अतित से अबतक : श्री पाश्र्वनाथ जैन शिक्षण संघ वरकाणा द्वारा संचालित...

अतित से अबतक : श्री पाश्र्वनाथ जैन शिक्षण संघ वरकाणा द्वारा संचालित विरार (मुंबई) में शिक्षा मंन्दिर का सत्र प्रारंभ

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विरार। श्री पाश्र्वनाथ जैन शिक्षण संघ वरकाणा (राज.) में सन १९२७ बसंत पंचमी के शुभ दिन जैन समाज के महान संत आचार्य श्री वल्लभसूरीश्वरजी म.सा. ने शिक्षा मन्दिर कि स्थापना की थी। सम्पूर्ण गोडवाड क्षेत्र में गुरुदेव ने विचरण करके आध्यात्मिक चेतना जागृत करते हुए अज्ञानता को समाप्त करने का संकल्प लिया व परम श्रद्धेय ललितसुरीश्वरजी म.सा. ने उस मिशन को प्रज्वलित किया। संस्था के सपने को समाज के महापुरुषों ने तन, मन व अथक प्रयास से अर्जित दौलत को समाज उत्थान में लगाकर संस्था को नई ऊचाई प्रदान की। अनेक समर्पित महानुभावों ने संस्था को नेतृत्व प्रदान की।  किया। वरकाणा शिक्षण संघ में अनेक गावों-शहरों से छात्र शिक्षा के लिए आकर अपना भविष्य को सवारते थे। पूर्व निदेशक संपतराज भंसाली ने भारत के मानचित्र पर शिक्षा मन्दिर के गौरव को स्थापित किया। वरकाणा शिक्षण संघ परिसर तकरीबन ५६ बिघा क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जिसमें तकरीबन ८ भवन है। पेढ़ी, हिन्दी माध्यमिक विद्यालय भवन, गेस्ट हाऊस, मिना राठौड छात्रावास, अंग्रेजी माध्यम सिनियर स्कुल भवन, वल्लभ विद्यार्थी गृह, अंग्रेजी जुनियर स्कुल भवन, कॉलेज भवन, रंगमंच, कोन्फरन्स होल, भोजन कक्ष, गार्डन, २ लॅबोट्री भवन, भिन्न-भिन्न खेल के मैदान जिसमें बोलीबॉल, फुटवॉल, हॉकी, क्रिकेट की व्यवस्था का उपयोग होता है।

नर्सरी से १२वीं तक शिक्षा मन्दिर में ७५० विद्यार्थी व सायन्स – कॉमर्स हिन्दी विद्यालय में २५० विद्यार्थी, कॉमर्स, सायन्स व आर्टन महाविद्यालय में ७०९ विद्यार्थी, बीए, बीकॉम, बीसीएए, एम. कॉम, बीएसी के विषय से उच्चस्तरिय शिक्षा प्रदान की जाती है। स्कुल द्वारा तकरीबन ९ बजे अलग-अलग गांवों से विद्यार्थियों को लाने की सुविधा दी जाती है। १७०० छात्रा-छात्राओं का उज्ज्वल भविष्य सवारने के लिए शिक्षण संघ तत्पर रहता है। संस्था में करीब १५० अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत है। जिनके के रहने हेतु १०० क्वाटर की व्यवस्था उपलब्ध है। जैन समाज में सेवा का लक्ष्य रखा है संस्था में प्रतिदिन नवकार मंत्र की धुन, वल्लभगुरु का भजन व राष्ट्रीय गीत से स्कुल प्रारम्भ होती है। छात्रावास में अतित में ६०० से ७०० छात्र हुआ करते थे। मगर आज सिर्फ ३२ जैन छात्र छात्रावास में अध्यनरत है। छात्रावास में शुद्ध जैन भोजन, प्रतिदिन सेवा पुजा, सामाजिक व गुरुकुल के ज्ञान संस्कार से उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त का सुनहरा अवसर मिलता है। शिक्षण संघ द्वारा बीएडी/ एमए/ एमएसी प्रस्तावित है। प्रयास जारी है। पूर्व अध्यक्ष कालिदास राठौड, घिसुलाल बदामिया, फतेचंद राणावत ने सेवा को सार्थक करके संस्था को चेतना प्रदान करवाई। वर्तमान अध्यक्ष खुबीलाल राठौड की अध्यक्षता में संस्था को गति प्रदान करने के कई योजनाओं पर चिंतन किया जा रहा है। संस्था मंत्री रमेश जैन ने संस्था के गौरव को पुन: नई ऊचाई प्रदान करने के लिए प्रयास का संकल्प किया। खुबीलाल राठौड कि अध्यक्षता में विरार के वरकाणा भवन व छात्रावास को शिक्षा मन्दिर के उपयोग को सार्थक बनाने का कार्य प्रारम्भ किया। विरार में कालिदास के अध्यक्षता में ८ मई २००१ को विशाल जनसैलाब की उपस्थिति में शिलान्यास का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। भवन के मुख्य दानदाता कुसुमबेन चुन्नीलालजी श्रीश्रीश्रीमाल सिंदरु निवासी ने अनुकरणीय कार्य को अंजाम दिया। ८ मई २००३ को विधिवत भवन का उ्दघाटन हुआ। समाज को शिक्षा की जरुरत को ध्यान में रखकर इस साल प्लेगु्रप से ५वीं कक्षा तक इसी सत्र से अंगे्रजी माध्यम स्कुल का शुभारंभ होने जा रहा है। भविष्य में कालेज का सपना हकिकत में तब्दील सम्भव है। उपरोक्त छात्रावास में ४८ सुविधायुक्त कमरे, स्कुल रुम, कार्यालय कॅन्टीन की सुंदर व्यवस्था उपलब्ध है। विरार शिक्षा का प्रारम्भ में कार्यकारिणी कार्यरत है।

संस्था कोषाध्यक्ष रुपचन्द बलडोटा विशेषतौर से विरार के शिक्षा सत्र को प्रारम्भ के लिए अथक प्रयत्नशील है। संस्था सहमंत्री सुकन परमार ने संस्था के गतिविधीयों की जानकारी प्रदान की।

अध्यक्ष खुबीलाल राठौड ने समाज के सभी महानुभावों से संस्था के सर्वागिण विकास में सहभागी बनने का अनुरोध किया।