पंन्यास दिव्येशचंद्र सागरजी का भायंदर में भव्य चातुर्मास प्रवेश

पंन्यास दिव्येशचंद्र सागरजी का भायंदर में भव्य चातुर्मास प्रवेश

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Divyeshchandra sagarji
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भायंदर। – दीपक जैन – धर्म आराधना का पर्व हैं चातुर्मास। इस पर्व में हम जितना धर्म करे कम हैं। व्रत, भक्ति और शुभ कर्म को चार माह का चातुर्मास कहा गया हैं। धर्म साधना करनेवालों के लिए यह माह अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं क्यूंकि इन चार माह के दौरान साधु संतों का सानिध्य पूरी तरह प्राप्त होता हैं। गुरु भगवंतों द्वारा लोगों को सदमार्ग दिखाया जाता हैं। उपरोक्त विचार शासन प्रभावक, राष्ट्रसंत आचार्य अशोकसागर सूरीश्वर महाराज के शिष्य परम पूज्य पन्यास प्रवर श्री दिव्येशचंद्र सागर महाराज ने भायंदर वेस्ट स्थित श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर में श्री पाश्र्व-प्रेम श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के तत्वावधान में चातुर्मास प्रवेश के बाद विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। इस अवसर पर उन्होंने चातुर्मास के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने कहा जीवन में कभी काम से अपने को समय नहीं होगा लेकिन चातुर्मास के लिए हमे थोड़ा समय निकलना चाहिए. प्रवेश पर सामूहिक आयंबिल तप का आयोजन हुआ। गुरुदेव के साथ मुनि तत्तवेषचन्द्र सागरजी म.सा. आदि ठाणा का भी प्रवेश हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मीरा-भायंदर की महापौर डिंपल मेहता व अतिथि विशेष नगरसेवक सुरेश खंडेलवाल के अलावा अनेक मान्यवर उपस्थित