श्रीपाल लोढ़ा- अपने दम पर सफल व्यक्तिव के धनी

श्रीपाल लोढ़ा- अपने दम पर सफल व्यक्तिव के धनी

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Shripal Lodha
Shripal Lodha

देश की प्रमुख फ्लेक्सीबल पैकेजिंग कंपनियों में से लीडिंग कंपनी उमा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के चेयरमेन श्रीपाल लोढ़ा जाने माने उद्योगपति हैं, सक्रिय समाजसेवी है, और धार्मिक कार्यों के प्रति समर्पित भी हैं।

माना जाता है कि जिंदगी में हमारा कद बड़ा होना चाहिए। क्योंकि एक कद ही तो है, जो जिंदगी के आखिरी दौर तक हमारी जिंदगी के साथ साये की तरह चलता रहता है। और इस कद के ऊंचेपन के कारण ही मौत के बाद भी लगातार सालों साल तक सम्मान मिलता है। हमारे कृतित्व के ऊंचे कद से ही समाज में हमारे स्तर को आंका जाता है। इसी कारण दुनिया भर के सारे लोग हमेशा समाज में अपना कद बढ़ाने के लिए ही हर तरह की कोशिश करते हैं। लेकिन कद बढ़ाने के लिए हमारे काम का स्तर भी ऊंचा होना चाहिए, तभी जिंदगी में हमारा कद बड़ा होगा। जिंदगी में कद के ऊंचा होने के इस सार को जोधपुर निवासी श्रीपाल लोढ़ा ने बहुत पहले ही समझ लिया था। ना दिन देखा ना रात। ना थकान महसूस की और ना किसी तरह की चैन की कोई सांस ली। बस, लगातार मेहनत करते रहे और जिंदगी में वो कद पा लिया, जिसके लिए लोग तरसते रहते हैं। लोग एकाध फैक्टरी लगाने में भी पूरा जीवन खपा देते हैं, मगर बहुत कम सालों में ही श्रीपाल लोढ़ा अपने दम पर चार पॉलीमर्स युनिट स्थापित करके बहगुत सफलतापूर्वक उनका संचालन भी कर रहे हैं। आज उनके द्वारा स्थापित उमा पॉलीमर्स ग्रुप एक विश्वसनीय ग्लोबल ब्रांड बनने की तरफ अग्रसर है, जो उनका सपना भी था।

देश की प्रमुख फ्लेक्सीबल पैकेजिंग कंपनियों में से लीडिंग कंपनी उमा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के चेयरमेन श्रीपाल लोढ़ा जाने माने उद्योगपति हैं, सक्रिय समाजसेवी है, और धार्मिक कार्यों के प्रति समर्पित भी हैं। भारत की इस प्रमुख कंपनी का सालाना कारोबार १२5 मिलीयन अमरीकन डॉलर का है। विरासत में उद्योग और धंधे तो हर किसी को बहुत आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन अपने दम पर खुद का कारोबार खड़ा करके उसे देश और दुनिया में अपने सपनों से भी बड़ा बनाना बहुत मुश्किल काम होता है। लेकिन यह मुश्किल काम भी श्रीपाल लोढ़ा ने अपनी मेहनत से कर दिखाया। एक बहुत ही मध्यमवर्गीय संस्कारी परिवार में जन्मे लोढ़ा अपने कुटंब में फस्ट जेनरेशन इंडस्ट्रीयलिस्ट हैं, और जीवन का यह मुकाम हासिल करने का सारा श्रेय वे अपनी कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच को देते हैं। ईमानदारी से सही दिशा में काम करते रहने को सबसे महत्वपूर्ण मानते हुए समाज में खुद की गुडविल को लगातार आगे बढ़ाते रहने के साथ आगे बढऩे को ही श्रीपाल लोढ़ा अपनी जिंदगी की पहली जरूरत मानते हैं। वे कहते हैं कि सफलता कभी भी यूं ही नहीं मिलती। जीवन में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत, कर्तव्य के प्रति ईमानदारी और सकारात्मक सोच के मजबूत रास्ते पर चलना पड़ता है। अपनी इसी कड़ी मेहनत, कर्तव्य के प्रति ईमानदारी और अपनी सकारात्मक सोच के मूलमंत्र को जीवन में अपनाने के कारण ही श्रीपाल लोढ़ा जिंदगी के बेहतरीन मुकाम पर हैं। आज पेप्सीको, नेस्ले, टाटा, ग्लोबल ब्रेवरिजेज, टाटा केमिकल्स, आइटीसी, पर्पेची, पारले और बीकाजी जैसे प्रमुख ब्रांड्स उनके ग्राहको की सूचि में शुमार है।

