गोड़वाड़ की राजधानी वरकाणा की व्यथा बुलाया ९९ गांवों को, लोग आए...

गोड़वाड़ की राजधानी वरकाणा की व्यथा बुलाया ९९ गांवों को, लोग आए सिर्फ 200, वाह क्या सीन था!–सिद्धराज लोढ़ा

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Sidhraj Lodha
Sidhraj Lodha

वरकाणा तीर्थ गोड़वाड़ की राजधानी है। यह बात पूरा गोड़वाड़ मानता है। हम दुनिया भर में यह कहते हुए घूमते हैं कि वरकाणा तीर्थ के प्रति गोड़वाड़ के लोगों के मन में बहुत सम्मान है। लेकिन वास्तव में हम अपने इस वैभवशाली तीर्थ की गरिमा को लेकर कितने गंभीर हैं, इसका उदाहरण पिछले दिनों उस समय मिला, जब वरकाणा में हुए इस साल के सबसे विशेष कहे जानेवाले महासम्मेलन के आयोजन में भी गिनती के लोग ही उपस्थित हुए। वरकाणा में आयोजन था समस्त गोड़वाड़ का विराट स्नेह सम्मेलन, और लोग सिर्फ 200… जी हां केवल दो सौ। गोड़वाड़ में कुल गांव ९९, लेकिन इतने सारे गांवों से सिर्फ दो सौ लोग! जबकि पूरे गोड़वाड़ के ज्यादातर गांवों के लोग अपने अपने गांवों में स्नेह सम्मेलनों के लिए गोड़वाड़ पहुंचे हुए ही थे।

मत भूलिये कि वरकाणा तीर्थ का समस्त गोड़वाड़ पर बहुत बड़ा अहसान है। यही वह तीर्थ है जहां से शिक्षा की ज्योति ने हमारे समाज में विकास के नए द्वार खोले। यही वह तीर्थ है जहां से समस्त गोड़वाड़ की एकता का संकल्प आगे बढ़ा और यही वह पावन धरती है जिसने जीवन में आगे बढऩे के प्रति हमारे भीतर अथाह उमंग भरी। लेकिन किसी तीर्थ पर हो रहे आयोजन के प्रति समाज में इतना अनादर भाव पहली बार देखा गया है। यह विराट महासम्मेलन 25 दिसंबर को था, जिसमें गोड़वाड़ के हर गांव के प्रतिनिधि, सभी ट्रस्टों को पदाधिकारी, सभी संघों और सभी गांवों के लोग आमंत्रित थे। लेकिन पहुंचे सिर्फ 200 लोग। उनमें भी 50 तो इटंदरा निवासी शांतिलाल लुंबचंदजी परमार परिवार के लोग थे, जिन्होंने आयोजन का संपूर्ण लाभ लिया था।  परिवार। और बाकी गोड़वाड़ के वे जाने माने चेहरे, जिनके बिना हर मंच अधूरा होता है। लेकिन लोग क्यों नहीं पहुंचे, यह शर्म की बात होनी चाहिए।

जरा सोचिये, हमारे मन में अपने धर्मस्थलों के प्रति क्या यही सम्मान बचा है? यह एक शर्मनाक तथ्य है कि हमारी वरकाणा के प्रति गोड़वाड़ के लोगों के उत्साह में कमी आई है। भले ही श्रद्धा में कमी नहीं आई है, लेकिन यह सत्य है कि उस श्रद्धा को प्रकट करने के लिए हम समय नहीं निकालते। जरा सोचिये, क्या अपने तीर्थों की ऐसी अवमानना करने के पाप के लिए आनेवाली पीढिय़ां हमें माफ करेगी?