डायमंड नगरी सूरत में संक्रांति ओर सार्ध जन्म शताब्दि

डायमंड नगरी सूरत में संक्रांति ओर सार्ध जन्म शताब्दि

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सुरत। उमरा जैन संघ में गच्छाधिपति आचार्य देव श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी महाराज आदि साधु साध्वीवृन्द के पदार्पण पर बहुत ही भव्यतम प्रवेशोत्सव हुआ। जगह-जगह पर गेट, तोरण द्वार ओर गुरु वल्लभ व गच्छाधिपति जी के बैनर शोभायमान थे। स्थान स्थान पर रंगोली सजी हुई थी। भक्तगण झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। प्रवेश की शोभायात्रा में गुरु वल्लभ की मूर्ति को सुंदर बग्गी में विराजमान किया गया था। बहुत बड़ी संख्या में जन समूह के साथ बढ़ते हुए उमरा जैन संघ में गुरुदेव पधारे तो वहां विराजमान मुनि भगवन्त सभी अगवानी के लिए आए। जिनमंदिर दर्शन वन्दन के बाद उपाश्रय में पधारे।

यह सूरत के इतिहास में एक ऐसा विशिष्ट दिन था जब गुरु वल्लभ का गुणानुवाद करने के लिए विभिन्न सम्प्रदायों ओर समुदायों के अनेक गुरु भगवन्त उमरा श्री संघ में पधारे हुए थे। गच्छाधिपति जी प्रवचन पाट पर विराजित हुए। मध्य में मुख्य पीठ पर गुरु वल्लभ की प्रतिमा को विराजमान किया गया बाद सकल संघ ने उन्हें वन्दन किया। मंगलाचरण के बाद लुधियाना जैन संक्रांति मण्डल के संस्थापक प्रधान प्रवीण जैन और ठाणा निवासी भरत मेहता ने प्रात: कालीन संक्रांति भजन गाए प्रस्तुत किए।

आचार्य श्री भुवन भानु सूरि समुदाय के आचार्य श्री रश्मीराज सूरिजी महाराज, पन्यास श्री चन्द्रशेखर विजयजी के शिष्य आचार्य श्री मलयकीर्ति सूरिजी, आचार्य श्री गुणरत्न सूरिजी के शिष्य मुनि श्री भव्य रत्न विजयजी म.सा., आचार्य श्री लब्धि सूरि समुदाय के आचार्य श्री अजितयश सूरि जी म.सा, आचार्य श्री नेमिसुरी समुदाय के आचार्य श्री श्रमणचन्द्र सूरिजी म.सा, मुनि श्री संयमचन्द्र विजयजी म.सा, स्थानकवासी श्रमण संघीय सलाहकार उपप्रवर्तक श्री तारकऋषिजी व श्री सुयोग ऋषिजी के साथ पधारे श्री शिवम ऋ षिजी ने गुरु वल्लभ के महान जीवन, कार्यों और गुणों बारे में आत्म स्पर्शी प्रवचन देकर जन समूह को अहोभाव से भर दिया। मंच का सफल संचालन मुनि श्री मोक्षानंद विजयजी ने बखूबी किया। गच्छाधिपतिजी ने भी अपनी छटादार शैली में गुरु वल्लभ के महान जीवन का वर्णन करते हुए अनंत उपकारों का स्मरण किया। शांतिलाल भानपुरा वालों ने, महेंद्र कोचर बीकानेर, लखपत कोचर बीकानेर हाल सूरत, छ: वर्षीय मास्टर ऋषभ, ओर मुनि मोक्षानंद विजयजी ने गुरु भक्ति में झुमाते हुए सुंदर भजन प्रस्तुत किये।

पांच घण्टे तक चले भाववाही कार्यक्रम में करीब 2500लोगों की उपस्थिति थी। गच्छाधिपति जी के सप्तदिवसीय सूरत प्रवास, प्रवचन आयोजन, संक्रांति समारोह, गुरु वल्लभ सार्ध जन्म शताब्दिी स्मरणांजलि महोत्सव आदि को सफल बनाने में श्री आत्म वल्लभ जैन फाउंडेशन के सदस्यों की मेहनत काबिले तारीफ रही।

सूरत में बनेगा ‘विजय वल्लभ जैन भवनÓ – गच्छाधिपति जी ने संक्रांति समारोह में बताया कि सूरत में 150वें जन्म वर्ष की स्थायी स्मृति के रुप मे ‘विजय वल्लभ जैन भवनÓ का निर्माण करवाया जाएगा। इस भवन के लिए भूमि दानदाताओं के नामों की घोषणा भी गच्छाधिपति जी ने अपने श्रीमुख से की। जिसे सुनकर उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से हर्ष व्यक्त किया। दिल्ली से पधारे अशोक जैन, दीपक जैन, नीरज जैन ने बड़ोदा में होने वाले गुरु वल्लभ के 150वें जन्म वर्ष के विराट आयोजन की आमन्त्रण पत्रिका गुरु महाराज को समर्पित की साथ ही सकल भारत वर्ष के गुरु भक्तों को बड़ोदा पधारने का आमन्त्रण भी दिया।