जोधपुर में 20 अक्टूबर, 1958 को जन्मे श्रीपाल लोढ़ा को मेहनत के साथ कर्म, धर्म और जीवन के मर्म को समझने के संस्कार उनके माता-पिता शुद्धराज लोढ़ा एवं श्रीमती उर्मिला लोढ़ा से मिले। करीब 30 साल पहले जोधपुर से उन्होंने व्यावसाय की शुरूआत की थी और एक के बाद एक करते हुए वे बहुत जल्द ही चार मेन्युफेक्चरिंग युनिट के मालिक बन गए। उनकी औद्योगिक सफलकता को देखते हुए नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ इकॉनोमिक स्टडीज ने उन्हें उद्योग रत्न एवं एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया, तो वल्र्ड पेकेजिंग ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से उन्हें सन 2013 में वल्र्ड स्टार अवॉर्ड भी मिला, जो उनके औद्योगिक क्षेत्र में बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है। सन 2012 में एशियन पेकेजिंग फेडरेशन ने इटीए पाउट फैमिली डेवलपमेंट के लिए श्रीपाल लोढ़ा को एशिया स्टार और इसी वर्ष आइआइपी ने उन्हें इंडिया स्टार अवॉर्ड से सम्मानित किया। सन 2012 में ही पेप्सीको ने उन्हें बेस्ट वेंडर फॉर फ्लेक्सिबल लेमिलेट्स के लिए सम्मानित किया। वल्र्ड क्लास प्रोडक्ट्स के लिए वल्र्ड क्लास पेकेजिंग देनेवाले लोढ़ा करीब 2०00 से भी ज्यादा लोगों के साथ अपनी कंपनी को संचालित करने के लिए बेहतरीन कॉर्पोरेट गवर्वेनेंस में भरोसा करते हैं।

व्यावसायिक रूप से वे जितने सक्रिय हैं, उतने ही सामाजिक रूप से भी सक्रिय है। श्रीपाल लोढ़ा जैन समाज की वैश्विक स्तर पर बहुत ही विश्वसनीय एवं लब्ध प्रतिष्ठित संस्था जैन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) जोधपुर चेप्टर के चेयरमेन रहे हैं और वर्तमान में जीतो के डायरेक्टर भी हैं। इसके साथ ही साधु-साध्वीयों के वैयावच्च करने वाली सस्था श्रवण आरोग्यम् के सदस्य है। वैसे तो वे समाज के प्रति किसी भी किए हुए अपने कार्य को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी मानते है इसी कारण अपने किये हुए काम का वे कोई प्रचार नहीं लेते। लेकिन फिर भी जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल में उन्होंने जो कार्डियोलॉजी लैब स्थापित की है, उससे हजारों लोगों को बहुत बड़ा लाभ होने की खबर लोग उन्हें देते हें, तो अपने काम पर खुशी जरूर होती है। वे साधु संतों की सेवा करना जीवन का धर्म मानते हैं, इसी कारण साधु-साध्वीजी के विहार की व्यवस्था एवं उनके आवास आदि में सहयोग करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। हर साल लगनेवाले विश्व विख्यात रामदेवरा मेले में जानेवाले श्रद्धालुओं के लिए सालाना करीब डेढ़ लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था भी वे करते हैं। लेकिन अपने इन सारे ही कार्यों का उन्होंने प्रचार करके कोई लाभ लेने की कभी कोई कोशिश नही की। वे इसे सामाजिक कर्तव्य और माता पिता से मिले उच्च संस्कारों का परिणाम मानते हैं। जोधपुर में बीकॉम तक पढ़े श्रीपाल लोढ़ा मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के योगदान के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। क्योंकि व्यक्ति जब मेहनत करता है, तो उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए बहुत सारे अपने लोगों को देनेवाले समय में से कटौती करनी पड़ती है। वे मानते हैं कि उनके जीवन की सफलता में उनकी मेहनत, लगन एवं समर्पण के साथ साथ उनकी पत्नी श्रीमती सरिता लोढ़ा, पुत्र श्रीकुल, पुत्री श्रीकृति एवं श्रुति लोढ़ा के स्नेह एवं समर्पण का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है। व्यवसाय में कस्टमर फस्र्ट के सिद्दांत में विश्वास करनेवाले श्रीपाल लोढ़ा भारत में तो अपने क्षेत्र में शिखर पर है ही, लेकिन अब सिंगापुर और नाइजीरिया में भी अपनी मेन्युफेक्चरिंग युनिट्स की शुरू करने की प्लानिग में हैं। जैन समाज की गतिविधियों की जानकारी के लिए शताब्दी गौरव को एक उत्कृष्ट माध्यम बताते हुए श्रीपाल लोढ़ा ने कहा कि समाज के प्रमुख लोगों के बारे में अनेक नई जानकारियों से भरपूर शताब्दी गौरव सफलता की ओर अग्रसर हैं एवं समाज का प्रमुख समाचार पत्र है, यह खुशी की बात है। जीवन में हम जो कुछ भी सीखते हैं, उसी से हमारी जिंदगी को विकास होता है। सो, सीखना हमेशा से उनकी आदत का हिस्सा है। वे मानते हैं कि हर व्यक्ति से हर पल कुछ न कुछ सीख मिलती रहती है। वे जिस किसी से भी जो कुछ सीखते हैं, उस बात के लिए उसे अपना गुरू मानते हैं। लेकिन एक अच्छे और सच्चे गुरू की तलाश उन्हें हमेशा से रही है। शरीर स्वस्थ है तो ही सब कुछ है, सो स्वास्थ्य का ख्याल रखना उनका प्रमुख शौक है और समय का सही उपयोग करना उन्होंने बचपन में ही सीख लिया था। जो लोग जीवन में सफल हैं, उनकी सफलता से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को विकास के नए रास्ते पर खड़ा करना भी उन्होंने अपने करियर के शुरूआती दिनों में ही सीख लिया था। इसी कारण अपने आसपास के लोगों के मुकाबले जीवन के किसी भी क्षेत्र में श्रीपाल लोढ़ा इतने बड़े कद के व्यक्ति हैं कि वैसे कद की कोई भी कामना करते हैं।