श्री मगन मेहता /Shree Magan Mehta:मगनलाल मेहता ऐसे कुल दीपक साबित हुए...

श्री मगन मेहता /Shree Magan Mehta:मगनलाल मेहता ऐसे कुल दीपक साबित हुए कि आज अपने कर्म और पुरुषार्थ के बूते न केवल अपने माता-पिता, परिवार बल्कि गांव व समाज के अलावा व्यवसायिक जगत में अपनी शोहरत का ऐसा झंडा गाड़ दिया

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Magan Mehta
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श्री मगन मेहता /Shree Magan Mehta

परिश्रम और विश्वास के बलबूते चीन की दीवार को भी लांघा जा सकता है। हौसले बुलंद हो, मन में कुछ कर गुजरने की ईच्छा शक्ति हो तो क्या असंभव है, किसने सोचा था कि एक दिन मानव चांद तक पहुंच जायेगा, पर इसी मानव ने ख्वाब को हकीकत बनाकर खा दिया कि जीवन में मेहनत, सूझबूझ और दृढ़ संकल्प हो तो हर सपना साकार हो सकता है, धीरज और निष्ठा व्यक्ति को सफलता के चरमोत्कर्ष शिखर पर ले जाती है, इसी निष्ठा और कर्मठता के बूते कई उतार-चढ़ाव के बावजूद जीवन में संघर्ष कर काम को देवता मान सफलता के लिए निरंतर जुझते-जुझते साधना और समर्पण भाव से तूफान में दिया जलाने वाले कर्मवीर हैं मगनलाल मूलचंदजी मेहता, गोडवाड की गौरवशाली साण्डेराव की धन्य धरा में पिता मूलचंदजी व माता श्रीमती हुलासीबाई के घर आंगन में खिले फूल मगनलाल मेहता ऐसे कुल दीपक साबित हुए कि आज अपने कर्म और पुरुषार्थ के बूते न केवल अपने माता-पिता, परिवार बल्कि गांव व समाज के अलावा व्यवसायिक जगत में अपनी शोहरत का ऐसा झंडा गाड़ दिया कि जिसकी मिसाल कम ही देखने को मिलती है। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपरिहार्य कारणों से मात्र महाजनी शिक्षा ग्रहण करने के साथ १३ वर्ष की अल्प आयु में अपने परिवार की जिम्मेदारियां नाजुक कंधों पर उठाते हुए गुजरात स्थित नवसारी में किराणा व्यवसाय में संलग्न अपने पिताश्री के साथ उन्हें सहयोग करने के उद्देश्य से जुड़ गये। खेलने-कूदने व पढ़ने की उम्र में मगन व्यवसायिक लय प्राप्त करने की धून में एकाग्रता, संयम व धैर्य के साथ तल्लीन हो गये। दो वर्षों तक इस व्यवसाय में जुटे रहकर व्यवसायिक बारिकियों का अनुभव तो प्राप्त किया पर एक दायरे में सिमट से गये। श्री मेहता के दिमाग में कुछ अलग ही लगन थी, वे इस व्यवसाय से मुक्त होकर कई और छलांग लगाने की सोच ही रहे थे कि अपने नानाजी का फिरोजाबाद से उन्हें संदेश मिला कि तुम्हे यहां आकर हमारे बंगडी व्यवसाय में हाथ बंटाना है।

 

magan_mehta_receiving_award_for_social_contributionकल्पनाओं का आकाश लिए बालक मगन फिरोजाबाद के लिए रवाना हो गये। यहां आपने सतत् ८ वर्षों तक परिश्रम, कर्मठता, लगन और व्यवस्थित समझदारी के बलबूते इस व्यवसाय में व इस क्षेत्र में अपनी एक अलग ही पहचान बना ली और यहीं से आरंभ हुआ उनका झुझारूपन। मगन में एक अलग ही लगन दिखाई देने लगी। कुछ करने की कुछ दिखाने की अंततः वर्ष १९६८ में ग्लास बैंगल्स का कारखाना भैरव