गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री नित्यानंद सूरीश्वरजी की शुभ निश्रा में

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guru vallabh janm shatabdi
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मुंबई। पंजाब केसरी परम पूज्य जैनाचार्य श्रीमद् विजय वल्लभ सूरीश्वरजी महाराज के सार्ध जन्म शताब्दि वर्ष प्रारम्भ सम्बन्धी विराट आयोजन वर्तमान वल्लभ, समुदायनायक गच्छाधिपति शांतिदूत परम पूज्य आचार्य भगवन्त श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी, पन्यास प्रवर श्री धर्मशील विजयजी आदि ठाणा की निश्रा में बहुत ही जानदार ओर शानदार तरीके से मनाया गया।

इस अवसर पर दादर, ज्ञान मन्दिर से शासन सम्राट समुदाय के जैन वैज्ञानिक आचार्य श्रीमद् विजय नन्दीघोष सूरिजी आदि ठाणा, आराधना भवन से आचार्य श्री भुवन भानु सूरि समुदाय के पन्यासप्रवर श्री चन्द्रशेखर विजयजी के शिष्य रत्न विद्वान आचार्य श्रीमद् विजय जितरक्षित सूरि जी म.आदि ठाणा, भायखला से पंजाब केसरी गुरु वल्लभ समुदाय के प्रवचनकार मुनि श्री ऋषभचंद्र विजयजी आदि ठाणा आगरतड़ जैन संघ से सागर समुदाय के ओजस्वी वक्ता मुनि श्री वज्ररत्न सागरजी आदि ठाणा ने गुरु वल्लभ के आदर्श जीवन पर प्रसंगानुरुप हृदय स्पर्शी प्रवचन देकर जनसमूह को कृतार्थ किया।

पंजाब केसरी समुदाय की साध्वी पूर्णप्रज्ञा श्रीजी ने भी अपने भाव प्रस्तुत किये। इस अवसर पर श्री केसर सूरि समुदाय, श्री हिमाचल सूरि समुदाय, श्री नेमि सूरि समुदाय, अचलगच्छ आदि परम्परा के साध्वी जी भगवन्त भी उपस्थित थे। कई भक्तों ने भक्ति गीत गाकर गुरु वल्लभ के उपकारों का स्मरण किया। गुरु वल्लभ के जीवन काल से जुड़े विशिष्ट परिवारों के वर्तमान सभ्यों का आगमन व बहुमान कार्यक्रम में पंजाब केसरी गुरु वल्लभ के सांसारिक परिवार से उनकी सांसारिक सगी जमुना बहन की चौथी पीढ़ी से राजू भाई लियो, बड़ोदरा से पधारे हुए थे।

गुरु वल्लभ को राधनपुर में दीक्षा दिलाने वाले सेठ श्री मोतीचंद मूल जी की पौत्री तथा लाहौर में आचार्य पदवी पर साधर्मिक वात्सल्य के लाभार्थी व भायखला में गुरु वल्लभ की देह के अग्निसंस्कार का चढ़ावा लेने वाले श्री साकर चन्द मोतीचंद भाई की सुपुत्री श्रीमती सुशीला बेन भरत भाई दलाल भी पधारी हुई थी। गुरु वल्लभ के द्वारा 65 वर्ष पहले 84 वर्ष की उम्र में साधर्मिक उत्थान हेतु पांच लाख रुपये के फंड एकत्रीकरण के अभिग्रह की पूर्ति हेतु 14 वर्षीय बालिका रमिला ने बहुत मेहनत की थी। रमिला बहन का तो स्वर्गवास हो चुका किंतु उनके पति 90 वर्षीय श्री प्रताप भाई के. शाह भी पधारे हुए थे जो कि श्री आत्मानन्द जैन सभा मुम्बई में वर्षों से जुड़े हुए हैं और साधर्मिक उत्कर्ष आदि कार्यों में संलग्न हैं। गुरुदेव के अभिग्रह पूर्ति में सबसे पहले अपने हाथों से सोने के कंगन उतार कर समर्पित करने वाली श्रीमति भगवती बहन के भतीजे श्री विनीत भाई पारिख भी पधारे हुए थे। पांच लाख की फंड पूर्ति में जब 22000 रुपये की रकम बाकी रही तब वालकेश्वर निवासी सेठ दौलत चन्द जी ने वह रकम पूरी की । उन्हीं के वंशज तथा बाबू अमीचन्द पन्ना लाल आदिश्वर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट, वालकेश्वर के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री भरत भाई झवेरी भी पधारे हुए थे।

