श्री उत्तम के जैन /Shree Uttam Jain :तपती धरा पर पेड़ लगाने,...

श्री उत्तम के जैन /Shree Uttam Jain :तपती धरा पर पेड़ लगाने, प्यास से व्याकुल प्राणों को जल की सेवा प्राप्त करवाने की, प्रभु भक्ति के आयोजन – उत्सवों में सहयोग की व्यवस्था करने

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Uttam Jain
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तपती धरा पर पेड़ लगाने, प्यास से व्याकुल प्राणों को जल की सेवा प्राप्त करवाने की, प्रभु भक्ति के आयोजन – उत्सवों में सहयोग की व्यवस्था करने तथा इसी तरह के अनेक जनहित के कार्यो को सम्पूर्णता तन-मन-धन से प्रदान करना और वह भी बिना किसी प्रचार के! जहाँ तक हो सके स्वयं के नाम को उजागर न करवाने की इच्छा रखना माँ के मुखार विंद से निकले कथन को क्रियान्वीत करना ये सब गुण-धर्म एक साथ उत्तम केशरीमलजी जैन में देखे जा सकते है। पालडी एम हाल सुमेरपुर की गर्विली माटी में पिता श्री केशरीमलजी और माता श्रीमती शांतीदेवी के महकते आंगन में उत्तम जैन ने जन्म लिया गोय्डवाड की राजधानी वरकाणा में एस. एस. सी. की परीक्षा पास कर माया नगरी मुंबई से बी. कॉम. की पढाई पूर्ण की! कार्य के प्रति समर्पित भाव से पूर्ण संकल्प और परिश्रम की अंगुलिया थामें उत्तम जैन निश्चित तौर पर अपनी मंझिल प्राप्त करने का विश्वास लिए सक्रिय रहते है। महानगर मुंबई को अपना कर्मस्थल चुना और जुड गये अपने पैतृक दवाइयों के थोक व्यवसाय से यही पर आपने उज्जवल भविष्य को सतरंगी रंगो से मुखारित किया। अपनी क्षमता, सुझबुझ, कड़े परिश्रम और लोगों के प्रति अपनेपन ने आपको उन्नति के मार्ग का सफल यात्री बना दिया फलस्वरूप 27 वर्ष पूर्व 1982 में स्थापित नियोन लेब्रोरेटरीज् ली. की दवाईयों की खपत न केवल हिन्दुस्तान में बल्कि विदेशी सरजमी पर खपने लगी विश्व के 20 देशों में यह दवाईया सप्लाई की जा रही है एशिया, अफ्रीका, सी.आई.एस. मे नियोन लेब्रोरेटरीज कं. की दवाईयों की जोरदार खपत है। पिछले तीन वर्षों से सतत् श्रीलंका सरकार द्वारा श्रेष्ठ निर्यातक ‘बेस्ट एक्सपोर्टर’ एवार्ड से सम्मानित किऐ जा रहे है। जो समस्त राजस्थानी समाज के लिए गौरवशाली पल है। ज्ञातव्य हो कि नियोन लेब्रोरेटरीज लि. दवाइयों के उत्पादन में देश की नामचीन कंपनियों की फेहरीस्त में शामिल है।

 

सुनहरे जीवन के 55वें झिलमिल मंच पर विराजमान उत्तम के. जैन बाल्यकाल से ही भविष्य की संभावनाओं को तलाशने में लगे रहते थे। जीवन के हर क्षेत्र में अपने विचारों के सक्रिय चित्र उकेरते रहै। अध्ययन के पश्चात व्यवसाय में सलग्न उत्तम जैन ने अपने लिऐ एक नई दिशा एक नयी सोच व अपने पैतृक व्यवसाय में एक नया उद्यम खोजकर सफलता से उसे स्थापित किया और दत्तचित होकर अपने कार्य में लगे रहतें धीरे-धीरे उन्होंने अपने परिश्रम, धैर्य, साहस और इमानदारी के बल पर अपने सपनो में रंग भरना शुरू किया। और देश के गिने-चुने जीवन रक्षक दवाईयों के निर्माता के रूप में पहचाने जाने लगे।

