जैन पैसेवाले, तो मुंबई में कॉलेज क्यों नहीं? – सिद्धराज लोढ़ा

जैन पैसेवाले, तो मुंबई में कॉलेज क्यों नहीं? – सिद्धराज लोढ़ा

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जैन समाज के हजारों बच्चे स्कूलों और कॉलेजों में एडमिशन के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। आर्थिक रूप से अत्यंत मजबूत होने के बावजूद जैन समाज का कोई कॉलेज मुंबई में नहीं है। मुंबई में कॉलेज का निर्माण करने की भावना से लोकप्रिय़ जैनाचार्य राष्ट्रसंत चंद्रानन सागर सूरीश्वर महाराज ने सालों पहले एक मुहिम शुरू की थी। साथ आचार्य चंद्रानन सागर ने यह घोषणा भी की थी कि वे जब तक कॉलेज का निर्माण करवाने में सफल नहीं होंगे, तब तक किसी के घर भी पगलिया नहीं करेंगे। लेकिन अपने आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध साबित होने का दंभ रखनेवाले जैन समाज में एक संत के इस सामाजिक प्रण की भी कोई परवाह अब तक नहीं दिखी है। सच बात तो यह कि मुंबई में जैन समाज का भी कॉलेज बने, इस बारे में कोई सोचता ही नहीं है।

मुंबई में सभी जातियों व समाजों के अपने अपने कॉलेज हैं। मारवाड़ी समाज के भी कई कॉलेज हैं। जिनमें रुईया, पोद्दार, झुनझुनवाला, डालमिया, अग्रवाल, मित्तल, सराफ, सिंघानिया आदि कॉलेज प्रमुख हैं। हम बड़े बड़े दावे करते हैं कि जैन समाज के लोग देश में सबसे ज्यादा टैक्स देते हैं, जैन ही सबसे ज्यादा धार्मिक कार्य करते हैं। दान भी जैन समाज के लोग ही सबसे ज्यादा देते हैं। ये सारे दावे सही हो सकते हैं, लेकिन यह भी सही है कि जैनों ने मुंबई में अपने समाज के कॉलेज के निर्माण की कोई ठोस कोशिश भी कभी नहीं की। जैन समाज के घरों की आज की स्थिति यह है कि एडमिशन को लेकर बच्चे हैरान हैं और हर माता पिता परेशान। करे तो क्या करे, और जाएं तो जाएं कहां। ना कोई ठोर और ना ही ठिकाना। हालात यह है कि पैसे देकर भी एडमिशन नहीं मिल रहे हैं। हर साल हजारों बच्चों को अपने घर परिवार के हालात के मुताबिक सुविधाजनक स्कूल या कॉलेज में एडमिशन नहीं मिल पाता। लेकिन व्यापारिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से बहुत समृद्ध होने के बावजूद जैन समाज का कोई भी व्यक्ति मुंबई में कॉलेज को निर्माण को लेकर गंभीर नहीं दिखता।

चार साल पहले जैन समाज को जब अल्प संख्यक बनाकर कानूनी रूप से मुसलमानों व इसाईयों के साथ खड़ा किया गया, तब संवैधानिक रूप से अज्ञानी किस्म के बहुत सारे लोगों ने प्रचार शुरू किया था कि जैसे अब तो जैन समाज के सारे शैक्षणिक कष्ट दूर हो गए। वे अब इस सवाल का जवाब देने से मुंह चुराते हैं कि आखिर हमारे समाज के बच्चों को अल्पसंख्यक कोटा में भी स्कूलों व कॉलेजों में एडमिशन क्यों नहीं मिलता। क्यों अल्प संख्यक के नाम का सारा फायदा मुसलमानों व अन्य लोगों को ही मिल जाता है। जैन समाज हमेशा से समाज को एक दिशा देनेवाला समाज रहा है। साथ ही मुंबई में देश के सबसे ज्यादा जैन रहते हैं। और यह भी सच है कि शैक्षणिक रूप से भी जैन एक समृद्ध कौम रही है। लेकिन आज जो हालात हमारे सामने है, उनके हिसाब से सोचें, तो आनेवाले कई सालों में भी मुंबई में जैन समाज का कोई कॉलेज हम देख नहीं पाएंगे, और जैन समाज के प्रतिभाशाली बच्चे साल दर साल एडमिशन के लिए भटकते ही रहेंगे, क्योंकि क्योंकि कॉलेज निर्माण के लिए कोई कोशिश भी नहीं हो रही।