिए कनकराजजी ने जितने कार्य कर दिए उसे देखते हुए यही कहा जा सकता हैं कि वे एक कर्मयोगी हैं। उनका पूरा जीवन सिखने लायक हैं। कम बोलना उनका गुण हैं और यादा करना उनकी आदत। इसी कारण से यह कहा जा सकता हैं कि जीवन, ज्ञान और व्यव्हार की वे चलती-फिरती पाठशाला हैं। अपने जीवन में तपे हुए संघर्ष से स्वयं को सफल बनाने वाले कनकराज लोढा को उनकी सामाजिक सेवा और जनहित के कार्यों के लिए जाना जाता हैं और न केवल गोडवाड बल्कि पूरा मारवाड उनके सेवा कार्यों का ऋणी है।

सम्मान – अलंकरण – पुरस्कार

जैन पदमश्री
भारत की राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा पाटिल के कर कमलों से समाज रत्न अलंकरण
राजस्थान सरकार की ओर से भामाशा अवार्ड
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत के कर कमलों से मरुधर विभूषण अलंकरण
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री विलासराव देशमुख के करकमलों से शताब्दी गौरव सम्मान
मारवाड फाउन्डेशन की ओर से महाराणा प्रताप पुरस्कार
नारायण सेवा संस्थान की ओर से मानवता के मसीहा पदवी
राजस्थान प्रवासी संघ की ओर से राजस्थान रत्न सम्मान
लोढा भाइपा संस्था द्वारा लोढा रत्न सम्मान
देश के करीब ४५० से भी ज्यादा संस्थाओं द्वारा श्री कनकराज लोढा को अब तक कई बार समाज रत्न, समाज गौरव, भामाशा आदि सम्मान से नवाजा जा चूका है|
घाणेराव जैन संघ द्वारा उन्हें ‘घाणेराव रत्न सम्मान प्रदान किया गया है|
कनकराज लोढा का इन उपरोक्त महत्वपूर्ण संस्थाओं सहित देश की अनेक सामाजिक संस्थाओं, धार्मिक ट्रस्टों एवं शैक्षणिक विकास को समर्पित संस्थाओं से कई सालों से जुड़ाव रहा हैं| कई संस्थाओं और संस्थानों में अध्यक्ष एवं संरक्षक सहित विभिन्न पदों की ज़िम्मेदारी संभालने के अलावा वे हमेशा से अपनी सेवाएं देते रहे हैं|
तीर्थ दर्शन
पालीताणा
पवित्र तीर्थ स्थल पालीताणा में कनकराज लोढा द्वारा अत्याधुनिक ‘कनक रत्न विहार’ का निर्माण कराया गया हैं| तिर्थाधिराज शत्रुंजय की पावन तलहटी में ‘कनक रत्न विहार’ स्थित है| तीर्थयात्रियों की यात्रा को भावपूर्ण बनाने, उनकी आराधना को आत्मीयता प्रदान करने एवं आवास को सुखमय बनाने हेतु निर्मित २२ अत्याधुनिक कमरों से सुसज्जित इस संकुल की छटा न्यारी है| पालीताणा की इस सर्वाधिक खूबसूरत संकुल को आत्मिक सौंदर्य की स्थली रूप में भी जाना जाता है|
लोनावला
यह जो भव्य एवं खूबसूरत मंदिर हैं, वह लोनावला का मुनिसुव्रत स्वामी मंदिर हैं| कनकराज लोढा द्वारा २००७ में इसका निर्माण कराया गया| लोनावला की खूबसूरत एवं हरी भरी वादियों में इस मंदिर की शोभा कुछ अलग ही दिखती है| आचार्य श्री चन्द्रानन सागर सुरीश्वर महाराज के पावन सान्निध्य में १ फरवरी २००७ को संपन्न इसका प्रतिष्ठा महोत्सव धूमधाम से आयोजित हुआ| लोनावला के स्वप्नलोक में निर्मित इस अत्यंत सुन्दर जिनालय में नयनाभिरम दृशयावली से लोग भाविभोर हो जाते हैं|
गोडवाड
शिक्षा के प्रति कनकराज लोढा का विशेष ध्यान है| मरुभूमि मारवाड के फालना कस्बे में कनकराज लोढा द्वारा एक स्कूल का निर्माण कराया गया है| यह उसीका विहंगम दृश्य है| कनकराज सावंतराज लोढा सीनिअर सेकंडरी स्कूल के नाम से यह स्कूल अपनी विशिष्ट पढाई के लिए काफी प्रसिद्ध होता जा रहा हैं| इसी तरह ३५ साल पहले अपने गृह नगर घाणेराव में भी कनकराज लोढा द्वारा एक स्कूल का निर्माण कराया गया था| जिसका सन २०११ में पुन:निर्माण करवाने के साथ ही वहाँआधुनिक सुविधाओं का भी विकास कराया गया| फालना स्कूल में करीब ग्यारह सौ छात्र पढते हैं, एवं घाणेराव में ४५० छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं| राजस्थान, गुजरात एवं महाराष्ट्र की कई शैक्षणिक संस्थाओं सहित फालना, वरकाणा, एवं विद्यावाडी आदि में भी उनका विशिष्ट योगदान रहा ह