ग्लास वर्क्स के नाम से तथा सी. एम. मेहता मीनीयोचर बल्ब इण्डस्ट्रीज की स्थापना कर कांच की चूड़यां व बल्ब बनाने का कार्य प्रारंभ किया। १९६८ से १९७१ तक इन प्रतिष्ठानों को पल्लवित कर व्यवसायिक सफलता प्राप्त कराने की दिशा में कई कारगर कदम उठाये लेकिन, सफलता-असफलता के दौर से आप उभर नहीं पाये। पहले ही कदम पर निराशा ने घेर लिया। तीन वर्षों के अथक परिश्रम के बावजूद सफलताओं के लिए तरसते मगनलाल मेहता ने भैरव ग्लास कंपनी को बंद कर एक नये प्रतिष्ठान अपोलो ग्लास इण्डस्ट्रीज की स्थापना की, लेकिन एक बार फिर किस्मत धोखा दे गई, लेकिन मगनलाल मेहता ने हिम्मत नहीं हारी उन्होंने ये साबित कर दिया कि जो तूफानों में पले हैं, वो ही मर्द कहलाते हैं। असफलताओं से अविचलित हुए बिना वर्ष १९७१ में पुनः धाकड़ प्रोडक्ट प्रतिष्ठान की स्थापना की जिसमें बल्ब पैक कर सप्लाई करने का कार्य प्रारंभ किया लेकिन फिर भी सफलता ने चरण नहीं चूमे, नुकसान पर नुकसान मजबूत से मजबूत व्यक्तित्व की नींव हिल जाती है, फिर भी मगनलाल मेहता ने विश्वास नहीं खोया, फिरोजाबाद से १९७२ में महानगरी मुंबई से नाता जोड़ा। ओटला नहीं रोटला नहीं जो पोटला था वो भी खाली फिर भी मन में इरादे मजबूत थे, इसी कशमकश में गुलालवाड़ी में मात्र ३२५ रुपये मासिक पगार पर ज्योति वायर इण्डस्ट्रीज में सहायक सेल्स मैनेजर के पद पर कार्य किया। सेठ से चाकर बनकर भी आफ चेहरे पर कोई शिकन कभी नहीं देखी। कर्म ही कामधेनु है, के मंत्र को आत्मसाद करते हुए भविष्य की संभावनाओं की तलाश में पहले से भी ज्यादा जोर-शोर से जुट गए। पूर्ण नेकनियति, निष्ठा व ईमानदारी से संघर्ष की डोर थामे अपने दायित्वों का निर्वाहन करते रहे। जीविका सुचारू रूप से चले इसके लिए वे समय निकाल कर दो जगह एकाउंटींग का कार्य भी करने लगे। सतत् २ वर्षों तक ये जद्दोजहद चलती रही। जवानी व्यतीत हो रही थी, सपने अपने नहीं हो रहे थे, ऐसी परिस्थितियों में आदमी उडान भरने की बजाय गर्त में चला जाता है। परंतु मगनलाल मेहता तो पता नहीं किस मिट्टी के बने हुए थे। भारी क्षति के बावजूद हौसला न हारते हुए वर्ष १९७४ में बार्शी स्थित अपने अनुज फुटरमल मेहता (फायर मैन) जो स्क्रेप व्यवसाय में संलग्न थे, उनसे इस व्यवसाय की जानकारी प्राप्त की बाजार की संभवना को टटोला और एक नये उत्साह के साथ दारुखाना में स्क्रेप व्यवसाय प्रारंभ किया। १ वर्ष के अनुभव ने व्यवसायिक जोड़-तोड़ में आपको पारंगत बना दिया। वैसे भी दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, कदम-कदम की मुसीबतों से जूझते हुए मेहता का भाग्य उदय होने का संकेत दे रहा था। मस्त से पस्त होकर अस्त हो उससे पूर्व ईश्वरीय वरदान के स्वरूप बनकर उनके मामाश्री बाबुलालजी के सहयोग से मेहता ट्रेडिग कार्पोरेशन नामक प्रतिष्ठान प्रारंभ किया। वे पूर्व की भांति लगातार जूझते रहे, बार-बार जूझ ते रहे कार्य को अधूरा छोड़ना उन्होंने सीखा ही नहीं।

