सुखराज नाहर-कुछ तो खास है इस शख्स में

सुखराज नाहर-कुछ तो खास है इस शख्स में

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Sukhraj Nahar
Sukhraj Nahar

सुखराज नाहर की गिनती राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भवन निर्माताओं में होती है। वो जितने बडे व्यापारी हैं उससे कहीं बडे समाज सेवक हैं और उतने ही बडे धर्म के महात्म्य को समझने वाले व्यक्ति भी हैं। तभी तो कभी संस्था की तरफ से तो कभी व्यक्तिगत तौर पर तो कभी कंपनी की तरफ हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं

दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझकर उसे दूर करने का हर संभव प्रयास करना और समाज के प्रति अपनी हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाना एक बेहतरीन इंसान की पहचान होती है और सुखराज नाहर ऐसे ही इंसान है। जिन्होंने अपनी हर जिम्मेदारी को पूरी श्रद्धा और लगन के साथ पूरा किया है। दरअसल, सुखराज नाहर का पूरा जीवन संघर्ष, सफलता और सेवा की सबसे ताकतवर मिसाल है, जो उनके लिए आज भी मंजिल नहीं सिर्फ राह है। उनके काम, उनकी कोशिश और उनकी मेहनत देखकर लगता है कि समाज में ऊंचा मुकाम उनकी मंजिल नही है। व्यवसाय में सबसे आगे होना भी उनकी मंजिल नहीं है। उनकी मंजिल की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि जब सुखराज नाहर उसके करीब पहुंचते हैं, वहीं से उनकी अगली मंजिल की यात्रा शुरू हो गई समझो। क्योंकि थकना उन्होने सीखा नहीं, हारना भी उन्होंने नहीं सीखा और रुकते तो वे कही भी नहीं है।

पेशे से भवन निर्माता सुखराज नाहर की गिनती राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भवन निर्माताओं में होती है। उनकी कंपनी नाहर ग्रुप का मुंबई, पुणे, चेन्नई एवं अहमदाबाद में भवन निर्माण के क्षेत्र में बहुत बडा योगदान है। देश की प्रतिष्ठित कन्स्ट्रक्शन कंपनियों में नाहर ग्रुप का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता हैं। अपनी व्यावसायिक साख और नाहर ग्रुप के प्रभुत्व को स्थापित करने में सुखराज नाहर की सोच, समर्पण, निष्ठा और अदम्य आत्मविश्वास का सबसे बडा योगदान है। मुंबई चेन्नई एवं पुणे में उनके प्रोजेक्ट वर्तमान में चल रहे हैं। वे जितने बडे व्यापारी हैं उससे कहीं बडे समाज सेवक हैं और उतने ही बडे धर्म के महात्म्य को समझने वाले व्यक्ति भी हैं। तभी तो कभी संस्था की तरफ से तो कभी व्यक्तिगत तौर पर तो कभी कंपनी की तरफ हमेशा जरूरतमंदों की मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं वहीं धार्मिक कार्यों में भी बढचढकर हिस्सा लेते हैं।

सफलता के सपनों की उड़ान

सुखराज नाहर का मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी को संवारने के सपने देखने चाहिए। क्योंकि जब हम सपने देखेंगे तभी उन्हें पूरा करने के प्रयास भी करेंगे। वे मानते है कि बिना सपनों के जीवन दिशाहीन हो जाता है। परन्तु केवल सपनो से भी बात नहीं बनती, बात बनती है सपनों को पूरा करने की कोशिश से। सुखराज नाहर ने अपने जीवन में भी ऐसा ही किया। उन्होंने सफलता का एक सपना देखा और उसे पूरा करने का हर संभव प्रयास किया और उनका स्वप्न नाहर ग्रुप ऑफ कंपनीज के रूप में पूरी हुई। फिर उन्होंने दूसरा स्वप्न देखा कि वो समाज के हित में लोगों की भलाई के लिए कार्य करें तो उन्होंने अपने इस स्वप्न को एस बी नाहर चेरिटेबल ट्रस्ट के रूप में पूरा किया। नाहर ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुखराज नाहर की कल्पना ने लाखों लोगों की आकांक्षा को वास्तविकता में परिवर्तित करने में मदद की है।

