नाहर अस्पताल ने लौटाई मोतियाबिंद रोगी के आँखों की रोशनी

नाहर अस्पताल ने लौटाई मोतियाबिंद रोगी के आँखों की रोशनी

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मोतियाबिंद एक ऐसी अवस्था है जिसका यदि सही समय पर उपचार न हो तो अंधेपन का खतरा रहता है। इसके इलाज मुमकिन तो है परंतु यह अधिकतर वृद्ध लोगों को होता है जिसकी वजह से सर्जरी का जोखिम भी बढ जाता है। ऐसा ही कुछ भीनमाल के ६५ वर्षीय शांतिलाल का केस था जिनका मोतियाबिंद पक चूका था और कभी भी फट सकता था। इसके लिए उन्हें तुरंत सर्जरी की आवश्यकता थी। शांतिलाल की अवस्था का पता नाहर अस्पताल के डॉक्टरों को नि:शुल्क चिकित्सा शिविर के दौरान मालूम पडा और उन्हें शीघ्र सर्जरी के लिए भर्ती होने को कहा। जहां आम तौर पर मोतियाबिंद की सर्जरी बिना किसी जटिलता के हो जाती है वहां शांतिलाल के मामले में उनके दिमाग से जुडी एक अवस्था के कारण उनके शरीर में स्थिरता का अभाव था।

आबु रोड पर स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल ने रोगी के शरीर की अस्थिरता की वजह से सर्जरी करने से मना कर दिया तब नाहर अस्पताल के प्रशिक्षित डॉक्टरों ने इस जटिल के को सुलझााने का जिम्मा उठाया और २८ दिसंबर २०१८ शांतिलाल को भीर्ती किया। डॉक्टरों के लिए सबसे बडी चुनौती थी शांतिलाल की अस्थिर अवस्था को काबू में लाकर सही एनेस्थीसिया देना। तंबाकू व्यसनी रोगी के लिए जनरल एनेस्थीसिया देना जानलेवा होता है क्योंकि उनके फेफडे सहन नहीं कर पाते। ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर अनिकेत पटेल ने शांतिलल को लोकल एनेस्थीसिया देना उचित समझा। एनेस्थीसिया के बाद भी उनके अस्थिर सिर को पकड के रखना पडा ताकि सर्जरी की जा सके।

रोगी को सर्जरी के बाद केवल एक ही दिन अस्पताल में रहना पडा और २९ दिसंबर २०१८ को उन्हें डिस्चार्ज दिया गया। आज शांतिलाल की अवस्था में सुधार है और वो अपनी आँखों से दूर और पास की चीजें बिना चश्में के ठीक तरह से देख सकते हैं। सर्जरी के बाद शांतिलाल ने कहा मेरी सर्जरी अच्छी तरह से हो गई। मैं नाहर अस्पताल के डॉक्टरों का आभारी हूं। मुझे यहां ज्यादा पैसे भी नहीं लगे। सर्जरी, दवाईयां और एक दिन के वार्ड का मिलाकर ८-९ हजार का खर्चा हुआ।

इस अनोखे केस में नाहर अस्पताल के डॉक्टरों का अनुभव और प्रशिक्षण काम आया और बिना लेजर, परंपरागत तरीके से ही शांतिलाल के मोतियाबिंद का उपचार किया गया। जहां वे फिर से देख पाने की उम्मीद खो चुके थ, वहां नाहर अस्पताल ने उनकी आँखों की रोशनी लौटाई और एक तरह से उन्हें नया जीवन दान दिया।