 

ashok_jain_of_neon_laboratoriespravin_jain_of_neon_laboratoriesनियोन लेब्रोरेटरीज के विस्तार में उत्तम के. जैन के साथ उनके अनुज अशोक जैन और प्रवीण जैन की महत्वपूर्ण भूमिका है | तीनो भाइयों में व्यवसाय के साथ सामाजिक कार्यों में तालमेल का अनूठा संगम हैं जो समाज में गहरी छाप छोडती है | कहते है जहाँ संप है वही सम्पति का वास है और यह कहावत जैन परिवार पर एकदम सार्थक साबित होती है | वैसे हम आसपास दृष्टि दौड़ाएँ तो हमें राम-भरत जैसे भाइयों की कई जोड़ियाँ मिल जाएँगी। संयुक्त परिवार तो टिके भी ऐसी ही जोड़ियों की वजह से हैं। तभी उनके यहाँ सुख है, क्योंकि वे छोटे-मोटे लाभ के लिए बड़ी-बड़ी खुशियों को दाँव पर नहीं लगाते। वे जानते हैं कि एक साथ रहने में, एक रहने में जितने लाभ हैं, उतनी हानियाँ नहीं। कहते हैं कि संयुक्त परिवार में भगवान का वास होता है।आखिर क्यों न होगा वास, क्योंकि वहाँ आपसी प्रेम जो होता है और प्रेम भी तो भगवान का ही रूप है न। और फिर जहाँ भगवान है, वहाँ सुख, शांति, शक्ति, संपत्ति सभी कुछ तो होंगे ही।

uttam_jain_neon_laborarories_mahavir_hospital_sumerpurवर्तमान में आपके एक मात्र होनहार सुपुत्र अभय जैन एम.बी.ए. की डिग्री प्राप्त कर पिताजी के साथ कम्पनी में कार्यरत है। पिता के पदचिन्हों पर चलकर कुछ-कुछ में सबकुछ करने की प्रबल भावनाओं से लवरेज अभय जैन में क्षमताओं का अकूट भंडार है अभय जैन समय-समय पर अपनी दूरदर्शिता के प्रमाण पेश करके पिता को सुखद अहसास का विश्वास दिलाते है। पुत्र की गौरवशाली उपलब्धियों से प्रसन्न उत्तम जैन अब अपना लक्ष्य समाज, गाँव, धर्म व राष्ट्र के उत्थान हेतू निर्धारित कर समाजसेवा से जुड़े है। आपको धार्मिक संस्कार अपने परिवार से ही विरासत में मिले। व्यवसाय और समाज सेवा का तारतम्य बिठाते हुये उत्तम जैन समाज सेवा के प्रति भी आग्रहशील हुए और समय निकालकर यथा संभव अपनी सेवाए समाज के विभिन्न कार्यो में देने लगें। लोगों के साथ शीघ्र ही धुलमिल जाना और उनके दुखः में अपनी सहयोग की कामना से अपनापन देकर उनके साथ जुड़ा जाना आपका सुसंस्कार है। कर्म के प्रति निष्ठा व धर्म के प्रति अकूट श्रध्द ने उत्तम जैन को हर मोर्चे पर सफलताओं का स्वाद चखाया उत्तम जैन ने उत्कृष्ठ भावो से जिस मंझिल पर कदम रखा अपनी उपस्थिति से उपलब्धियों का आसमान अंकित कर दिया। उत्तम