बचपन से ही बहुत बडा आदमी बनने के सपने देखने वाले नाहर अपने आप में एक सफल एवं सच्चे उद्यमी हैं। सफलता के पंखों पर सवार होने के अपने सपनों को साकार करने के लिए सिर्फ १६ साल की उम्र में ही सुखराज नाहर राजस्थान के जालोर जिले मे स्थित अपने पैतृक गांव भीनमाल से मुंबई आ गए थे। और फिर शुरू हुआ अपने लक्ष्य की तरफ बढने का रास्ता, जो आसान नहीं था। मुश्किलें बहुत आयी लेकिन अपनी हिम्मत और ताकत से नाहर ने हर मुश्किल से जूझते हुए अपनी साहसिक यात्रा की शुरूआत की, जो अपने उद्देश्य को साझा करते हुए और सामूहिक अच्छाई के लिए काम करते हुए प्रतिभाशाली लोगों को एक टीम के तौर पर साथ लाई। और आज वे भवन निर्माण के क्षेत्र की एक प्रमुख कंपनी के मुखिया के रूप में अपने जीवन के बेहतरीन मुकाम पर हैं।

सामाजिक सरोकार और सहयोग

सुखराज नाहर के जीवन में किए हुए कार्यों पर नजर डाले तो यह बात ज्यादा सही हैं कि उन्होंने केवल सिमेंट और ईंटों से बने मकान ही नहीं बनाए बल्कि शिक्षा, संस्कृति, चिकित्सा एवं खेल के क्षेत्र मे भी ऐसे संस्थानों और संस्थाओं का निर्माण में भी किया, जो समाज की भलाई में योगदान देते हैं। नाहर ने अस्पताल बनाए, लाइब्रेरी का निर्माण कराया, सामाजिक संस्थाओं की मदद की, व्यक्तिगत तौर पर बहुत सारे लोगों की मदद की। सन 2008 में, भीनमाल में एस बी नाहर हॉस्पिटल के नवीनीकरण के दौरान नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया था, जिसमें लगभग 2000 मरीजों का फ्री चेकअप किया गया और उनकी बीमारियों का परीक्षण करके नि:शुल्क दवाईयों के साथ उपचार किया गया। स्वर्गीय श्रीमती शांति देवी नाहर की स्मृति में 2014 में भीनमाल में एक मेडिकल कैम्प आयोजित किया गया था, जिसमें 1800 मरीजों का इलाज किया गया। लगभग चालीस साल पहले एस बी नाहर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा राजस्थान हॉस्पिटल, अहमदाबाद में एक नए भवन का निर्माण कराया गया एवं जालोर और सिरोही के सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक की स्थापना की। मोहनखेडा में लगभग 45 वर्ष पूर्व, ट्रस्ट ने विशाल जैन भोजनालय का निर्माण कराया एवं अहमदाबाद के समीप स्थित कोबा तीर्थ में पुस्तक संग्रहालय का निर्माण कराया।  भीनमाल में ट्रस्ट ने चौक का निर्माण कराया एवं 1981 में तीन बाज़ार चौक महावीर सर्किल, माघ सर्किल और गांधी सर्किल का निर्माण हुआ। माघ सर्किल के नजदीक एक लाइब्रेरी के साथ देवी सरस्वती के मंदिर की स्थापना की गई है। श्री नाहर की माताजी स्वर्गीय श्रीमती शांति देवी बाबूलालजी नाहर की स्मृति में भीनमाल में एक विद्यालय का निर्माण भी कराया गया है, साथ ही ट्रस्ट ने भीनमाल में एसडीएम ऑफिस के नजदीक विकास भवन का निर्माण किया गया। नाहर चैरिटेबल ट्रस्ट ने भीनमाल के गांववासियों के लिए हॉस्पिटल बनाया तथा हॉस्पिटल ने तब से अपने कार्य के लिए प्रशंसा के साथ विशेष पहचान बनाई है। साधन विहीन बच्चों को अपने स्कूल पहुंचने के लिए भीनमाल तक लंबा सफर तय करना पडता था। उनके लिए नाहर ने कई छोटे – छोटे गांवों में प्राइमरी स्कूल की बिल्डिंग बनाई गई। सन 1983 से लेकर 1985 की अवधि के दौरान अरनाउ, खेडा, मिंद्रावास, कूका और सेवरी गांवों में प्राइमरी स्कूल स्थापित किए गए। सन 1988 सरकारी बस स्टैंड पर एक प्याउ बनाया। श्री नाहर के छोटे भाई स्वर्गीय श्री सुरेश नाहर की स्मृति मे इसका निर्माण कराया गया है। इसके अलावा 1981 से 1985 तक, राजस्थान में भयानक अकाल के दौरान  नाहर ने गांवों में चारे का नि:शुल्क वितरण किया एवं 2002 से 2003 तक भीनमाल के गरीबों को अनाज का भी नि:शुल्क वितरण किया। सन 2006 में, भीनमाल के अनेक परिवारों को राशन किट्स और कपडे वितरित किए गए। ट्रस्ट ने लोगों के बीच जाकर उन्हें राशन, दवाईयां, बर्तन व अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की। भीनमाल में जीवदया गौशाला एक जानी-मानी गौशाला है। साल 2008 से लेकर 2009 तक नाहर चैरिटेबल ट्रस्ट ने एक हजार गायों के पोषण व उनकी बेहतर देखभाल के सहायतार्थ एक साल के खर्च का अनुदान दिया था। 2007 में भीनमाल के गरीब ग्रामवासियों के लिए नि:शुल्क भोजन सुविधाओं का प्रबंध किया। यह अभियान छह से सात माह की अवधि तक चला। साल 2012 में नाहर चैरिटेबल ट्रस्ट ने महावीर इंटरनेशनल के ग्लोबल सेमीनार का आयोजन किया। लगभग 1500 विशिष्ट अतिथि इस उत्साह से भरे आयोजन में भाग लेने के लिए भीनमाल पधारे। जुलाई 2012 में, ट्रस्ट ने छात्रों के लिए एक स्कॉलरशिप का आयोजन किया। इस विशेष अवसर पर जालोर के जिला कलेक्टर की उपस्थिति में स्कूल बैग्स और एजुकेशनल किट्स का वितरण किया गया। 2013 में, एस बी नाहर चैरिटेबल ट्रस्ट ने भीनमाल की गायत्री गौशाला में रह रही हजारों गायों का भरण पोषण और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाई। भीनमाल में विनाशकारी बाढ आई, तो हर बार नाहर ने हर तरह से लोगों का सहयोग किया।

