मुम्बई में विज्ञान और अध्यात्म पर सेमिनार

मुम्बई में विज्ञान और अध्यात्म पर सेमिनार

SHARE

मुम्बई। भगवान महावीर के दिक्षा कल्याणक महोत्सव के अवसर पर धर्म और विज्ञान भविष्य में कैसे समाज के लिए वरदान साबित होगा। इस विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन इंटरनेशनल अहिंसा रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ऑफ स्प्रिचुवल टेक्नोलॉजी द्वारा वल्र्ड जैन कान्फेडरेशन, आई आईटी बॉम्बे और बी. एम. आई. आर. सी जैन विश्व भारती इंस्टीट्यूट के सहयोग से मुम्बई के भारतीय विद्या भवन में  प्रोफेसर मुनि महेंद्र कुमार, आचार्य नंदीघोष सुरी, समणी चैतन्य प्रज्ञा के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर, डॉक्टर मुनि अभिजितकुमार ने कहा कि विज्ञान और धर्म के एक साथ आने से जीवन सुगम होगा। पुस्तक विमोचन के दौरान मुनि अभिजितकुमार ने कहा पुस्तक केवल पड़ी न रहे बल्कि पढ़ी हुई होनी चाहिए। जस्टिस तातेड़ ने कहा धर्म जब विज्ञान के पटल पर सिद्ध होता है तभी उसे समाज स्वीकारता है। जबकि धर्म विज्ञान से पहले है। प्रोफेसर डा. नरेंद्र भंडारी ने  कहा कि भगवान महावीर ने हजारों वर्ष पहले ही मानव विज्ञान की परिभाषा रखी थी। जिन सिद्धांतो को आज हम मान रहे हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डा. प्रताप संचेती ने विस्तार पूर्वक बताया की आई आर्टिस्ट एक संस्था समूह है जो भविष्य के लिए विज्ञान आधारित खोज करती है। प्रोफेसर महेंद्र मुनिजी ने इसे स्थापित करने के लिये मार्ग दर्शन दिया है।

प्रोफेसर समणी डा. चैतन्य प्रज्ञा ने कहा कि जैन धर्म विज्ञान के पटल पर लगातार एक उचित स्थान प्राप्त करता जा रहा हैं। डॉक्टर बिपिन दोषी, रोजी ब्लू फाउंडेशन के अरुण मेहता, लाहेरी गुरुजी ने भी अपने विचारो से धर्म और विज्ञान में समन्वय  रखते हुए जीवन पद्धति अपनाने पर जोर दिया। आचार्य नंदी घोष ने कहा कि मुनि महेंद्र कुमार की पुस्तकों से मुझे प्रेरणा मिली। करीब 35 वर्ष पहले उनकी किताब पढ़ी थी, उसके बाद ही मेरे जीवन मे बदलाव आया और जब तीन साल पहले उनसे साक्षात मुलाकात हुई तो उनके व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हुआ। अरूण भाई मेहता, रोझी ब्ल्यु फाउण्डेशन, के सहयोग से छपी पुस्तक जैन फिलासोफी-ए-साइन्टिफिक अपरोच टू रिअलिटी का उन्होने विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुम्वई विश्व विद्यालय के जैनोलोजी फिलासोफी विभाग के वर्ष 2017-18 के विद्यार्थियो का अभिनन्दन भी किया गया।

इस अवसर पर प्रोफेसर के पी मिश्रा, भंवरलाल कर्णावट, सिरियारी संस्थान अध्यक्ष ख्यालीलाल तातेड़, राजकुमार चपलोत, राजेश चौधरी, महेंद्र तातेड़, प्रकाश धींग, मुकेश धाकड़, विजय पटवारी, नितेश धाकड़, हेमेंद्र जैन, चन्द्रप्रकाश मादरेचा, सुनील इंटोदिया, दिनेश धाकड़, कुलदीप बैद, प्रहलाद सिंह आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुवात नवकार महामंत्र के साथ हुई। मंगलाचरण गीतिका की प्रस्तुति पीयूष नाहटा ने दी।

कार्यक्रम के अंत में विमल कोठारी ने सभी अतिथियोँ का आभार व्यक्त कर सभी संस्थाओं को सहयोग देने का निवेदन किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विशेष सहयोग, वी. सी. कोठारी, सुमेर सुराणा, एस के जैन, प्रवीण धारीवाल, अशोक कोठारी, नवरत्न गन्ना, कमलेश रांका और पूजा बांठिया का रहा। कार्यक्रम का संचालन मुनि डा. अभिजीत कुमारजी और श्रीमती वर्षा बैद ने किया।