नया साल, नई उम्मीद व्यापार बढ़े और व्यापारी खुश हों, लेकिन क्या...

नया साल, नई उम्मीद व्यापार बढ़े और व्यापारी खुश हों, लेकिन क्या ऐसा संभव होगा!

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हमारी उम्मीदों का सन २०१९ चला गया, लेकिन उम्मीदे पूरी नही हुई। व्यापार और व्यापारी की लगातार टूटती कमर और बरबाद होती जिंदगी पर सरकार ने कितना ध्यान दिया इसका कोई आंकड़ा किसी के पास नहीं।  व्यापारी रोता रहा, उद्योग बंद होते रहे, धंधा मंदा हो गया और बाजार की रौनक उड़ गई। ऐसे में सन २०१९ हम सारे व्यापारिक समाज के बीच में कैसे याद किया जायेगा। इस पर चिंतन करने की बात लोग करते है, लेकिन वास्तव में चिंतन होना चाहिए। उस समय पर जो आने वाला है। उम्मीद थी कि व्यापार विकसित होगा। बाजार में रौनक बढ़ेगी, व्यापारी खुश होंगे और देश में एक बार फिर नए सिरे से खुशहाली का माहौल बनेगा, लेकिन माहौल बना धार्मिक कट्टरता का, समाज में बटवारें का, लोगों के सडक़ों पर उतरने का और परस्पर द्वेष फैलने का। यह सब उन्होंने किया, जिनके कंधों पर देश को विकसित करने की जिम्मेदारी थी। जिनसे व्यापार के विकास की उम्मीद थी जो पूरे सालभर तीन तलाक को खतम करने, अनुछेद ३७० हटाने और राष्ट्रीय नागरिकता कानून को लागू करके राम मंदिर फिर से बनाने के धार्मिक माहौल को पैदा करने में जूटे रहे। लेकिन पूराने जमाने में कबीर ने कहा था कि ‘बिती ताहि बिसारी दे, आगे की सूधि लेय और नये जमाने में हरिवंश राय बच्चन भी कह गये है कि ‘जो बित गई सो बात गई।Ó उनकी राय मानते हुए हम भी २०१९ को भुलाकर आगे की सोचते हैं। और बात करते है २०२० की। इस साल में हम सबका व्यापार फले-फूले। बाजारों की रौनक में वृद्धि हो और ग्राहकों की खर्च करने की शक्ति बढ़े जिससे मंदी का माहौल खत्म हो। लेकिन यह सब हमारे हाथ में नहीं है। सरकार कुछ करें तभी कुछ होगा। हम तो सिर्फ उम्मीद पाल सकते है। इसलिए आप भी उम्मीद पालिये, देखते है आगे क्या होता है?