सोमेसर / Somesar

सोमेसर / Somesar

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मरूधर की वीर प्रसूता भूमि पाली जिले के गोडवाड क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर पाली रेलवे स्टेशन से ३५ कि.मी. दूर जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे (राज्य राजमार्ग क्र. ६७) पर एक प्रसिद्ध नगर स्थित है सोमेसर। यह रेलवे स्टेशन भी है, इसलिये प्रमुख व्यापारिक केन्द्र है। नगर में पहले डूठारिया निवासी श्री मिश्रीमलजी छाजेड़ ने यहां धर्मशाला बनवाई, जिसकी प्रथम मंजिल के हॉल में १२वें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य स्वामी की पंचधातु प्रतिमा एवं सिद्धचक्र गट्ठा की स्थापना पू. आ. श्री पद्मसूरिजी के हस्ते हुई थी। ३० वर्षों तक यहीं पूजा अर्चना होती रही। सन् २०१० में यहां आ.श्री पद्मसूरिजी का चातुर्मास हुआ, तब डुठारिया वालों को कहकर मंदिर का स्थलांतरण कर श्री जय जिनेन्द्र भवन में श्री गोड़ी जी मंदिर में श्री जय जिनेन्द्र सेवा संघ ट्रस्ट को समर्पित किया गया।

श्री जय जिनेन्द्र सेवा संघ : इस संगठन की स्थापना वीर नि.सं. २५१३, शाके १९०८, वि.सं. २०४३, ज्येष्ठ शुक्ल, जून १९८७ को सेवा संस्कार व संगठन के मद्देनजर ठाणा, मुंबई व आसपास के लगभग ३०० युवाओं ने मिलकर की और प्रथम वर्ष में राजस्थान के भीषण अकाल में राहत पहुंचाकर अपना ध्येय साध्य किया। इस बीच सन् १९९२ में सोमेसर में बूसी निवासी शा.गणेशमलजी वनेचंदजी बोहरा परिवार ने करीब ६ बीघा जमीन संस्था को भेंट दी। सन् १९९२ में श्री जय जिनेन्द्र भवन, सोमेसर का भूमिपूजन व शिलान्यास हुआ तथा सन् १९९४-९५ में इसका विधिवत उद्घाटन मा. श्री लक्ष्मीचंदजी भारतीय के हस्ते संपन्न हुआ। संस्था ने यहीं से बहुउद्देशीय चिकित्सा शिविरों का आयोजन बांगड़ अस्पताल, पाली के अमूल्य सहयोग से प्रारंभ किया। अब तक २२ शिविरों में ६७०० छोटे-बड़े ऑपरेशन कर रोगियों को रोगमुक्त किया गया है और ७० हजार के करीब बाह्यरूग्णों की जॉच कर दवाईयां दी गई है।

श्री गोडी पार्श्वनाथजी मंदिर : भवन के प्रांगण में धर्म-संस्कारों हेतु आरस पत्थर से देवविमान स्वरूप भव्य शिखरबद्ध जिनप्रासाद का निर्माण करवाकर वीर नि.सं. २५२५, शाके १९२०, वि.सं.२०५५, वैशाख सुदि १५ (पूर्णिमा), मई १९९९ को श्वेतवर्णी, २१ इंची, पद्मासनस्थ, २३वें तीर्थंकर, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में गोडी गांव से नाम धारण करने वाले प्रभु श्री गोडी पार्श्वनाथ आदि जिनबिंबों, यक्ष-यक्षिणी, देवी-देवता प्रतिमाओं की अंजनशलाका प्रतिष्ठा, शासन प्रभावक, प्रतिष्ठा शिरोमणी, पू. आ.श्री पद्मसूरिजी आ. ठा. की पावन निश्रा में चतुर्विध संघ के साथ संपन्न हुई। प्रतिवर्ष वैशाख सुदि १५ को शा. बाबूलालजी मोहनलाल भंडारी परिवार ध्वजा चढाते है।

गुरू मंदिर : जिन मंदिर के ठीक सामने भवन प्रांगण में आबु, योगिराज श्री शांतिसूरिजी के गुरू मंदिर का निर्माण, संस्था ने अपने रजत जयंती वर्ष (१९८७-२०१२) यानी २५वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में प्रारंभ करवाया, जो अब पूर्णता की ओर अग्रसर है। जून २०१४ से पहले शायद प्रतिष्ठा होगी।

गौशाला : ई. सन् २००३ में श्री रामनिवासजी उदारामजी परिहार (घांची) परिवार द्वारा करीब ८५ बीघा जमीन, गौशाला निर्माण हेतु संस्था को भेंट में प्राप्त हुई, जिस पर संस्था ने विशाल गौशाला का निर्माण करवाया, जहां आज ५०० पशुओं का पालन-पोषण हो रहा है। गौशाला प्रांगण में ‘सर्वधर्म’ मंदिर का निर्माण श्रीमती स्व. नेकीबाई फतेहचंदजी छाजेड़ परिवार डुठारिया (राज.) निवासी द्वारा करवाया गया। भगवान महावीर स्वामी, दादा जिनदत्तसूरिजी व आ. श्री जिनेन्द्रसूरिजी की दर्शनीय प्रतिमाओं के साथ राम, कृष्ण, अंबिका माता, लक्ष्मी माता, गणेशजी, हनुमानजी की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित की गई। गौशाला जिनमंदिर रथ के रूप में है। सोमेसर से ३ कि.मी. दूर डुठारिया रोड पर गौशाला स्थित है।

मार्गदर्शन : राज्य राजमार्ग नं. ६७ (मेगा हाईवे) पर सोमेसर रेलवे स्टेशन स्थित है। ट्रेन, सरकारी बस, प्रायवेट बस, टैक्सी, ऑटो की सुविधा उपलब्ध है।

सुविधाएं : श्री जय जिनेन्द्र भवन में १० सादा व ५ अटैच कमरे है। एक हॉल (२५ x २५) के साथ ५० बिस्तर के पूरे सेट उपलब्ध है। वृद्धाश्रम, उपाश्रय एवं भोजनशाला की सुंदर व्यवस्था है।

पेढी : श्री जय जिनेन्द्र सेवा संघ

राज्य राजमार्ग नं. ६७, मेगा हाईवे, मु.पो.सोमेसर-३०६५०३, तह.देसुरी, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर् : मुनीमजी परबत सिंहजी – ०२९३४-२४२००५, ०९४१३२७०२६१

अध्यक्ष : श्री बाबूलालजी परमार – ०९८९२९३१०२९, श्री निर्मलजी संचेती – ०९८२०१७५८९१