श्री सुभाष रुणवाल /Shree Subhash Runwal: फूलों की सुगंध और दीपक की...

श्री सुभाष रुणवाल /Shree Subhash Runwal: फूलों की सुगंध और दीपक की रोशनी की तरह सहयोग की त्रिवेणी से बंजर को हरा-भरा बनाने वाले सुभाषचंद्र रुणवाल मां भारती के ऐसे अद्भुत लाल हैं|

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Subhash Runwal
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श्री सुभाष रुणवाल /Shree Subhash Runwal

साहस के साथ संकल्पों के रथ पर बैठकर सच्चाई के रास्ते से सफलता की बुलंदियों पर पहुंचने पाले विराट व्यक्तित्व का नाम है सुभाषचन्द्र एस. रुणवाल, जीवन के हरित पट पर खुशहाली की प्राणवान सुगंध बिखेरने वाले 70 वर्षीय नौजवान हैं। उम्र के ढलान के बावजूद अपने चेहरे पर मुस्कान झलकती रहती है, न जोश में कमी दिखती है और न ही चेहरे पर थकान है। सुभाषचंद्र रुणवाल में गजब का जोश, तत्परता व समाजसेवा के कार्यों हेतु अथाह लगन है। आप कहते हैं कि मनुष्य की उदारता जलते हुए दीपक और खिलते हुए सुमन की तरह होनी चाहिए, जीने को तो जीवन सभी जीते हैं कितु सफल जीवन वह है जो औरों के लिए जिया जाता है। फूलों की सुगंध और दीपक की रोशनी की तरह सहयोग की त्रिवेणी से बंजर को हरा-भरा बनाने वाले सुभाषचंद्र रुणवाल मां भारती के ऐसे अद्भुत लाल हैं, जिन्होंने अपनी कथनी और करनी को सार्थक करते हुए कर्तव्य निष्ठा व सद्व्यवहार को जीवन संगिनी के रूप में अपने दिल में मूर्तिमान किया है। उच्च आदर्शो और सादगी से गुंथा हुआ आपका जीवन आज की नवजवान पीढी के लिए एक महानतम् प्रेरणा है।

subhash_runwal_chanda_runwal_receiving_award_from_president_pratibha_patil सुभाषचंद्र रुणवाल का जन्म महामानवों की मनोहारी धरती महाराष्ट्र के हृदय स्थल धुलिया में 23 मई 1943 को हुआ। बचपन से ही कुशाग्र बुध्दि के धनी सुभाष में गजब की विलक्षण प्रतिभा थी। अनसुलझे सवाल मिनटों में सुलझा देते थे। बचपन से ही सुभाष रुणवाल की सोच में समझ व्याप्त हो गई थी, प्रतिभाएं कभी प्रेरणाओं की मोहताज नहीं होती वे तो स्वयं अपना दीपक लेकर चलती हैं और अंधकार में प्रकाश का आह्वान करती है। सुभाष रुणवाल ऐसी ही एक प्रतिभा के रुप में उभरकर मेधावी विद्यार्थी के रूप में अपना स्वयं का मुकाम बनाया। अथक मेहनत लगन व परिश्रम की वल्गाओं से शिक्षा के उच्चतम शिखर पर आरुढ़ होने का ख्वाब हकीकत में बदलते हुए वर्ष 1967 में चार्टर्ड एकाउंटेंट (सी. ए.) की पढ़ाई में अखिल भारतीय स्तर पर पांचवां स्थान प्राप्त कर न केवल परिवार समाज, गांव बल्कि राय व सम्पूर्ण राष्ट्र का गौरव बढ़ाया सुभाषचन्द्र रुणवाल ने। जिस समय सी. ए. की पढ़ाई पूरी की तब 100 सी. ए. के विद्यार्थीयों में बमुश्किल एक या दो विद्यार्थी ही सफलता का स्वाद चख पाते थे। ऐसी परिस्थितियों में आपने सी. ए. बनने का सपना साकार कर अपने युवा जीवन को नया आकार