नाहर ग्रुप के चेयरमैन सुखराज नाहर एक परोपकारी एवं समाज में समानता के प्रबल समर्थक हैं। वे विभिन्न सामाजिक संगठनो में भी सक्रिय हैं। अंतराष्ट्रीय संस्था जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) अपेक्स के वाइस चेयरमैन हैं। साथ ही जैन एजुकेशन ट्रेनिंग फाउंडेशन (जेएटीएफ) के निदेशक हैं। भवन निर्माण के क्षेत्र की सबसे प्रतिष्ठित संस्था एमसीएचआई – क्रेडाई के वाईस प्रेसिडेंट है। सर्वोदय चैरिटेबल ट्रस्ट, मुलुंड के चेयरमैन और मुलुंड महासंघ के चेयरमैन हैं। इसके साथ ही वे भीनमाल वेलफेअर असोसिएशन एवं राजस्थानी वेलफेअर एसोसिएशन के संस्थापक भी हैं। जीवन में मेहनत और लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले नाहर मानते हैं कि मेहनत से हम सफल होते हैं और सफलता हमें समाज के प्रति ज्यादा जिम्मेदार बनाती हैं। इसलिए जो भी व्यक्ति अपने जीवन के जिस क्षेत्र में सफल है उसे समाज के जरूरतमंद वर्ग के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार समर्पित भाव से तत्पर रहना चाहिए। नाहर ग्रुप के चेयरमैन और उंची सोच के धनी सुखराज नाहर के जीवन में वैसे तो हर बात खास और अलग है लेकिन सबसे खास बात यह है कि वे अपने लक्ष्य के प्रति बहुत गंभीर है जो उन्हें औरों के बीच कुछ खास बनाती है।