नांदाणा / Nadana

नांदाणा / Nadana

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गोडवाड की परम प्राचीन तीर्थभूमियों की श्रृंखला में एक नाम और जुड़ता है – श्री नांदाणा जोधान तीर्थ

गोड़वाड़ पंचतीर्थी का प्रवेशद्वार रानी स्टेशन से १५ कि.मी. व प्रसिद्ध वरकाणा तीर्थ से १८ कि.मी. दूर, जवाली जाने वाली मुख्य सड़क पर अरावली पर्वतमाला की एक छोटी सी पहाड़ी की ओट में रानी नदी के किनारे स्थित नांदाणा गांव के मध्य भाग में ऊंची चौकी पर शिखरबद्ध जिनप्रासाद गांव के मध्य भाग में ऊँची चौकी पर शिखरबद्ध जिनप्रासाद में राजगृही के राजा २०वें तीर्थंकर प्रभु श्री मुनिसुव्रत स्वामी की ३१ इंची श्यामवर्णी, पद्मासनस्थ, कलात्मक कोरणी से युक्त परिकर में अलौकिक प्रतिमा प्रतिष्ठित है।

प्राचीनता : इस तीर्थ की प्राचीनता का प्रामाणिक इतिहास तो मिलना दुर्लभ है, लेकिन यहां इसी शिखरबद्ध जिनालय की प्रथम मंजिल पर विराजमान चक्रवर्ती तीर्थंकर प्रभु श्री शांतिनाथजी भगवान की अप्रतिम प्रतिमा अति प्राचीन संप्रतिकालीन मानी जाती है। ७० वर्ष पूर्व यह प्रतिमा यहां मूलनायक के रूप में (मेरी गोडवाड यात्रा) पुस्तक के अनुसार प्रतिष्ठित थी। उन दिनों यहां २ जैन परिवार और एक उपाश्रय था।

श्री आनंदजी कल्याणजी पेढी, अहमदाबाद द्वारा प्रकाशित जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ में एक लेख उद्धत है, जिसके अनुसार श्री संघ द्वारा निर्मित शिखरबद्ध जिनालय में १२वीं शताब्दी (सं.१२००) के लगभग में मूलनायक ९वें तीर्थंकर श्री सुविधिनाथजी प्रतिष्ठित थे। साथ ही पाषाण की एक व धातु की एक प्रतिमा भी स्थापित थी। इस समय यहां जैनों के पांच परिवार रहते थे। शा. रूपचंदजी मोतीलालजी ओसवाल यहां की देखरेख करते थे। लेकिन प्रकृति के प्रकोपवश अथवा अन्य किसी वजह से यह स्थान शनै:-शनै: वीरान सा हो गया। आबादी के लिहाज से आज भी यहां करीब १२००-१२५० की अजैन जनसंख्या है। बीचकाल में श्री सुविधिनाथजी की प्रतिमा क्यों बदली गई और श्री शांतिनाथजी की प्रतिमा क्यों और कब प्रतिष्ठित की गई, इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता। २१ वीं शताब्दी के प्रांरभ में, यहां का पुन: जीर्णोद्धार, युगवीर, पंजाब केसरी, गोडवाड उद्धारक आ.श्री वल्लभसूरिजी के समुदायवर्ती मुनिभूषण, मरूधर रत्न श्री वल्लभदत्त विजयजी (फक्कड़ महाराज) की सद्प्रेरणा से प्रारंभ हुआ। इस धरा के प्रबल पुण्योदय से आचार्य प्रवर श्री कैलाशसागरसूरीश्वरजी म.सा. व साध्वी श्री कुसुमश्रीजी के सदुपदेश से चाणस्मा निवासी चिमनलालजी बाबुलालजी सुपुत्र श्री मंछालालजी ने श्री मुनिसुव्रतस्वामीजी की यह प्रतिमा इस तीर्थ को सहर्ष भेंट कर पुण्य उपार्जन किया। इस प्रतिमा की अंजनशलाका वीर नि. सं. २४९५ व वि.सं. २०२५ माघ वदि ७ को आ. श्री बुद्धसागरसूरिजी के पट्टधर आ. श्री कैलाशसागरसूरिजी व आ. श्री सुबोधसागरसूरिजी के हस्ते संपन्न हुई है।