दिया। जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही जो युवा स्वयं के बलबूते पर अपने जीवन को संवारता है आकार देता है, वही युवा मन आगे जाकर प्रगति के परचम लहराता है। सुभाषचंद्र रूणवाल एक ऐसे ही युवा का नाम था जिसने अपना लक्ष्य पाने के लिए कठिन परिश्रम किया और आत्म विश्वास एवं मेहनत की सुनहरी चाबी से अपनी किस्मत के फाटक स्वयं ने खोल दिखाए। शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां अर्जित कर श्री रुणवाल ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अपना व्यावसायिक नाता जोड़ा वर्ष 1978 में आपने अपने जीवन का एक अलग और श्रेष्ठतम अध्याय प्रारंभ किया और कूद पड़े निर्माण क्षेत्र में अपने स्वाभिमान और संगठन कौशल के साथ सूझ-बूझ का परिचय देते हुए भवन निर्माण तक का शिखर पुरुष साबित कर दिया। श्री रुणवाल ने अपनी दूरदर्शिता व्यवहार कुशलता व व्यावसायिक ईमानदारी के त्रिवेणीसंगम से मुंबई के सुप्रसिध्द भवन निर्माताओं की कतार में श्रेष्ठता के चरमोत्कर्ष शिखर पर अपना स्थान बनाया है। मुंबई एवं ठाणे के अलग-अलग क्षेत्रों में फैला आपका भवन निर्माण का कार्य आपकी कामयाबी की कहानी खुद ब खुद दर्शाती है। कदम बढ़ते गये कामयाबी कदम चूमती गई, पहले बिल्डिग फिर काम्प्लेक्स, टॉवर बनते गये। सन् 2003 में श्री रुणवाल ने मुलुंड में आधुनिक सुख सुविधाओं युक्त विशाल शॉपिंग मॉल का निर्माण किया जो सम्पूर्ण भारत में तब तक का सबसे सफल शॉपिंग मॉल था। जिसमें प्रतिदिन हजारों लोग इस मॉल की भव्यता-दिव्यता व बनावट देखने आते व खरीदी करके जातें।

subhash_runwal_conferred_with_jain_ratna_award_by_prithviraj_chauhan आपका मॉल बनाने का ये सिलसिला निरंतर जारी है। भविष्य में और भी नये रंग रूप में मॉल बनाने की योजनाओं पर तेजी से अमल किया जाता रहा है। रुणवाल ग्रुप द्वारा 4 शॉपिंग मॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। जिसमें, पहला घाटकोपर पूर्व में आर मॉल ओडियन, दुसरा ठाणे में घोडबंदर रोड पर आर. वैल्यू मॉल, तिसरा मुलुंड में आर. मॉल एवं चौथा घाटकोपर पश्चिम में आर सिटी के नाम से एल. बी. एस. मार्ग पर बनाया है। जो 14 लाख वर्गफुट का है और यह पूरे भारत में अब तक का सबसे बड़ा शॉपिग है। रुणवाल ग्रुप चार शॉपिग मॉल के धनी हो गए। घाटकोपर के प्रोजेक्ट में आपने सिगापुर सरकार की कंपनियों को अपना साझीदार बनाया है। आपका लक्ष पूरे भारत भर में नये-नये मॉल का निर्माण करना है। अभी और अनेक भवन निर्माण कार्य चल रहे हैं। भवन निर्माण की आशातीत सफलता तक ही सुभाषचन्द्र रुणवाल सीमित नहीं है। आपकी सोच का दायरा भी आपके विराट व्यक्तित्व की तरह विराट व वैविध्यपूर्ण है। ये ही वजह है कि आपने भवन निर्माण के अलावा सतारा, धुलिया तथा तमिलनाडू में पवन चक्कियां लगाकर राष्ट्र के उत्थान में व्यावसायिक दायित्वों का निर्वाह किया। सुभाषचन्द्र रूणवाल सम्पन्न होकर भी निर्भिमानी