श्री के. सी. जैन /Shree KC Jain :मन और वचन से शुद्ध...

श्री के. सी. जैन /Shree KC Jain :मन और वचन से शुद्ध सात्विक, स्नेह और सहयोग की जैसे प्राणों में नदी बहती हो। संवेदना आपने राजस्थान की गर्विली माटी के पाली जिला स्थित खिवांदी गांव में पहली सांसें लीं।

SHARE
K C Jain
K C Jain

श्री के. सी. जैन /Shree KC Jain

Shree KC Jain

मन और वचन से शुद्ध सात्विक, स्नेह और सहयोग की जैसे प्राणों में नदी बहती हो। संवेदना आपने राजस्थान की गर्विली माटी के पाली जिला स्थित खिवांदी गांव में पहली सांसें लीं। आपका जन्म २४ अगस्त १९३८ को चिमनलाल जैन के यहां हुआ। चंचल प्रवृत्ती के बालक कुंदन बचपन से ही कुशाग्र बुद्धी के धनी थे। आपकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई। तत् पश्चात वर्ष १९६० में आपने युनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता से बी. कॉम की पढ़ाई पूरी कर नवंबर १९६३ में सी. ए. चार्टर्ड एकाउंटेंट बने, तत् पश्चात आपने सतत् तीन वर्ष कत भारत में प्रैक्टीस की। आपने चार्टर्ड एकाउंटेंट बनते ही अपने उच्च अध्ययन व व्यवसायिक बुद्धिमत्ता से इस क्षेत्र में महारथ हासिल करते हुए काफी नाम अर्जित किया। वर्ष १९६५ में आपने अपने सारे अनुभवों को समेटकर इंग्लैंड की तरफ रूख कर लिया और लंदन में आपने अपनी प्रतिभा का जादू बिखेरते हुए इस क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज करते हुए विदेशी भूमि पर भारत का नाम रोशन कर दिया। श्री के. सी. जैन इतने परिपक्व हैं कि आपकी सोच कभी गलत नहीं होती। चार्टर्ड एकाउंटेंट की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। यह आम आदमी भी बखुबी जानता है। बड़े से बड़ा उद्योगपति व्यवसायी या छोटा-बड़ा कारोबार करने वाला व्यक्ति अथवा आयकर अदा करने वाला व्यक्ति हरेक को चार्टर्ड एकाउंटेंट की आवश्यकता पड़ती है। एक चतुर चार्टर्ड एकाउंटेंट व्यवसायियों का बहुत बड़ा मददगार सिपाहसालार होता है। और इस कार्य को श्री के. सी. जैन बेहद मुश्तैदी से करते हुए आज उस मुकाम तक पहुंच गये हैं जहां पहुंच पाना वर्तमान पीढ़ी के नवजवानों के लिए एक चुनौती हो सकती है। श्री के. सी. जैन प्रतिभावान अध्ययनरत विद्यार्थियों के प्रेरणा स्रोत्र बन सकते हैं। क्योंकि उनके पास अनुभवों का गहन खजाना है। हम नजर डालते हैं आपकी क्वालिफिकेशन और उपलब्धियों पर
(१). इंस्टिट्यूट ऑफ सी. ए. इंग्लैंड वैल्स
(२). फैलो ऑफ दी इंस्टिट्यूट एडमिनीस्ट्रेटीव्ह एकाउंटेंट
(३). फैलो ऑफ दी इंस्टीट्यूट ऑफ कमर्शियल मैनेजमेंट
(४). फैलो ऑफ दी ब्रिटीश इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के रजिस्टर्ड आडीटर के रूप में कार्यरत है।
संभवतः विदेशी धरती पर इतनी खूबियों वाले पहले भारतीय हैं श्री के. सी. जैन। जो मूलतः मारवाड़ी (राजस्थानी) होने के बावजूद अंग्रेजी, हिन्दी, गुजराती, बंगाली, पंजाबी, मराठी, उर्दू, मारवाड़ी के अलावा भी कई भाषाओं को सहजता से बोल व लिख देते हैं। बहुआयामी प्रतिभा के धनी श्री के. सी. जैन खेलों के प्रति भी विशेष रूचि रखते हैं। आप अपने व्यस्ततम शेड्यूल से समय निकालकर, स्वीमिग, बैडमिटन, टेनिस का अपना शौक पूरा करते हैं। आप महापुरुषों की जीवनियां, देश-विदेश के नामचीन लेखकों की चर्चित किताबें पढ़ने के साथ संगीत में भी रुचि रखते हैं। लेकिन श्री के. सी. जैन कहते हैं, जीवन की दौड़ में शामिल रहने के लिए इंसान को पहले अपनी जमीन मजबूत करनी चाहिए और इसके लिए व्यस्त रहते हुए अपने व्यावसायिक कार्य को पहली प्राथमिकता देते हुए समय निकालकर अपने शौख पूरे करने चाहिए। अपनी मंजिल के बीच में अन्य शौक हावी नहीं होने चाहिए और यही मंत्र अपनाकर श्री के. सी. जैन आज विदेशी भूमि में भी अपनी लोकप्रियता का झंडा गाडे हुए हैं। फलस्वरूप आप देश-विदेश की बड़ी-बड़ी कंपनियों, संस्थाओं व उद्योगपति घरानों के ओडिटर्स हैं। जिनमें प्रमुख हैं जैन एसोसिएशन ऑफ यु. के., फ्लीट कम्युनीटी सेंटर लंदन, महावीर मिशन बरह्मिगम, नानक सर गुरुद्वारा टैम्पल कंवनटरी, सरदार पटेल मेमोरियल सोसायटी यु. के., नेशनल कांफ्रेंस आफ गुजरात आर्गनाईजेशन, महात्मा गांधी फाउण्डेशन यु. के. महाराष्ट्र मंडल लंदन, श्री के. सी. जैन कार्य के प्रति बड़े सजग और निष्ठावान हैं। फिर भले वह व्यवसाय का कार्य हो, या व्यक्ति अथवा समाज का। आप धार्मिक विचारों से समन्वित व्यक्ति हैं। समय-समय पर विदेशी धरती पर रहने के बावजूद अपने वतन के विविध क्षेत्रों में अपना सहयोग देते रहते हैं। आपने गोडवाड के प्रमुख शिक्षा केन्द्र पार्श्वनाथ जैन विद्यालय में अतथिगृह व सभा कक्ष हॉल ही में बनवाने के साथ ढेर सारा आर्थिक सहयोग भी दिया है। आफ सहयोग से नारी शिक्षा का प्रमुख केंद्र मरुधर बालिका विद्यापीठ विद्यावाड़ी तथा आपका प्रत्येक गांव खिवांदी वासी भी लाभान्वित होता रहा है। आफ चरण जहां-जहां पर पड़े हैं, वहां-वहां विकास की गंगा प्रवाहित हो जाती है। आप लंदन में रहते हुए भी नियमित भारत आते रहते हैं। यहां आपने अपना एक बहुत बड़ा मित्र वर्ग बनाया है। जो श्री के.सी. जैन का भारत के प्रति प्रेम दर्शाता है। आप समाज के धार्मिक, शैक्षणिक सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों से करीब से जुड़े हुए हैं आपकी नैतिकता, कार्यक्षमता, कर्मठता व वाकपटुता हमेशा आपको किसी भी संस्था का अग्रणी बना देती है। आप एक अनुशासनप्रिय तोलमोल कर बोलने वाले संजीदा इंसान हैं। संस्थाएं आपका अनुभव लेने हेतु स्वयं इनके द्वार पर दस्तक देती हैं।