नाकोड़ा धाम बना मुनिवृंदों का संगम स्थल, हो रही है अमृत वर्षा

नाकोड़ा धाम बना मुनिवृंदों का संगम स्थल, हो रही है अमृत वर्षा

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मुंबई। विभिन्न क्षेत्रों में अपने-अपने चातुर्मास संपन्न कर इन दिनों अधिकांश मुनिवंृद एवं साध्वियां नाकोड़ा धाम पहुंच रहे हैं। जैन समाज के अलग-अलग मान्यता वाले साधु संतों का आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वर धाम में लोगों ने गाजे-बाजे के साथ अगवानी की। साधु-संतों एवं साध्वियों का एक स्थान पर एकत्रीकरण किसी त्रिवेणी संगम का सा लगा।

वर्षावास पश्चात सभी गुरु भगवंतों का विहार चल रहा है तथा इन दिनों यहां राष्ट्रसंत आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वरजी महाराज, साध्वी विश्व वंदना, डॉक्टर परमेष्ठी वंदना, साध्वी कल्पिता श्रीजी, चारुता श्रीजी, मुनि हरिश्चंद्र सागर, साध्वी आशिताश्रीजी एवं हृषिताश्रीजी का भी यहां नाकोड़ा धाम में प्रवास चल रहा है। इन साधु साध्वियों के अलावा अनुव्रत जीवन विज्ञान अकादमी के राष्ट्रीय संयोजक प्यारचंद मेहता भी आए हुए है जो संतो की धर्म चर्चा में शामिल होते हैं। पूणे महानगर में अपना वर्षावास संपन्न कर विश्वसंत की उपाधि प्राप्त कर चुके आचार्य शिवमुनि युवाचार्य महेंद्र ऋषि महाराज, प्रमुख मंत्री शिरीष मुनि, सह मंत्री शुभम मुनि, सहित अठ्ठारह मुनियों के काफिले सहित युवाचार्य के पैतृक गांव चाकण पहुंचे। जहां उन्होंने महेंद्र भवन में नवनिर्मित लाखों की लागत से बनी भोजनशाला का लोकार्पण आचार्य का यह काफिला तलेगांव, तालेगांव दाभाड़े, लोनावला, पनवेल, वासी, दिसम्बर से दो दिवसीय मेवाड़ भवन गोरेगांव मुंबई में प्रवास करेंगे जहां आत्मा ध्यान की साधना का शिविर लगेगा।

रखें सद्व्यवहार – नाकोड़ा धाम में उपस्थित श्रद्धालुओं को सीख देते हुए आचार्य चंद्रानन सागर सूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि जीवन ऐसा जिए कि आप जहां रहे सब आपको प्यार करें, जहां से आप जाए पीछे सब आपको याद करें और आप जहां जा रहे हैं वहां पर सब आपका इंतजार करें। उन्होंने कहा कि तलवार की कीमत होती है धार से और अच्छे इंसान की कीमत होती है सद्व्यवहार से। याद रखे सुंदर व्यवहार हमें जीवन भर याद रहता है। हम हाथ उठाकर दस लोगों को भी जीत नहीं सकते पर हाथ जोडकर लाखों लोगों का दिल जीत सकते हैं। उन्होंने व्यंग करते हुए कहा कि पुरुष लोग शादी से पहले जैसा व्यवहार करते हैं अगर वैसा ही व्यवहार शादी के बाद भी करें तो तलाक की कभी नौबत नहीं आएगी।

जुबान से होती है आदमी की पहचान – विश्ववंदना ने कहा कि मधुर बोलेंगे तो लोगों के दिलों में उतरेंगे और कड़वा बोलेंगे तो लोगो के दिलों से उतर जाएंगे। शब्दों में बड़ी जान होती है इन्ही से आरती अरदास और अजान होती है। यह समंदर के मोती हैं जिनसे अच्छे आदमी की पहचान होती है, संसार में जितने भी झगड़े हुए हैं उनमें आधे से ज्यादा झगडे को वचन के कारण हुए हैं जो लोग मधुर जुबान का उपयोग करते हैं वह दुश्मन को भी दोस्त बनाने में सफल हो जाते हैं। साध्वी डा. परमेष्ठी वंदना ने कहा कि हमारी भाषा में तीन गुण होने चाहिए शिष्ट, मिस्ट और ईस्ट अर्थात शिष्टाचार युक्त मीठी और प्रिय अगर हम भाषा में यह तीन गुण ले आए तो हम लोगों के दिलों में सदा राज करेंगे। राम की वाणी में यह गुण थे इसलिए उन्होंने दुश्मन के भाई को अपना मित्र बना लिया और रावण ने कडवा बोल कर अपने सगे भाई को भी खो दिया। हम केवल मीठा खाएंगे तो बीमार पडेंगे, पर मीठा बोलना शुरु करेंगे तो सदाबहार स्वस्थ और कुशल जीवन में सफल हो जाएंगे।