सं. २०२८ में जीर्णोद्धार का कार्य संपन्न होने पर वीर नि.सं. २४९८, शाके १८९३, वि.सं. २०२८ के ज्येष्ठ शुक्ल १०, गुरूवार, जून १९७२ को रवियोग में जीर्णोद्धार कृत प्राचीन जिनप्रासाद में, नूतन मूलनायक श्री मुनिसुव्रत स्वामी आदि प्रमुख जिनबिंबों, प्राचीन मूलनायक श्री शांतिनाथजी (प्रथम मंजिल), श्री यक्ष-यक्षिणी, श्री मणिभद्रवीर, चक्रेश्वरी देवी इत्यादी की महामहोत्सवपूर्वक, साहित्य सम्राट, मरूधर देशोद्धारक, राजस्थान दीपक आ.श्री सुशीलसुरिजी, पंन्यास प्रवर मु. श्री चंदनविजयजी, पंन्यास प्रवर मु.श्री विनोदविजयजी आ.ठा. व चतुर्विध संघ की विशाल उपस्थिति में प्रतिष्ठा संपन्न हुई। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शु. १० को कायमी ध्वजा के लाभार्थी कीरवा निवासी (मुंबई) शा. सूरजमलजी फौजमलजी टीकमजी बाफना परिवार ध्वजा चढाते है और मेला लगता है।

विशिष्टता : इस तीर्थ की प्राचीनता के साथ-साथ यहां विराजमान मनमोहक विशाल प्रभु प्रतिमा की कलात्मकता यहां की प्रमुख विशेषता है। यहां का वातावरण प्राकृतिक रूप से निर्मल, शांत और शुद्ध है। यहां आने से प्रभु दर्शन से आत्मा को बेहद आनंद मिलता है और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। संपूर्ण गोडवाड क्षेत्र में, श्री मुनिसुव्रत स्वामी का एकमात्र यही प्राचीन तीर्थस्थल है।

ग्राम पंचायत नंदाणा में १०वीं तक विद्यालय, स्वास्थ्य केन्द्र, ढारीया बांध से सिंचाई, पुलिस थाना रानी, चामुंडा माताजी का मंदिर, हास्पीटल जवाली में आदि की सुविधा है। यहां से नजदीक का बड़ा शहर रानी है।

मार्गदर्शन : अहमदाबाद-अजमेर रेलवे लाईन पर स्थित रेलवे स्टेशन रानी से १२ कि.मी., भगवानपुरा से ८ कि.मी. जवाली से ८ कि.मी. और प्रसिद्ध वरकाणा तीर्थ से २० कि.मी दूर स्थित, नांदाणा तीर्थ जाने हेतु प्रायवेट बस, टैक्सी और ऑटो की सुविधा उपलब्ध है।

व्यवस्था : वर्तमान में इस तीर्थ का देखरेख यहां के निकटवर्ती ६ गांवों अर्थात बिजोवा, खौड, चाचोड़ी, रानीगांव, जवाली व किरवा जैन संघों से निर्वाचित प्रतिनिधि करते है। तीर्थ संबंधी विस्तृत जानकारी श्री सुभाषजी जगावत (बिजोवा) ने प्रेषित की।

सुविधाएं : मंदिर के निकट ही आधुनिक सुविधायुक्त धर्मशाला व भोजनशाला का निर्माण हुआ है। भोजनशाला व भाते की सुंदर व्यवस्था है। धर्मशाला में एक हॉल, २ सादा कमरे, ४ अटैच कमरे व १५० लोगों हेतु बिसतर के पूरे सेट उपलब्ध है। ३०-३० टेबल-कुर्सी और १००० लोगों हेतु बर्तन के पूरे सेट है। किराना, सब्जी मंडी रानी में है।

पेढी : श्री मुनिसुव्रतस्वामी जैन देवस्थान पेढी

मु. नांदाणा (जोधान), पोस्ट-नांदाणा भाटान-३०६११९

रानी रोड, तह.रानी, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर्क : ०२९३४-२८११३७

मो. ०८६९६४५९८०६, ०९४६२१९७४००

मुनीमजी : श्री मानमलजी – ०९००१०७५६३३

पुजारी : नंदकिशोर  – ०९८८४२००२३०

ट्रस्टी : श्री पारसजी संचेती, खौड – ०९८२०९३०१६६

श्री सुभाषजी जगावत बिजोवा  – ०९८२०१५७४४४