इन निंदकों को भी ‘आशीर्वादÓ दीजिये साधु भगवंत – सिद्धराज लोढ़ा

इन निंदकों को भी ‘आशीर्वादÓ दीजिये साधु भगवंत – सिद्धराज लोढ़ा

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Sidhraj Lodha

 

मुंबई। जैन धर्म की वैचारिक मजबूती, साधु संतों की पुण्याई, एवं सामाजिक नेतृत्व के पुरुषार्थ से जैन समाज बहुत तेजी से विकास कर रहा है। पिछली आधी सदी में जैन समाज ने हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की है। लेकिन बीच बीच में कभी कभार कुछ अति उत्साही और प्रचार परस्त लोग अपनी असामाजिक महत्वाकांक्षाओं की वजह से हमारे परम कृपालु साधु भगवन्तों को भी अपने प्रचार पाने का एवं स्वयं को समाज में स्थापित करने का साधन बना लेते है। वे साधु संतों के शिक्षा, चिकित्सा, मंदिर स्थापना जैसे कार्यों का तो विरोध करते ही हैं, उनको व्यक्तिगत निंदा भी करने से नहीं चूकते। लेकिन सबसे पहले किसी अन्य पर टिप्पणी करनेवाले ये लोग अपना स्वयं का आचरण व सामाजिक स्तर नहीं देखते। मगर, वे यह नहीं सोचते कि  संतों का जीवन समाज के उत्कर्ष के लिए होता है।

चातुर्मास चल रहा है। जैन धर्म के कई दिग्गज संत, राष्ट्रसंत और गच्छाधिपति की पदवी प्राप्त साधु भगवंत मुंबई और आसपास चातुर्मास पर विराजमान हैं। इसलिए यही सही अवसर है, जब साधु संतों के बारे में अपप्रचार करके समाज में अपना महत्व बनाने की कोशिश करने वालों की भी चर्चा की जाए। भगवान महावीर की परंपरा को अक्षुण्ण रखने का व्रत लेकर सांसारिक समाज का कल्याण करनेवाले हमारे संतों को यह पता तो है कि हमारा समाज विकृति की तरफ बढ़ रहा है, और यह भी वे जानते हैं कि संतों का अपमान करना कुछ लोगों का फैशन भी बन गया है।

मेरी समस्त साधु भगवन्तों से प्रार्थना है कि इस चातुर्मास में ऐसे निंदकों को माफ करते हुए आगे से ऐसा करने से रोकने का संदेश दें, ताकि आप इस चातुर्मास समापन के पश्चात विहार पर निकलें, तो मुंबई में कुछ निंदकों का जीवन बदला हुआ सा लगे।