भारत की टीम G-Force विश्व मंच पर चमकी

भारत की टीम G-Force विश्व मंच पर चमकी

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एस्टोनिया। पानी के रीसाव और प्रदूषण को रोकने के लिए १२ से १४ वर्षीय सात बच्चों की टीम ने एक नये तरह के रोबोट कार को एस्टोनिया के टालीन शहर में हाल ही में संपन्न हुए प्रथम लेगो लीग स्पर्धा में प्रस्तुत किया। जी-फोर्स टीम के नाम से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही टीम को रिसर्च श्रेणी में प्रथम ईनाम दिया गया। पैनल में बैठे जूरी सदस्यों ने सातों बच्चों की तारिफ करते हुए कहा कि यह बच्चें काफी दूर से आए है और अपनी रिसर्च द्वारा यह अपने समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने की सोच भी रखते है और इस पर अनुठा कदम भी उठाया है। अपने प्रोजेक्ट के लिए विभिन्न संस्थाओं की मदद लेते हुए कमाल की परिपक्वता दिखाई है। इस टीम में सादडी निवासी महेन्द्रकुमार दानमलजी रातडिया के पौत्र आगम जयेश रातडिया भी शामिल हैं।

इस प्रोजेक्ट द्वारा टीम जी-फोर्स पानी के रिसाव व प्रदूषण को रोकने में अहम भूमिका निभाना चाहते थे। रिसाव, प्रदुषण, प्लास्टीक यह सब मुंबई में काफी बडी समस्या है। पानी की पाइप लाइन में कचरा फंसने और पाइप टूट जाने की वजह से आए दिन लाखों लोगों को तकलीफ उठानी पड़ती है। महानगर पालिका के पास जो तकनीक है वही सिर्फ सीधी पाइपों का ही निरिक्षण कर सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इन बच्चों ने खेल में उपयोग होने वाले लेगो पीस के साथ रोबोटीक्स के मदद से एक छोटी कैमरा युक्त रोबोट कार (वॉटर गीक) का निर्माण किया। इसका प्रदर्शन उन्होंने बीएमसी लीकेज डिपार्टमेंट के श्री सालुंखे और श्री सापेटे के समक्ष भी प्रस्तुत किया।

इस ४.५ इंच के टेक रोवर प्रणाली पर आधारित मशीन को बीएमसी लेपटोप पर कोई भी चला सकता है। इसमें लगे कैमरा द्वारा पूरी पाईप का ३६० डीग्री तक का निरिक्षण किया जा सकता है और साथ ही टेढ़ी पाईप या एंगल पर होने पर भी आसानी से घुमाया जा सकता है। बीएमसी प्लानिंग के प्रमुख श्री शिंदे ने कहा कि हम इस ‘वॉटर गीकÓ द्वारा १३६ वर्ष पुराने भूमिगत पाइप संरचना का पुन: मानचित्र बना सकते है और काफी तकलीफो को दूर किया जा सकता है।

इस नयी सोच और अंतरार्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने वाली टीम जी-फोर्स को शताब्दी गौरव हार्दिक बधाई देता है और उम्मीद करता है कि उनके द्वारा सोची और बनाई गई तकनीक को वास्तव में सरकारी संगठन उपयोग में लाकर लोगों के जीवन को और बहतर बनाएं।