हैं। व्यवसाय के चरमोत्कर्ष शिखर पर आरूढ़ होने के बावजूद आपने भारतीय शिष्टाचार संस्कृति की सुगंध व संस्कारों की सुवासिनी देखने को मिलती है, कर्मठता, नि:स्वार्थ सेवा सभी के प्रति समानता, साहित्य सेवा, समाजसेवा, वाणी की मधुरता, विद्वता और व्यावसायिकता ये आठो गुण एक साथ हमें सरस्वती पुत्र सुभाषचंद्र रुणवाल के जीवन में साक्षात दिखायी देते हैं। सहृदय, संवेदनशील, हसमुख स्वभाव के धीर-धनी सुभाषचंद्र रुणवाल ने व्यवसाय व समाजसेवा का अद्भुत तारतम्य बनाते हुए विश्व व्यापी जैन समाज की सबसे अहम् और यिाशिल संस्था भारत जैन महामंडल से जुड़े और अपनी निष्पक्ष व निश्चल कार्यप्रणाली से जैन समाज की सबसे पुरानी चर्तुविध संघ की सामाजिक संस्था के आकाश पर भी एक स्वच्छ धवल नक्षत्र की तरह छा गये अपनी निष्काम सेवा से आपने भारत जैन महामंडल के सर्वोच्च अध्यक्ष पद पर पदासीन होने का गौरव प्राप्त किया। आपके अध्यक्षीय कार्यकाल में भगवान महावीर स्वामी का 2600 वां जन्मोत्सव पूरे देश भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यही वो समय था जब भारत सरकार ने पहली बार जैन धर्म, जैन तत्वज्ञान व महावीर के आदर्शों का प्रसार-प्रचार कर जैन धर्म की महीमा को मंडित किया तथा एक फंड जैन समाज हेतु स्वीकृत किया। भगवान महावीर के 2600 वें जन्मोत्सव में तत्काल प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं रायपाल पी. सी. एलेक्जंडर सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने शिरकत की थी। निश्चित रूप से जैन समाज में पहली बार आयोजित हुए इतने व्यापक व सुनियोजित समारोह की सफलता का श्रेय सुभाष रुणवाल की सिह जैसी पराक्रम नैतृत्व शैली को ही दिया जा सकता है। सुभाष रुणवाल देशभर की अनेको सामाजिक धार्मिक, शैक्षणिक संस्थाओं में विविध पदों पर पदासीन होकर सेवा की अलख जगा रहे हैं। तन-मन-धन से समर्पित श्री रुणवाल वो भाग्यशाली व्यक्ति है जिन्हें तपस्वी सम्राट सहज मुनि म.सा. द्वारा खार अहिसा भवन में चातुर्मास के दरम्यान किये गये 201 उपवास के पारणे पर आयोजित भव्य समारोह में स्वागताध्यक्ष बनाया गया। वाकई ये सम्मान श्री रुणवाल के लिए एक स्वर्णिम यादगार ही कहा जायेगा क्योंकि पहली बार पूरा जैन समाज इस तपस्वी मुनी के दर्शनार्थ लाखों की संख्या में एक जगह एकत्रित हुआ था। जो समाज की एकरुपता को भी दर्शा रहा था। ऐसे समारोह में स्वागताध्यक्ष बनाया जाना श्री रुणवाल के जीवन का सबसे स्वर्णिम क्षण था। ये भी सुखद संजोग सुभाष रुणवाल के जीवन से ही जुडा जब बैंगलोर में सहजमुनी ने 365 दिनों के उपवास का पारणा किया तब भी वे इस समारोह के प्रत्यक्ष गवाह बने। व अपने करकमलों को मुनी का पारणा भी करवाया।

