टेवाली / Tewali

टेवाली / Tewali

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राजस्थान के पाली जिले में गोडवाड क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. १४ पर मंडली गांव से १८ कि.मी. और जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे क्र. ६७ पर सोमेसर रेलवे स्टेशन से ९ कि.मी. दूर हाईवे पर स्थित है टेवाली गांव। दो टेवाली साथ-साथ है – एक ‘टेवाली’ कला’ व दूसरा टेवाली खुर्द। दोनों का एक ही विशाल तालाब है।

यहां प्राचीन काल में कुंपावत सरदारों व राठौड़ी राजपूतों का राज रहा। करीब ५०० से अधिक वर्ष प्राचीन इस गांव में कभी जैनों के २०-२५ घर थे। अभी कुछ वर्ष पहले तक ७ घर विद्यमान थे। आज भी उन परिवारों के कुछ घर है। बाद में सभी रानी स्टेशन व आसपास रहने चले गये। आज भी गांव के मेन बाजार में प्राचीन धर्मशाला व उससे सटकर गृहमंदिर है, जिसमें धातु ·की  चौवीसी व सिद्धचक्र प्रतिष्ठित थे व लोग पूजा-अर्चना करते थे। ·कालांतर में धातु की चौवीसी व सिद्धचक्र गठ्ठा पास के ४ कि.मी. दूर बुसी स्थित महावीरजी मंदिर में स्थापित किये गये। यहां ·के  श्री अशोक गुगलिया परिवार (सत्कार होटल वाले) पाली में रहते है। मुंबई व बैंगलोर में भी यहां के परिवार रहते है। हाईवे पर होने के कारण आज भी साधु-साध्वीयों का आना जाना रहता है। और देवजी राठौड़ के यहां रुकते है। टेवाली के जैन पाली में ‘रोकडिया जैन; माने जाते थे। ‘मेरी गोडवाड यात्रा’  पुस्तक के अनुसार, टेवाली में ७० वर्ष पूर्व एक  मंदिर था, जिसमें धातु चौवीसी व सिद्धचक्र गठ्ठा स्थापित थे। एक उपाश्रय व जैनों के १५ घर विद्यमान थे। वरकाणा जाजम व गोडवाड का एक  सुंदर गांव है। गांव की कुल आबादी ७०० घरों की है।