टूट गई है माला मोती बिखर गए

टूट गई है माला मोती बिखर गए

SHARE

मुम्बई। महाराष्ट्र की राजनीति में राजस्थानी समाज के नेताओं की हालत अब पहले जैसी नहीं है। कुछ नेताओं की ताकत घट गई है तो कई दरकिनार हो गए हैं। कुछ फिर से महत्व पाने की फिराक में है तो कुछ एकदम ठिकाने लग गए हैं। मिलिंद देवड़ा, मंगल प्रभात लोढ़ा, राज के पुरोहित, गीता जैन, नरेंद्र मेहता और ऐसे ही कुछ और राजनेता बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में कितने ताकतवर रहेंगे और कैसे मजबूत बने रहेंगे, इसके प्रति वे स्वयं भी आश्वस्त नहीं है। क्योंकि सत्ता बदली तो सत्ता के समीकरण भी बदल गए हैं। हालात माला के टूटने के बाद उसके मोतियों के बिखर जाने जैसे हो गए हैं।

महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पिछली बीजेपी की सरकार के दौरान सबसे ताकतवर नेता के रूप में मुंबई भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मंगल प्रभात लोढ़ा को माना जाता रहा। लेकिन अब खुद फडणवीस ही राजनीतिक रूप से पहले जैसे नहीं रहे, तो लगातार छठी बार जीतने के बावजूद विधायक लोढ़ा के लिए भी राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई है। मीरा भायंदर से निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीतकर बहुत दमदार नेता के रुप में उभरी गीता जैन ने अपनी ज़बरदस्त उपस्थिति ज़रूर दर्ज की है। लेकिन उनकी राजनीति की दिशा को नए दर्शन की जरूरत होगी। पूर्व मंत्री और पिछली विधानसभा के मुख्य सचेतक राज के पुरोहित का टिकट गया तो वे सत्ता की राजनीति से चुनाव से पहले ही आउट हो गए। मीरा भायंदर के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता अपनी जातिगत रूप से मजबूत आधार वाली सीट पर ही एक महिला से बुरी तरह हारने के बाद नई सरकार में एकदम दरकिनार हो गए हैं। पिछली सरकार में उनके जो तेवर थे वे ढीले पड़ गए हैं। हालांकि कांग्रेस की राजनीति में लगातार कमजोर पड़ते गए मिलिंद देवड़ा ताजा राजनीतिक हालात में जरूर बदली हुई भूमिका में रहेंगे, क्योंकि युवा पीढ़ी को केंद्र में रखकर अपनी राजनीति का निर्धारण करने वाले देवड़ा हर किसी से सामंजस्य बिठाने में माहिर हैं।