जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के 150वें जन्म महामहोत्सव पर त्रिदिवसीय कार्यक्रम...

जैनाचार्य विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के 150वें जन्म महामहोत्सव पर त्रिदिवसीय कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न

SHARE

मुंबई। भायखला-में-गुरु वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के 150 जन्मोत्सव पर भव्य वरघोड़ा शेठ मोतीशा रिलीजियस एंड चेरिटेबल ट्रस्ट-भायखला के तत्त्वावधान में जन जन की आस्था के केंद्र विश्वक्रांति के विचारक युगपुरुष, पंजाब केशरी जैनाचार्य श्रीमद विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के 150वें जन्म सार्ध शताब्दी वर्ष समारोह समिति द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन के प्रथम दिन भव्य रथयात्रा पंजाब केसरी श्री विजय वल्लभ सूरि समुदाय के पूज्य गच्छाधिपति  श्रुतभास्कर आचार्य श्रीमद विजय धर्मधुरंधर सूरीश्वरजी महाराज आदि समस्त साधु साध्वी वृन्द की शुभ निश्रा में एवं अनेक समुदाय के आचार्य भगवन्तों मुनि भगवन्तों की पावन उपस्थिती में भव्य रथयात्रा का शुभारंभ हुआ।

शोभायात्रा में इन्द्रध्वजा युगप्रभावक जैनाचार्य भगवन्तों के तैल प्रतिकृतियां सह उनके कार्यपट्टो से 15 झांकियाँ सजाई गई। 14 स्वप्न एवं 45 आगम को सिर पर धारण कर, लेकर चल रही सन्नारियों का हुजूम और असंख्य जैन ध्वज व 150वें वर्ष शताब्दी ध्वज लेकर चल रहे नर-नारियां, विभिन्न वेशभूषा में उपस्थित जन समुदाय से रथ यात्रा शोभायमान प्रतीत हो रही थी। गुरु वल्लभ की पालखी उठाते युवकों सह विशाल साधु साध्वी समुदाय। 40 से अधिक महिला मंडल, गरबा नृतक, भांगड़ा नृतक, बैंड, शहनाई आदि अनेक़ो अनेक जन समुदाय के समक्ष परमात्मा रथ में बिराजें हुए थे। आडम्बर रहित भव्य वरघोड़ा हज़ारों के जन समूह का साक्षी था और लोगों के दिलों में राज करने वाले गुरु वल्लभ के नारों, गीतों से गुंजायमान था। पूरे रास्ते में सेंकोड़ो लोगों ने रास्ते के दोनो और उपस्थित रहकर परमात्मा के समक्ष गहूलिकर, रंगोली से वरघोड़े का स्वागत किया।

शोभायात्रा विभिन्न मार्गो से होते हुए श्री मोतीशा जिनालय के प्रांगण के वल्लभ नगरी में धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हुई। पूज्य गच्छाधिपति गुरु देव ने मंगल उदबोधन दिया। तत्पश्चात समिति द्वारा- वल्लभ नगरी के लाभार्थी श्रीमती फेन्सीबेन पुखराजजी कपूरचंदजी कारसिया (बेड़ा), शेठ मोतीशा भोजन खंड के लाभार्थी श्रीमती घीसीबाई जयचंदजी फुटरमलजी बाफना (सादड़ी), शीतल जल के लाभार्थी मातुश्री तुलसीबेन मांगीलालजी विमलचंदजी मेहता परिवार (खिमेल), प्रात: काल नवकारसी के लाभार्थी श्रीमती कमलादेवी कपुरचंदजी वनाजी कासम गौत्र चौहान परिवार (खिवान्दी), स्वामीवात्सल्य के लाभार्थी, मिलापचन्द जुहारमलजी रांका (सादड़ी), भव्य आंगी-रोशनी के लाभार्थी श्री सम्यक उपासना जैन संघ – (चिंचपोकली), अनुकंपा किट के लाभार्थी श्रीमती शांताबेन गजराजजी राणावत (मुंडारा) वालो का सत्कार सम्मान किया।

भायखला में गुरु वल्लभ की गौरव गाथा स्वरूप प्रथम बार हुए ऐसे भव्य दिव्य आनदोत्सव का आयोजन हर नर नारी को चमत्कृत कर कर रहा था एवं उपस्थित जन समूह भाव विभोर था। पूज्य श्रुतभास्कर गच्छाधिपति आचार्य भगवन्त की विशेष विनंती से मुबई में बिराजमान समस्त समुदायों के गुरु भगवन्तों का भायखला में त्रिदिवसीय आयोजन में मंगल आगमन हुआ। श्री मुंबई जैन संघ संघठन द्वारा युवा मुनि चिंतन संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमे  8 से 9 समुदायों के युवामुनि भगवन्तों की पावन उपस्थिती हुई। शासन संघ समाज और आत्मा संबंधित परस्पर सुंदर विचारों का आदान प्रदान किया, परस्पर मैत्रीभाव स्नेहभाव की वृद्धि हुई। दोपहर को गुरु वल्लभ समाधि मंदिर में गुरु वल्लभ अष्ट प्रकारी पूजन हुआ। रात्रि में  समाधि मंदिर के प्रांगण में गुरु भक्ति का सफल आयोजन हुआ। जब तक सूरज चाँद रहेगा। गुरु वल्लभ का नाम रहेगा। गुरु वल्लभ का काम रहेगा।