मरीन ड्राइव स्थित जिनके निवास स्थान पर गुरु वल्लभ ने अंतिम स्थिरता की ओर अंतिम सांस लिया ऐसे सेठ कांतिलाल ईश्वरलाल के पौत्र डॉक्टर श्री श्रेणिक और 95 वर्षीय उनकी माताजी श्रीमती विमला बेन वसन्त भाई ( सेठ कांतिलाल ईश्वरलाल की पुत्रवधु) भी पधारे हुए थे। वह अपने साथ गुरु वल्लभ के अंतिम समय के पात्रे, तरपनी, चेतना आदि संयम उपकरण भी संघ के दर्शनार्थ लेकर पधारे थे। जो कि उन्होंने अपने निवास स्थान पर बनें हुए गृह मन्दिर में बहुत ही सम्भाल पूर्वक रखे हुए हैं। गुरु वल्लभ की गौड़ी जी मन्दिर पायधुनि से जब अंतिम यात्रा प्रारंभ हुई तब तीन घण्टे की मेहनत करके श्री पन्नालालभाई वोरा ने मुख्यमंत्री, मेयर ओर पुलिस डिपार्टमेंट से तत्कालिक परमिशन लेकर बाबुलनाथ से अंतिम यात्रा को भायखला की ओर मोड़ दिया। उन्हीं के कारण श्मशान की जगह मुम्बई शहर के बीचो बीच शत्रुंजय तीर्थ समान सेठ मोती शाह द्वारा निर्मित भायखला मन्दिर के पवित्र प्रांगण में गुरु वल्लभ का अंतिम संस्कार सम्भव हो पाया। उन्हीं के सुपुत्र हरीशभाई, दीपकभाई, अमुल भाई, पुत्री दिया बहन आदि पधारे हुए थे। इन सभी परिवारों का भव्यतम बहुमान चातुर्मास आयोजक मातुश्री श्रीमति शांताबेन पुखराजजी रतनपरिया चौहान परिवार द्वारा किया गया। ऐसे परम गुरुभक्त परिवारों के पूर्वजों की संघ, समाज और शासन की सेवाओं के बारे में सुनकर जनसमूह रोमांचित, हर्षित ओर गद्गदित बना हुआ था।

आगामी चातुर्मास पालीताना उद्घोषणा

गच्छाधिपति जी को आगामी चातुर्मास के देश भर से अनेक विनतियाँ होते हुए भी इस बार उन्होंने गुरु वल्लभ के 150वें जन्म वर्ष निमित्त तीर्थाधिराज श्री शत्रुंजय गिरिराज की छत्रछाया में चातुर्मास करने की घोषणा की। इस चातुर्मास में समुदाय वडिल आचार्य श्रीमद् विजय वसन्तसूरिजी, ज्ञान प्रभाकर आचार्य श्रीमद् विजय जयानंदसूरिजी आदि अनेक गुरु भगवंतों तथा प्रवर्तिनी साध्वी हेमलता श्रीजी पालीताना में विराजित गच्छाधिपतिजी की आज्ञानुवर्तिनी सर्व साध्वी वृन्द, साध्वी रत्नशीला श्रीजीम. आदि ठाणा, साध्वी पूर्णप्रज्ञा श्रीजी म. आदि ठाणा के पालीताना में चातुर्मास प्रसंग पर सान्निध्य प्राप्त होने की घोषणा होने से जनसमूह में हर्ष का संचार हुआ।

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पैदल संघ, उपधान तप, नव्वाणु यात्रा आदि की घोषणाएं – चातुर्मास पूर्व अयोध्यापुरम से पालीताना के छ: री पालित यात्रा संघ की घोषणा की। चातुर्मास पश्चात अयोध्यापुरम से पालीताना छ: री पालित यात्रा संघ की भी घोषणा की गयीं। पालीताना से गिरनार महातीर्थ के छ: री पालित यात्रा संघ की भी घोषणा की गयी। पालीताना से पंचतीर्थी के छ:री पालित यात्रा संघ की भी घोषणा की गई। चातुर्मास के दौरान उपधान तप व चातुर्मास पश्चात नव्वाणु यात्रा करवाने की घोषणा की गयी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि – इस अवसर पर मुख्य अतिथि विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा मुम्बई भाजपा अध्यक्ष, कनकराज लोढ़ा घाणेराव, प्रदीप राठौड़ सादड़ी, पोपटलाल सुंदेशा सादड़ी, अशोक जैन दिल्ली, भंवर जैन चंडीगढ़, खुबिलाल राठौड़, दिनेश एम. जैन सादड़ी, गिरीश राठौड़ सादड़ी, माणक मेहता खोड आदि अनेक गणमान्य अतिथि तथा गुरुभक्त मौजूद थे।

