नाकोड़ा शुद्ध घी अब बैंगलुरु में

नाकोड़ा शुद्ध घी अब बैंगलुरु में

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जीतो ट्रेड फेयर बैंगलुरु में लगेगा शानदार स्टॉल
मुंबई, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई के बाद सफलता का एक और कदम

मुंबई। मानव अपने जीवन में चाहे कितनी भी आकांक्षाओं को क्यों ना अपनाएं, हवा, पानी और भोजन हमेशा मौलिक जरुरतें रहेंगी। पर आज के मिलवटी वातावरण में न हवा शुद्ध है, ना पानी। भोजन में क्या शुद्ध हे और क्या नहीं, यह भी कौन बता सकता है जो १०० प्रतिशत शुद्ध है और जिसपर लोग आंख मुंदकर भरोसा करते है वो है घी। और वो भी इसलिए क्योंकि इन सभी घरों ने नाकोड़ा घी को अपनाया है। भारतीय के खाने-पीने में घी और तेल की बहुत अहम भूमिका होती है। मौजूद समय में इन वस्तुओं की शुद्धता पर सबसे ज्यादा अंगुली उठाई जाती है। बरसों पहले व्यवसायी केलवचंद जैन और उनके अनुज जगदीशचंद जैन ने संकल्प लिया कि वो अपने देशवासियों के सामने घी-तेल का ऐसा शुद्धतम उत्पाद पेश करेंगे जिससे लोगों की इस बारे में शिकायतें दूर हो जायें। राजस्थान के बूसी गांव से मुंबई के भात बाजार में एक छोटे से व्यापारी के रुप में आए बख्तावरमलजी जैन ने केवलचंद विनोदकुमार कम्पनी स्थापित कर नाकोड़ा घी बाजार में पेश किया। अपनी श्रेष्ठ गुणवत्ता और शुद्धता के दम पर धीरे-धीरे उनके घी की खूशबू लोगों के घरों में फैलने लगी।

जैन समाज से आने वाले इस परिवार को अपने समाज की जरुरतों का पूरा अंदाजा था और उन्होंने जैन समाज के लोगों की इस जरुरत को पूरा करना अपना कर्तव्य समझकर नाकोड़ा घी बाजार में उतारा। शीघ्र ही उनकी कम्पनी ने घी के साथ-साथ शुद्ध तेल का निर्माण भी शुरु कर दिया। और नाकोड़ा उत्पादों को देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाया। केवलचंद और जगदीशचंद के पुत्र रविकुमार जैन,  नमनकुमार जैन एवं रिषभ जैन ने मिलकर कम्पनी को के.बी. प्रोडक्ट्स प्रा. लि. में रुपांतर करके नाकोड़ा उत्पादों को विदेशों तक पहुंचाया।

जैन समाज सहित सभी देशवासियों ने उनके इन दोनों उत्पादों को हाथों हाथ लिया। आज प्रतियोगी बाजार के इस युग में कई उत्पादक घी को सस्ता करने और ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में घी में तेल, चर्बी आदि भी मिला देते हैं और हमारे जैन बंधु और संस्थाएं अनचाहे उनके इस चक्रव्यूह में फंसकर अनजाने में गलत उत्पाद का उपयोग करने को मजबूर हो जाते हैं। लोग ऐसे काले कारोबार और मिलावट खोरी के चक्कर में न फंसे इसलिए हम ज्यादा से ज्यादा जैन परिवारों और संस्थानों तक पहुंचकर उन्हें ऐसे गलत उत्पादों से दूर रहने की सलाह देते हैं। साथ ही हम अपना उच्चस्तरीय उत्पाद (घी-तेल) सबको उचित मूल्य पर उपलब्ध करवाना अपना कर्तव्य समझते हैं। हमारे उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हमने स्वयं के क्वालिटी कंट्रोल के नियम बना रखे है। हमारी खुद की प्रयोगशाला है जिसमें सख्त नियमों से चेक किये बिना हमारा कोई भी उत्पाद पैक नहीं किया जाता। इसी कारण हमारे हर उत्पाद से आप सब पूरी तरह संतुष्ट होते हैं। और नाकोड़ा के उत्पादों का पूरे विश्वास के साथ सेवन कर सकते हैं। सर्वोत्तम गुणवत्ता वाला घी आप तक पहुंचाने के लिए हम बढिय़ा से बढिय़ा क्वालिटी का मख्खन संग्रह करते हैं जो बेहद कड़े गुणवत्ता के नियमों से जांचा जाता है। उस सुथरी, मानव स्पर्श रहित विधि से घी का निर्माण किया जाता है।

हमारा लक्ष्य है कि इस नाकोड़ा घी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और इसके लिए हमने जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन को माध्यम बनाया। चैन्नई में गत फरवरी २०१८ को संपन्न हुए। (ट्रेड फेयर) व्यवसायिक मेले में हमें काफी सफलता मिली। नाकोड़ा घी से बनाई गई मिठाईयों को १ लाख लोगों ने टेस्ट किया। जीतो के द्वारा चेन्नई से पहले हैदराबाद और पुणे में भी नाकोड़ा उत्पादों को बड़ी सफलता मिली। नाकोड़ा घी से बनाई गई राजस्थानी मिठाई, चूरमा, मूंग दाल हलवा, मधुर-मिलन में नाकोड़ा घी का इस्तेमाल किया था जिसे टेस्ट करके प्रत्येक व्यक्ति ने खुशी जाहिर की। हमने ऑनलाइन माध्यम से स्वाद जिन्दगी का नाम से चेन्नई में जीतो ट्रेड फेयर में इसे जोड़ा जिसमें हमें अपार सफलता मिली।

२५ से २७ मई २०१८ को हम जीतो ट्रेड फेयर के माध्यम से अपना उत्पाद (घी-तेल) बैंगलुरु के के लोगों के सामने पेश करने जा रहे है। हमें उम्मीद है कि वहां भी हमारे उत्पादों की धूम रहेगी। बैंगलुरु में हमारे अधिकृत डीलर मेसर्स एम. एम. इंटरप्राइसेस और हुबली में मेसर्स मुथा वागमल भूराजी की देखरेख में यह ट्रेड फेयर होने जा रहा है। बैंगलुरू ट्रेड फेयर में हमारे स्टॉल नंबर ३१,३२,३५ और ३६ है।