magan_mehta_varkanaश्रीमान बाबुलालजी का मार्गदर्शन सहयोग व सानिध्य मगनलाल मेहता के लिए वरदान साबित हुआ और इस प्रतिष्ठान ने उन्हें अपनी खोई हुई प्रतिष्ठान को फिर प्राप्त करा दिया, अक्सर लोग कहते हैं, निरंतर झंझावतों से जूंझकर, कामयाबी की मंजिल पर चढ़ना निःसंदेह उस व्यक्ति के लिए सबसे बड़ा शाश्वत सुख होता है। मात्र तीन वर्षों की उपलब्धि में मेहता ट्रेडिग कंपनी कार्पोरेशन के माध्यम से मगनलाल मेहता ही कर्ज रुपी बोझ सर से उठा स्वयं को पूर्णतया तरोताजा जवान महसूस कर फिर अपने कर्म से जुट गये इस अप्रत्याशित, सफलता ने मगनलाल मेहता को बेहद पारदर्शी, पारंगत व परिपक्व व्यक्ति बना दिया, सफलता ने उनके विवेक को क्षति नहीं पहुंचाई, वे व्यवहारिक बने रहे तथा आज भी व्यवहारिकता को उन्होंने अपना मूल मंत्र बनाया है। ये ही कारण है कि श्री मेहता अपने दुर्दांत दिनों में कहते हैं घी में घी सब डालते हैं, पर तेल में घी कोई नहीं डालता, मामाश्री बाबुलालजी ने तेल में घी डालकर एक मद्धिम होती रोशनी को चमकाया। अथक मेहनत व परिश्रम की वल्गाओं ने आखिरकार उन्हें थाम ही लिया और प्रारंभ हुआ एक सफलता का ऐसा अध्याय जिस पर समाज, राज्य व राष्ट्र गर्व कर सकता है। कहते हैं, जहां चाह, वहां राह खुद ब खुद बनती है। तथा जहां पहल होती है वहां चहल होती है और उस चहल-पहल से सपनों का महल खड़ा होता है। आज इसी बात को सिद्ध करते हुए श्री मेहता ने एस. एम. इण्डस्ट्रीयल सप्लायर्स, बेंगलोर, हैदराबाद में एस. एम. इण्डस्ट्रीयल सप्लायर्स, बडोदरा (बालेज) में मेहता ट्रेडिग कोर्पोरेशन की दूसरी शाखा, पुणे में मधुबन स्टील प्रा. लि. की स्थापना,एस. एम. इण्ड्स्ट्रीयल सप्लायर्स की मद्रास में तीसरी शाखा, अहमदाबाद में एम. टी. सी. बिजनेस प्रा. लि., मुंबई के कलंबोली में (एम. एम. सिरेमिक्स सोल डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पेडर एण्ड पेडर टाईल्स लि.), मुंबई के अंधेरी में हाइड्रोबाथ प्रतिष्ठान जिसमें इम्पर्टड सेनेट्रीवेअर, बाथटब खूबसूरत व आकर्षक स्टाईल्स में उपलब्ध होते। इसके अलावा दुबई में भी आपने अपने व्यवसायिक दायरे को बढ़ाते हुए एम. एम. एसोसिएट की स्थापना की तथा मेहता ग्रुपका समुह स्थापित कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। इतना ही नहीं मुंबई में महावीर इण्डस्ट्रीज की स्थापना की, जहां इलेकट्रीकल्स स्टेपींग व लेमिनेशन मेन्युफेक्टरींग का कार्य संचालित होता है। आफ प्रतिष्ठानों से स्क्रेपकी सप्लाई देश की नामचीन कंपनियों में सुचारू रूपसे होती है। बजाज, टेल्को, महेन्द्रा एण्ड महेन्द्रा, अशोक लिलैंड, हुंडाई, टोयटा जैसी १५० से अधिक कम्पनियों के साथ सालाना २०० करोड़ से भी अधिक व्यवसाय करते हैं। देश भर में फैले हुए व्यवसायिक केंद्रों को आज उनके तीन ऊर्जावान, धीर-वीर-गंभीर संस्कारों से ओतप्रोत सुपुत्र क्रमशः नरेन्द्र मेहता, संजय मेहता व मनोज मेहता पूरी कार्यकुशलता के साथ संचालित कर रहे हैं। अब जब मगन मेहता ६० वर्ष की उमर में प्रवेश कर चुके