चंदन परिवार द्वारा स्वर्णसीढी का भव्य आयोजन

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    मुंबई। वो लोग बड़े भाग्यशाली होते है जो चतुर्थ पीढ़ी का स्वर्णिम सुख प्राप्त करते है। हर मनुष्य के जीवन का एक ही सबसे बड़ा सपना होता है कि वो जीते जी चौथी पीढ़ी यानि परपोत्र का मूँह देखे और शास्त्रानुसार उसके द्वारा स्वर्णसीढ़ी पर आरुढ़ होकर मोक्ष पदगामी बने। स्वर्णसीढ़ी यानि मोक्ष की सीढ़ी बिरले नसीब वाले ही चढ़ पाते है। श्री चुन्नीलालजी चंदन एवं श्रीमती समुबेन भाग्यशाली है जिन्होने चतुर्थ पीढ़ी के रुप मे परपोत्र अगस्त्य एवं वेद को पाकर जीवन के सबसे बड़े सपने को साकार किया है। स्वर्णसीढ़ी यानि जीवन की लंबी जिजिविषा, भरपूर जिन्दगी, अनुभव का अपार भंडार, एवं पूर्ण परिपक्वता आदर और प्यार अर्थात जीवन का स्वर्णकाल। मुम्बई के हृदय स्थल वर्ली के एन एस सी आई के हाँल मे एक भव्य, दिव्य व यादगार समारोह आयोजित किया गया जिसमे समाजसेवा के पर्याय, दानवीर समाजसेवी धर्म के रथ पर आरुढ़ श्री चुन्नीलालजी चंदन तथा उनकी धर्मपरायण, सदगृहस्थ धर्मपत्नी श्रीमती समुबेन चंदन को संगीत की स्वरलहरियो, परिजनो व इष्टमित्रो की उपस्थिति मे नमोकार मंत्र के स्मरण व प्रभू वीर की जयजयकार के साथ परपोत्र आगत्य – वेद द्धारा स्वर्णसीढ़ी पर आरुढ़ किया गया तो चंदन दम्पत्ति के नयनो से खुशी के नीर बहने लग गऐ। अपलक वे दोनो कभी स्वर्णसीढ़ी को तो कभी अपने सपनो को संजीव करने वाले चोथी पीढ़ी के चश्मोचिराग को निहार रहे थे। खुशियो के संग अपनो का साथ पाकर वे फूले नही समा रहे थे। इस प्रासंगीक प्रंसग को जबरदस्त व्यवस्थाओ से व्यवस्थित कर चुन्नीलालजी चंदन के सुपुत्रो दिलीप चंदन, विजय चंदन पौत्र चिराग एवं चेतन चंदन ने पारिवारीक प्रेम की उत्कृष्ट मिशाल पेश की तथा अपने जन्मदाता मात-पिता के चरणो मे अपना तन-मन समर्पण किया। इस अवसर पर जैन संगीतकार विक्की पारेख ने अपनी मीठी मधूर वाणी मे संगीत की सुरीले स्वरो के साथ स्वर्णसीढ़ी व माता-पिता, भाई-बहन, परिवार पर सुन्दर वक्तव्य देकर पुरे माहोल को भावनात्मक बना दिया कई ऐसे पल आऐ जब वहाँ उपस्थित लोगो की आँखे भर आई। ये सच है जब-जब पारिवारीक प्रेम के पुष्प पल्लवित होते है, तब प्रसंग के रुप मे भावनात्मक, सृजनात्मक व रचनात्मक भावो का स्पंदन नवइतिहास का सजृन करते हैं।

    कार्यक्रम में जालोर के सांसद देवजी पटेल, लोकायुक्त एस. एस. कोठारी (जयपुर), वरिष्ठ समाजसेवी कनकराज लोढा, सुखराज नाहर, पृथ्वीराज कोठारी, शांतिलाल कवाड, धिरज कोठारी, प्रकाश कानूंगो, मनोहर कानूंगो, बाबुलाल बोहरा, अनिल जेन चैन्नई, विमल बोराणा, सिद्धराज लोढ़ा, सुरेश लोढा, बाबुलाल मेहता, बाबुलाल संघवी, गोडीजी जैन संघ के अध्यक्ष अंतुभाई, धीरज भंडारी, साकलचंद संघवी, सज्जनराज कवाड़, सोहनराज खजांची, हसमुख राणावत, नरेश लोढा सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उपस्थित थे।