के. जैन की कार्यप्रणाली, संकल्प शक्ति, तीव्रगति, व संकल्प की निरंतरता, त्वरीत निर्णय क्षमता ने न केवल व्यवसाय में बल्कि सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक व साहित्य के क्षेत्र में अपना वजुद स्थापित कर स्वयं अपनी जमीन तैयार की और महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुये, सेवा के जज्बे को मन में आत्मसाद कर उन्होंने तेजी से प्रसारीत हो रही जैन समाज की विश्व व्यापी संस्था (जीतो) जैन इन्टरनेशनल ट्रेड आर्गेनाईजेशन के फाऊडर चीफ पैर्टन (एफ.सी.पी.) बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। जैन धर्म के चारो सम्प्रदायों की एकजुट करने वाले जैन ट्रेड आर्गेनाईजेशन ने जैन समाज की नई दशा व दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण कामयाबी प्राप्त की है। जीतो के माध्यम से समाज में सकारात्मक प्रवृत्तियों की पहल करने में उत्तम जैन विशेष रूप से सक्रिय है। आपकी सोच में सागर की गहराई है। अपनी सोच के सागर से समझ के मोती निकाल कर उत्तमजी ने उत्तम बात कही जिसमें सर्व प्रथम जैन धर्म को भगवान महावीर के सिध्दन्तो पर ले जाकर धर्म को व्यवहार में लाना चाहिऐ। उत्तम जैन के कथनानुसार देश में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है परन्तु जैनो का ग्राफ मात्र 1 प्रतिशत है और वो भी चार (गच्छों) सम्प्रदायों में विभाजीत है। जो हमारी एकता व अखण्डता के लिए नागावार है विश्व व्यापी जैन समाज को एकजुट होकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करना चाहिये, तभी हम प्रगति के परचम लहरा पायेंगे। उनके अनुसार जैन समाज के सभी गच्छों (सम्प्रदायो) में तकरीबन – तकरीबन समानता है, हमारी नवकार एक, महावीर एक, गच्छ अलग – अलग पर जैन धर्म एक है तो फिर हमारे में एकता क्यू नही? यह एक यक्ष प्रश्न है, जिसे हमारे संतो को व समाज के अग्रणीयों को मंत्रणा करके जवाब ढुढना चाहिये। समय रहते अगर हमने सामाजिक एकता को नही अपनाया तो जैन समाज अपना अस्तित्व खो देगा और हम अपनी विरासत को बचा नही पायेगे। यकीनन उत्तम के जैन की व्यथा वर्तमान संदर्भ में सटीक है उनके अनुसार अब जैनो को सिर्फ जैन कहलाने में फक्र महसूस होना चाहिये न की श्वेताम्बर, दिगम्बर, स्थानकवासी या तेरापंथी जिस दिन ऐसा होगा वो दिन वो समय इतिहास के स्वर्ण पृष्ठों पर अंकित होगा।