संघ माता अलंकरण प्रदान – इस कार्यक्रम में श्री राज मरुधर जैन संघ दादर के द्वारा मातुश्री श्रीमती शांताबेन पुखराजजी रतनपरिया चौहान का विगत 13 वर्षों से श्रीसंघ की अपूर्व सेवाओं के अनुमोदनार्थ सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया।

गच्छाधिपति जी ने कहा कि दादर में बिना मन्दिर ओर उपाश्रय के ही यह संघ पिछले 13 वर्षों से चातुर्मास ओर आराधना करवा रहा है। लेकिन इस बार हमारे चातुर्मास में संघ ने नूतन श्री आत्म वल्लभ आराधना भवन ओर विविध लक्षी हाल खरीद लिया है। जिसमें आत्म वल्लभ आराधना भवन का उद्घाटन 8 नवम्बर को सम्पन्न करवाया गया। लेकिन 7 नवम्बर को मन्दिरजी का भूमिशुद्धि विधान रतनपरिया चौहान परिवार के करकमलों से सम्पन्न हो गया है। इस संघ का अस्तित्व इस रतनपरिया चौहान परिवार के तन, मन, धन के सहयोग पर टिका हुआ है। अत: आज मातुश्री के जीवन मे अनेक सुकृत्यों को देखते हुए उन्हें चतुर्विध संघ की सुविशाल उपस्थिति में ‘संघ माताÓ के विरुद से अलंकृत करता हूँ। उसके बाद श्रीसंघ व सभी सहयोगी संस्थाओं श्री वर्धमान आयम्बिल खाता, श्री सिद्धचक्र सोशल ग्रुप, श्री मरुधर जैन महिला मंडल, गुरु वल्लभ भक्त मण्डल ने मिलकर माताजी का हार्दिक भव्य बहुमान किया। सकल संघ ने जय जयकार करके हर्ष व्यक्त किया। स्नेही स्वजनों ने भी अभिनंदन किया।

परिवार के सबसे बड़े बंधु श्री केवल भाई ने कहा कि मेरे जीवन का मुख्य उद्देश्य है कि मैं गुरु वल्लभ के स्वप्नों को साकार ओर गुरु नित्यानंद जी की भावनाओं को पूर्ण करूँ । इस चातुर्मास दरम्यान कोई भूल हुई हो तो परिवार व संघ को गुरुदेव क्षमा प्रदान करें। मातुश्री श्रीमति शांताबेन ने गुरु वल्लभ के प्रति समर्पित एक भजन प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन शासन रत्न श्री अतुल भाई दाड़ी ष्ट ्र ने किया। संगीत की स्वर लहरियां बिखेरते हुए महावीरभाई शाह ने भक्ति रंग जमाया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में चतुर्विध संघ ने गुरु वल्लभ को वंदना की। फिर सकल संघ ने गच्छाधिपतिजी को वन्दन किया। गच्छाधिपति जी के मंगलाचरण के बाद रतनपरिया चौहान परिवार ने दीप प्रगट किये। श्री वल्लभ गुरु के चरणों मे …..भक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। गुरु वल्लभ की मनोहारी प्रतिमा को सुंदर सुसज्जित मंच के मध्य भाग में निर्मित बहुत ही भव्य गुरु मन्दिर में विराजमान किया हुआ था। चैत्र मास की ओली जी की आराधना दादा पाश्र्वनाथ तीर्थ, जूना बेड़ा राजस्थान में करवाने का तय हुआ। कार्यक्रम में पधारे हुए सभी मेहमानों का स्वागत आयोजक परिवार की ओर से केवल जैन, हेमंत जैन, विकास जैन, दिनेश जैन, संयोजक दिलीप सुंदेशा व महावीर लोढा ने किया। चातुर्मास संयोजक दिलीप  सुंदेशा व महावीर  लोढ़ा ने भी सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर पुणे से 170 भक्तो के अतिरिक्त मुम्बई के उपक्षेत्रों से व पंजाब, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा, चेन्नई, पांडिचेरी, बंगलोर आदि प्रान्तों व नगरों से बहुत बड़ी संख्या में गुरु भक्त पधारे। पांच घण्टे तक चले धारा प्रवाह शानदार कार्यक्रम गुरु गुणोत्सव सभा में दो हजार से भी अधिक गुरुभक्त उपस्थित रहे। सभी के नाश्ते व भोजन की व्यवस्था चातुर्मास आयोजक रतनपरिया चौहान परिवार की ओर से की गई थी। इस अवसर पर सृष्टि बहन ने गच्छाधिपति जी का स्वयं हस्तनिर्मित चित्र रतनपरिया चौहान परिवार को प्रदान किया।