हैं, बावजूद इसके वे आज भी दमखम रखते हैं। आज भी आफ चेहरे पर एक सक्रिय व्यक्तित्व की चमक देखी जा सकती है। जीवन और उससे जुड़ी तमाम बातों के प्रति आपका नजरिया बहुत ही साफ और सुलझा हुआ है। मगन मेहता जब कुछ नहीं थे तब भी मस्तमौला, सबके साथ हिल-मिल कर अपनापन दर्शाते थे। आज जब साधन सम्पन्न देश के नाम चिन्ह उद्यमियों की फेहरिस्त में शामिल हो चुके हैं, तब भी वे वैसे ही मस्त, सरल व सादगी से लवरेज भावनाप्रद व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। स्पष्टवादी, साफ-सुथरी छवि से ओत-प्रोत, जीवन में पारदर्शिता को अपनाकर नेकनियति से जीवन निर्वाह कर रहे मगनलाल मेहता की सोच भी बेहद परिपक्व है। आप आज की युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर काफी चितित रहते हैं। आज की पीढ़ी उन्हें अब संभलना होगा, समय के साथ हर वर्ग व हर उमर के लोगों में बदलाव को आप आवश्यक मानते हैं। जैन समाज के युवाओं को अब व्यवसाय से दो कदम आगे भावी भविष्य को निर्धारित करने हेतु राजनीति में भी प्रवेश करना चाहिए। शिक्षा को देश में अनिवार्य किया जाये तथा व्यवहारिक शिक्षा नैतिक शिक्षा व व्यवसायिक शिक्षा का ज्ञान भी बच्चों को बाल्यकाल से दिया जाये। आपका कहना है कि संघर्ष ही जीवन है, जिस मनुष्य में आलस व अकड़ है वो प्रायः मृतक के समान है। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो इंसान को मेहनत से पीछे नहीं हटना चाहिए तथा धैर्य और विश्वास बरकरार रखना चाहिए। श्री मेहता आडम्बर रहित समाज के पक्षधर हैं, आपका मानना है कि समाज व राष्ट्र की प्रगति तभी संभव होगी जब हम दिखावों से दूर रहकर वास्तविकता से सरोकार करेंगे। मेहता की कथनी और करनी में कोई फरक नहीं है। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते भी हैं, सेवा की भावना आपमे कूट-कूट कर भरी हुई है, परहित सेवा को आप परमात्मा की सेवा बताते हैं। व्यवसाय और समाजसेवा का सटीक तालमेल बिठाते हुए दोनों ही सुकृत्यों में अपनी अहम् भूमिका निर्वाह कर यशस्वी बनने का गौरव प्राप्त कर रहे हैं। मगन मेहता श्री धर्म जैन विद्यापीठ मधुबनी शिखरजी के सचिव पद पर कार्यरत हैं। आपने जैनों के इस ऐतिहासिक तीर्थ भूमि पर अपने स्वद्रव्य से दो हाल का निर्माण करवाकर अपनी सहृदयता व उदारता का परिचय दिया है। श्री सांडेराव जैन देवस्थान पेढ़ी के ट्रस्टी तथा श्रीमती मानबाई मुरडीया हॉस्पिटल उदयपुर के ट्रस्टी पद पर तन-मन-धन से सेवाएं दे रहे हैं। आप गोडवाड की शिक्षण संस्था श्री पार्श्वनाथ जैन विद्यालय वरकाणा एवं श्री पार्श्वनाथ उम्मेद जैन शिक्षण संघ फालना के सदस्य भी हैं। श्री मेहता समाज के एक ऐसे वृक्ष हैं। जिनकी छांव में कितने ही कर्णधार पल्लवित हो रहे हैं। आप एक प्रेरणा है, मेहनतकश इंसानों के लिए जो मेहनत करने के बावजूद असफल होकर हार मान लेते हैं। आप कहते हैं छोटी सी चींटी अपने मुकाम तक पहुंचने के लिए गिरती है फिर चढ़ती है, लेकिन अंत में कामयाब होती है।