 

uttam_jain_spc_convention_award_srilankaउत्तम के. जैन युवा पीढ़ी के सही मायनों में प्रतिनिधी कहें जा सकते है। उनके अनुसार युवा पीढ़ी ही समाज के लिए कुछ करेगी इसीलिए उत्तम के. जैन स्थापित बुर्जुग लोगों से युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करने की गुजारिश करते है उत्तम के जैन के अनुसार युवा पीढ़ी ऊर्जावान होने के साथ-साथ समाज, राज्य व राष्ट्र से ठीक-ठीक तरह से जुड़ने के उपक्रमों में सलग्न है। उत्तम के. जैन शिक्षा को जीवन का मूलमंत्र मानते है। उनके अनुसार प्रतिस्पर्धा के सधन दौर में अज्ञानता इंसान के कदम-कदम पर अडचने पैदा करती है। शिक्षित व्यक्ति अपना फ़ायदा खुद सी सकता है अशिक्षित व्यक्ति अपने सपनों को मरते हुये स्वयं महसूस करता है। निरक्षरता के अंधकार में डूबे देश के 50 करोड़ लोग देश की एकता के बारे में जानते ही नहीं है। यह एक कड़वा सत्य है यदि राष्ट्र को मजबुत विकसीत दिव्य और उन्नत राष्ट्र बनाना है तो हमे सबसे पहले विद्यार्थियों को विचारवान और अच्छा नागरिक बनाना होगा अच्छे विद्यार्थी ही राष्ट्र की सच्ची घरोहर है। स्वभाव में धीर-गंभीर श्री जैन टूटे बिखरे मनुष्य मन को जोड़ने व उसमें विश्वास भरने की ललक पैदा करने वाले उत्तम व्यक्तित्व है आपके द्वारा समाज सेवा व धर्म की जो मशाल जलाई गई है वो दुर तक पहुँच रही है आपने अपने पुरूषार्थ से अर्जित लक्ष्मी का सदुपयोग कर पूण्य की फसल बोने का अनुठा सुकृत्य किया है। मां को देवी का दर्जा देने वाले उत्तम जैन मां के चरणों में जन्नत मानते है आप कहते है कि ”माँ का दूध सुधा सा, इनकी कौन लगा सकता कीमत?” माँ की सेवा अमर साधना यह विध्दवानो का अभिमत उत्तम के. जैन कहते है माँ जिंदगी जीना सिखलाती है ईश्वर सब जगह नहीं पहुँच सकता इसलिए उसने माँ का सर्जन किया है। उत्तम के जैन कथनी ओर करनी में विश्वास रखते है और माँ की सेवा और उनके आदेश को अपने जीवन का मूलमंत्र मानते है अपनी कथनी को करनी में परिणित करते हुये उन्होंने मातुश्री शांतीदेवी केशरीमलजी जैन के सौजन्य से सुमेरपुर के भगवान महावीर अस्पताल में सीटी स्कीन मशीन लगवाने का सुकृत्य किया है मुंबई के महत्वपूर्ण बोरीवली स्थित जामली गली जैन मंदीर मे केशर-सुकड़ गृह का लाभ लेकर परमात्मा की पुजा करने वालो का आर्शिवाद प्राप्त किया है। भारत के एकमात्र सुरिमंत्र मंदिर आगलोट में गुरूदेव श्री आनंदघन सूरीश्वरजी की निश्रा में सम्पन्न प्रतिष्ठा में कई महत्वपूर्ण लाभ लेकर गुरू भक्ति का अनुठा भाव दर्शाया इसके अलावा प्रताप धाम सातीवली विरार के विहार धाम के अर्थ सहयोगी बनने का सौभाग्य भी प्राप्त किया है। हाल ही में महावीर अस्पताल, सुमेरपुर में ऑपरेशन थियेटर का निर्माण कराकर चिकित्सा क्षेत्र में आपने अपना अमूल्य योगदान दिया है इसके साथ ही सोने के सुहागा के रूप में शांति भुवन न्याति नोहरे का निर्माण करवाकर जन्मभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया है | श्री जैन गुरू भगवन्तो की भक्ति व वयावच्छ को अपने सुकर्मो का उपहार मानते है। आप कहते है कि गुरू बिन जग सुना अंधकार में प्रकाश का आहवान करने वाले गुरू ही होते है यदि भगवान हमसे रूष्ठ हो जाये तो हम गुरू के पास अपना ठिकाना ढूंढ सकते है परन्तु गुरू रूठ जाये तो हमे कोई सहारा नही मिलता है गुरू ही हमारे गुणों को बय्ढावा देते है उनकी सेवा श्रुसेवा जीवन का अनमोल आनंद व धर्म है। श्री जैन गुरू जो कहे वो करते है। उनके आदेश को पत्थर की लकीर मानते है। वे सभी संप्रदाय के गुरूदेवों को जीवन का आदर्श मानते है उत्तम के जैन मानव सेवा को उत्तम धर्म मानते है इसलिए, चिकित्सा शिवीरों में बढ़ –चढ़ कर भाग लेते है व हर तरफा सहयोग भी प्रदत करते है। जीवदया में भी आप उदारमन से दान देते है व स्वयं गोशालाओं का निरीक्षण कर वहां कमीयों को पुरा करवाते है आपके इन सुकृत्यों में आपकी धर्मपरायण धर्मपत्नी श्रीमती चंचल देवी चंचल मन से साथ देती है श्रीमती चंचल देवी विचारवान विशुध्द भाव रखने वाली भावनात्मक महिला है। जो पति के हर सुकृत्यों की बराबर की भागीदार व प्रेरणा स्त्रोत है। उत्तम के जैन साहित्य को समाज का दर्पण मानते है आप समाज की संरक्षणा में प्रादेशिक समाचार पत्रो की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते है उनका कहना है कि पाक्षिक प्रादेशिक समाचार पत्र समाज की सुक्ष्म से सुक्ष्म गतिविधियों को प्रकाश में लाते है व छुपी प्रतिभाओं की पहचान करवाते है |