कार्यक्रम के दुसरे दिन मुंबई में चातुर्मास में बिराजीत अनेक गच्छ से आचार्य-पन्यास-मुनि भगवंत, साध्वीजी तकरीबन 50 से 60 संतो का समागम हुआ, जिसमें आचार्य श्री प्रभाकर सूरीश्वरजी महाराज, आचार्य श्री हेमचंद्र सूरीश्वरजी महाराज, पन्यास डा. अरूण विजयजी महाराज, मुनिराज श्री पियूषचंद्र विजयी महाराज, मुनिराज श्री चंद्रयश विजयी महाराज, मुनिराज श्री विनम्र सागरजी महाराज इत्यादी। सभी संतो ने गुरूदेव श्री वल्लभ सूरीश्वरजी को स्मरण करते हुऐ उनके जीवन पर प्रकाश डालकर समाज को प्रेरणा प्रदान करवाकर धर्म रूपी ज्योत को प्रज्वलीत करने का कार्य किया।

तृतिय दिन आचार्य श्री गुरू वल्लभ सूरीश्वरजी द्वारा स्थापित भारत भर की तमाम संस्थाओंके प्रतिनिधीयों को आमंत्रित किया था। अल्पसमय पुर्व तय कार्यक्रम के कारण सभी संस्थाये कार्यक्रम में संम्मिलीत न हो सकी, मगर सबका शुभ संदेश प्राप्त हुआ। गुरूदेव द्वारा स्थापित संस्थाओं के कारण गच्छ नायक आचार्य श्री धर्मधूरंधर सूरीश्वरजी के प्रति आस्था प्रकट कर आर्शिवाद की कामना का निवेदन किया। पंजाब से अनेको भक्तो ने संगीत द्वारा भक्ति करके अपने भाव प्रकट किये। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी मुंबई के अध्यक्ष मंगलप्रभात लोढ़ा, भायखला जैन संघ के अध्यक्ष किरणराज लोढ़ा, श्री पाश्र्वनाथ विद्यालय वरकाणा के अध्यक्ष खुबीलाल राठौड़, श्री पाश्र्वनाथ उम्मेद जैन शिक्षण संघ फालना के अध्यक्ष इंदरचंद राणावत, उमेदपुर छात्रावास के सुरजमल बालदीया ने अपने विचार प्रकट किये, समिती द्वारा उनका सम्मान किया गया। कार्यक्रम में लाभार्थी परिवारों का सत्कार किया गया।

सुकन परमार ने भारत पाकिस्तान के 1947 के बटवारे में गुरूदेव ने हिन्दू व जैन समाज के अनेको परिवारों के प्रति अपनी निष्ठा को चित्रण किया। बाली जैन संघ के अध्यक्ष बाबुलाल मंडलेचा, गोडवाड ओसवाल जैन संघ के मैनेजीग ट्रस्टी कनक परमार, राजस्थान मीटर गेज प्रवासी संघ के अध्यक्ष विमल रांका, श्री सुमेर टावर जैन संघ के अध्यक्ष अरूण शाह, चंदुभाई तेलिसरा, केशरीमल जैन, राजेंद्र मंडलेचा, जुगराज पुनमिया आदि ने अज्ञानता के अंधकार को मिटाने में गुरूदेव के अथक प्रयासों को याद किया। इस अवसर पर श्री ललित सूरीश्वजी एवं श्री वल्लभदत्त सूरीश्वरजी को भी मन पूर्वक याद करके समाज को संगठीत करने में उनके उपकारों को नमन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में पंजाब केशरी गुरूदेव आचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरीश्वजी महाराज ‘जन्म सार्ध शताब्दी (150 वा) वर्षÓ समारोह समिती के धनसुख, कांतीलाल, प्रविण मेहता, संदिप कोठारी, विकास पारेख, नविन जैन, सजन रांका, सुकन परमार, महेंद्र मुठलीया, विमल रांका, जगदीश मेहता सहित सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। मोहनलाल यू. जैन, बाबूलाल जैन नें गुरूदेव के प्रति गीत व नृत्य द्वारा सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन सुकन परमार ने किया।