सुधा बरडिया बनी साध्वी संयम साक्षी जी म.सा. हजारों की साक्षी में...

सुधा बरडिया बनी साध्वी संयम साक्षी जी म.सा. हजारों की साक्षी में हुई भव्य दीक्षा

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ब्यावर। महलों में पली, बनके वैरागण चली…. ये प्रसिद्ध लाइनें नगर के जाने माने व्यवसायी ओमजी दवाई वाला बरडिया परिवार की कुलवधु सुधा बरडिया पर सटीक बैठती है। उन्होंने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की। विजयनगर रोड स्थित दादाबाड़ी में 3 दिवसीय भव्य दीक्षा महोत्सव में आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी म.सा. के शिष्य मुनिश्री मनितप्रभसागरजी म.सा. ने भव्य समारोह में मुमुक्ष सुधा बरडिया को जैन धर्म के विधि-विधान के अनुसार मंत्रोच्चार के साथ दीक्षा दिलाई। इससे पूर्व मनिश्री ने ज्यों ही मुमुक्ष सुधा को ओघा (रजोहरण) प्रदान किया सुधाजी ख़ुशी से झूम उठी उसके बाद उनके परिधान बदलने की रस्म व केशलोचन की क्रिया करवाई गई एवं दीक्षार्थी सुधा बरडिया का नया नामकरण साध्वी संयम साक्षीश्री जी म.सा.रखा गया। मुनि श्री द्वारा नाम घोषणा होते ही पूरा पांडाल जयकारों से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के साक्षी बने हजारों श्रावक-श्राविकाओं की आंखे नम हो गई। नमन है ऐसी पुण्य-आत्मा जो अब साध्वी संयम साक्षी बनकर संयम-रथ पर आरूढ़ हो चली है।

ये मार्ग अत्यंत कठिन है इतना कठिन कि गृहस्थ प्राणी के लिए उसका पालन करने की सोचना भी मुश्किल है। जो सुधा कल तक आलीशान महल सरीखे भवन (घर) में पली-बढ़ी जिस घर में विलासिता-ऐश्वर्यता के समस्त साधन जैसे भीषण गर्मी से राहत दिलाते एसी, कूलर पंखे, पहनने के लिए महंगे से महंगे वस्त्र-आभूषण, खाने-पीने के लिए स्वादिष्ट पकवान गर्म-ठंडे पेय पदार्थ, आवागमन के लिए आरामदायक कार, एक्टिवा, सुख-दुख को बांटने के लिए परिजन, रिश्तेदार, सखी-सहेलियां, मनोरंजन हेतू टेलीविजन, मोबाईल, हर जरूरत को पूरी करने के समस्त साधन। संयम-साधना के मार्ग पर ये तमाम सुख-सुविधा मिलना पूर्णतया वर्जित है। अब कैसे रह पायेगी सुधा ये सब सांसारिक गृहस्थ प्राणी के लिए सोचने की बात है। सुधाजी जो अब साध्वी संयम साक्षीजी बन चुकी है उन्हें अपने इस नव मार्ग संयम-पथ पर चलकर जीवन में अब सिर्फ ओर सिर्फ संयम रखना होगा। उन्हें अपने स्वयं के आत्म-कल्याण का सुहाना मार्ग नजर आ चुका है जिस पे चलते जाना है… चलते जाना है… अपना यह जन्म सुधार कर जीवन की अंतिम मंजिल मोक्ष तक पहुंचना है।