Subhash Runwal of Runwal Group adressing JITO Ghatkopar Chapter & JITO Mumbai Zone organised Felicitation function of Shri Jayant Banthia (IAS), Chief Secretary of Maharashtra and Shri V.S. Nahata (IAS), Divisional Commissioner, Konkan Division, Govt. of Maharashtra at R City Mall, Ghatkopar West श्री रूणवाल के हृदय में समाज हित हेतु सदैव सुविचारों की नदी बहती रहती है। आपका मानना है कि अच्छाईयां ही सुखी समाज का निर्माण करती हैं। सहयोग और सद्भाव ही जीवन को नई दिशा देते हैं, आप भगवान महावीर के कथन जिओ और जीने दो को जीवन का मूलमंत्र मानते हैं। अपने पुरुषार्थ से अर्जित लक्ष्मी का सदुपयोग समाज-धर्म व शिक्षा के क्षेत्र में कर धन को धन्य बनाते हैं। आपने अपने जीवन में कई ऐसे सुकृत्य किये हैं जो आफ यशस्वी जीवन की सार्थकता का अहसास कराते हैं। आपने चेम्बूर में लगभग 4000 वर्ग फीट का जैन आराधना भवन बनाकर संघ को अर्पण किया। जहां प्रति वर्ष चातुर्मास का आयोजन करवाया जाता है। महाराष्ट्र स्थित जलगांव में यू. एन. रायसोनी विद्यालय का निर्माण करवाया जहां वर्तमान में 2 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययन कर अपने जीवन को संवार रहे हैं। छात्राओं के लिए मुंबई के समीप घोडबंदर रोड पर अत्याधुनिक आर. गर्ल्स होस्टल का निर्माण किया। जिसमें छात्राएं अपने शैक्षणिक जीवन को संवार रही हैं। घाटकोपर में आपने चिकित्सा के क्षेत्र में अनूठा योगदान देते हुए पैथोलाजीकल लेबोरेटरी का निर्माण करवाया। गत दिनों ओसवाल उत्कर्ष महामंडल का वार्षिक स्नेह सम्मेलन आपके द्वारा आर मॉल में संपन्न करवाया गया। श्री रुणवाल द्वारा एक वर्ष में दो बार नि:शुल्क 10 दिवसीय सम्मेत शिखरजी तीर्थ यात्रा आयोजित की जा रही है जिसमें 150 जरुरतमंदों को यात्रा करवाई जाती है। अभी तक 1500 से अधिक यात्रियों ने यात्रा करके अपने आपको कृतार्थ किया है। आप अपने ट्रस्ट के माध्यम से होनहार बच्चों के उच्च शिक्षा के लिए बड़े पैमाने पर शिष्यवृत्ति (स्कॉलरशिप) प्रदान कर रहे हैं। इस वर्ष करीबन 400 होनहार बच्चों को शिष्यवृत्ति दी है। ठाणे के जैन स्थानक में आपने उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग देकर धनस्वी कहलाने का गौरव हासिल किया।

नेरूल नवी मुंबई में 150 विद्यार्थियों के रुणवाल बॉयज् होस्टल का निर्माण, अमरावती के कैंसर अस्पताल में बडी राशी का योगदान, धुलिया में कार्डियाक ऍम्ब्यूलन्स और व्हिजन व्हेईकल का लोकार्पण, लायन्स क्लब मुंबई को व्हिजन व्हेईकल भेंट, नवी मुंबई लायन्स हॉस्पिटल में डायलिसीस मशीन उपलब्ध कराई। सुभाषचन्द्र रुणवाल ने समाज और परिवार के आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन में सुख और शांति का निर्माण किया है। अपने जीवन में सुकृत्य से गगनचुंबी इमारतों की तरह अपनी उपलब्धियों को आसमान की बुलंदियों तक सुभाषचंद्र रुणवाल ने पहुंचाया है। जैनों की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्था जैन इंटरनेशनल ट्रेड ओर्गनाइजेशन ‘जीतो’ के चीफ पेर्टन होने के साथ घाटकोपर चैप्टर के अध्यक्ष एवं इंटरनेशनल डायरेक्टर भी हैं। संस्था द्वारा साधु-साध्वीयों के लिए श्रमण आरोग्यम हेतु एकत्रित किए गए फंड में एक डेढ़ करोड़ की राशी का सहयोग देकर अपनी उदारता का परिचय दिया है। जीतो एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिग फाउण्डेशन के सलाहकार हैं। सुभाषचन्द्र रुणवाल सरस्वती के उपासक होने के साथ लक्ष्मी वान भी हैं। सरस्वती और लक्ष्मी का संगम भाग्यशाली विरले व्यक्तियों के घर परिवार में ही देखने सुनने को मिलता है। धन धान्य से परिपूर्ण सुभाषचंद्र रुणवाल स्वयं तो उच्च शिक्षार्थी हैं ही, आप दो होनहार पुत्र संदीप तथा सुबोध ने भी एम. बी. ए. तक उच्च शिक्षा अर्जित की है, पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए दोनों सुसंस्कारी पुत्र व्यवसाय व व्यवहार में पारंगत हैं। सुभाषचंद्र रुणवाल की सेवाओं के साथ आपकी धर्मपत्नी ‘नारीरत्न’ श्रीमती चंदा रुणवाल भी अपना सहयोग समाज के साथ जोड़ती रहती हैं। वे बहुत मृदुभाषी, आकर्षक व्यक्तित्व की धनी तथा कम शब्दों में अधिक कहने की प्रतिभा लिए हैं। एम. एस. सी. तक उच्च विद्या अध्ययन कर चुकी चंदा रुणवाल, रुणवाल परिवार के घर आंगन की लक्ष्मी हैं, जिनमें संस्कार कूट-कूट कर भरे हुए हैं। श्रीमती रुणवाल महिलाओं की नव गठित संस्था जैन सखी मंच की चेयरपर्सन, लॉयनेस क्लब की अध्यक्षा एवं जैन समाज की 110 वर्ष पुरानी भारत जैन महामंडल के महिला विभाग की भूतपूर्व सेक्रेटरी हैं। घोडबंदर रोड पर स्थित सुप्रसिध्द आर गर्ल्स होस्टल की संचालिका के रुप में श्रीमती रुणवाल ख्याति अर्जित कर रही हैं। इन्हें हाल ही में अहमदाबाद में हुए जीतो ग्लोबल समिट 2009 के समापन समारोह में जीवो (जैन इंटरनेशनल वुमेन्स ऑर्गनाइजेशन) की अध्यक्षा चुना गया था। अनगिनित सम्मानों से सम्मानित श्री रुणवाल को उनकी समाजसेवा को मद्देनजर रखते हुए महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभाताई पाटिल के करकमलों से राष्ट्रपति भवन में ‘समाजरत्न’ से सम्मानित किया। श्री जैन केलवणी मंडल द्वारा ‘सरस्वती भूषण’ से नवाजा गया। जीतो एक्सलेंस ऍवार्ड 2012 के शिक्षा अभियान के अर्न्तगत ‘जीतो एक्सलन्स ऍवार्ड इन द फिल्ड ऑफ एयुकेशन एण्ड लिट्रेसी’ से नवाजा गया। अप्रैल २०१३ में महावीर जयन्ती के अवसर पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा जैन रत्न से सम्मानित किया गया ! सुभाषचंद्र रुणवाल उन विरल व्यक्तियों में से एक हैं जिन्हों ने सुख-समृध्दि ऐश्वर्य, प्रतिष्ठा व पहचान सब कुछ प्राप्त कर भी अहम और वहम से स्वयं को दूर रखा और सफलता का स्वाद चखने के बावजूद समाज की हर गतिविधियों से अपना नाता जोड़े रखा। जहां तन की जरूरत पड़ी तन, जहां श्रध्दा व आस्था के रंग भरने का अवसर मिला वहां मन और सद्कार्यों में धन अर्थात तन-मन-धन लुटाकर महावीर के सच्चे उपासक बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।