मगरतलाव / Magartalav

मगरतलाव / Magartalav

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राजस्थान के पाली जिले में देसुरी-फुलाद मुख्य सड़क पर देसुरी से २१ कि.मी., मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से ५५ कि.मी. और रानी-फालना से ५५ कि.मी. दूर स्थित है मगरतलाव नगर।

मगरतलाव नगर वि.सं. १७०७ में स्थापित हुआ, ऐसा कहा और माना जाता है। एक अन्य मान्यतानुसार यह गांव सं. १५३७ में बसा हुआ है। इसके आसपास पहले जंगल एवं पहाड़ी इलाका था और पास में ही एक बड़े तालाब में विपुल मात्रा में मगरमच्छ थे। तालाब मे बारहों महीना पानी भरा रहता था। स्थानीय लोगों एवं शिकारियों द्वारा, सभी मगरमच्छ मार दिये गये। पहले गांव छोटी सी ढाणी के रूप में था, लेकिन धीरे-धीरे विकसित होता गया और गांव का नाम मगरमच्छ व तालाब को लेकर मगरतलाव पड़ा।

नगर में सभी जाति धर्मो के लोग आपसी सामंजस्य से रहते है। वर्तमान में ७२ जैनों के घर है एवं गांव की कुल जनसंख्या १५०० के करीब है। बरसों पहले नगरवासी मूलनायक श्री शांतिनाथ स्वामी, श्री आदेश्वरजी एवं श्री महावीर स्वामी के त्रिगडे को घर मंदिर में स्थापित करके पूजा-अर्चना करने लगे। कालांतर में सभी के दिल में शिखरबद्ध जिनालय निर्माण की भावना जागी। आपसी तालमेल से वर्तमान मंदिर की जगह निश्चित करके क्रय कर ली गई। भूमि का शुद्धीकरण करके आचार्य प्रवर नाकोडा तीर्थोद्धारक श्री हिमाचलसूरिजी के वरद हस्ते भूमिपूजन, खनन विधि व शिलान्यास का कार्यक्रम संपन्न करवाकर, मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढा।

नगरवासियों के अथक प्रयास से ऊँची चौकी पर दो गजराजों से शोभित प्रवेशद्वार कलात्मक और शिखरबद्ध जिनप्रासाद में वीर नि. सं. २५०३, शाके १८९८, वि.सं.२०३३, वैशाख सुदि १३, रविवार, मई १९७७  को आ. श्री जिनेन्द्रसुरिजी व पट्टधर आ. श्री पद्मसूरिजी आ.ठा. की पावन निश्रा में महोत्सवपूर्वक प्राचीन मूलनायक नूतन परिकर में श्री शांतिनाथ प्रभु सह सभी प्राचीन प्रतिमाएं पुन: स्थापित की गई। प्रतिष्ठा में धन की विपुलता के साथ ट्रस्टियों ने मंदिर को और अधिक शोभायमान बनाने हेतु, उत्तम कांच का मीनाकारी युक्त काम संपन्न कराया। ‘जैन तीर्थ सर्वसंग्रह’ ग्रंथ के अनुसार, वि.सं १९४९ में श्री संघ ने घर देरासर में पाश्र्वनाथ प्रभु एवं धातु की एक प्रतिमा (चौबीसी) स्थापित करवाई थी। पहले यहां ७२ जैनी और एक उपाश्रय था। नगर के बुजुर्गो का भी यही कहना है।

मूलनायक प्रतिमा लेख के अनुसार इन प्राचीन तीनों प्रतिमाओं की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वीर सं. २०१८, वैशाख सुदि ४ सोमवार, मई १९६२ को, राजनगरे-हठीभाई वाटिकाया आ. श्री प्रेमसूरिजी एवं शिष्य-प्रशिष्य की उपस्थिति (निश्रा) में हुई है। प्रतिमा भरवाने के लाभार्थी श्रेष्ठि श्री रतिलाल नाथालाल परिवार है। समय के साथ जिनमंदिर में, आ. श्री पद्मसूरिजी की प्रेरणा से, ५वें तीर्थंकर साचादेव श्री सुमतिनाथ और ७वें तीर्थंकर श्री सुपार्श्वनाथजी नूतन जिनबिंबों की भव्य अंजनशलाका प्रतिष्ठा, महोत्सव वीर नि.सं. २५३४, शाके १९२९ वि.सं. २०६४, वैशाख वदि द्वि.७, सोमवार को, दि. २८ अप्रैल २००८ के शुभ दिन मंगल मुहूर्त में, पू. आ.श्री पद्मसूरिजी, पू.आ.श्री विश्वचंद्रसूरिजी आ.ठाणा पू. साध्वी श्री गरिमाश्रीजी की शिष्या, सा. श्री वल्लभश्रीजी एवं सा. श्री ज्येष्ठप्रभाश्रीजी आ. ठा. सह चतुर्विध संघ के साथ पंचाह्निका महोत्सव से संपन्न हुई। तेरापंथी आ. श्री तुलसीजी, आ. महाश्रमणजी आदि गुरू भगवंत अनेक बार यहां पधारे। अहिंसा यात्रा के दरमियान स्थित वास भी किया था। कई आचार्य एवं साधु-साध्वीयों के चातुर्मास में ज्ञान की गंगा अवतरित हुई है। गोडवाड बांकली रत्न आ. श्री विश्वचंद्रसूरिजी को गोडवाड दीप तपस्वी रत्न उपाधि से अलंकृत करने का सौभाग्य नगरवासियों को प्राप्त हुआ। इसी कड़ी में पंचाह्निका महोत्सव से पू.मु. श्री मंगलविजयजी एवं मु.श्री दिव्यचंद्र वि. को पंन्यास पदवी’ से नवाजा गया।

यहां पिछले १६ वर्षों से निरंतर प्रतिवर्ष स्नेह सम्मेलन होता है। सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय स्वरूप गांव में स्कूल, हॉस्पीटल, पशु चिकित्सालय, डाकघर, प्याऊ आदि जैन संघ के भाईयों द्वारा निर्माण करवाकर गांव को अर्पण किये गये, जो अनुमोदनीय है। कोलार बांध से सिंचाई होती है। पुलिस चौकी मगरतलाव और पुलिस थाना खिंवाडा में है। कालका माता, हनुमानजी, चामुंडा माता, महादेवजी, रामदेवजी आदि १२ अजैन मंदिर है।

गांव की विस्तृत जानकारी श्री सुकनजी परमार ने प्रदान की, धन्यवाद!

मार्गदर्शन : यह मारवाड़ जंक्षन रेलवे स्टेशन से ५५ कि.मी., सोजत रोड स्टेशन से ५५ कि.मी., रानी व फालना रेलवे स्टेशन से ५५ कि.मी., उदयपुर हवाई अड्डे से १२० कि.मी., सिरियारी से ४० कि.मी., फुलाद स्टेशन से ३२ कि.मी., देसुरी से २१ कि.मी., जोजावर से २० कि.मी., खिंवाडा से १७ कि.मी. और बागोल से ५ कि.मी की दूरी पर स्थित है। यहां के लिये सरकारी बस, टैक्सी, ऑटों के साधन प्राप्त होते है।

सुविधाएं : जिनेन्द्र आराधना भवन धर्मशाला में २ कमरे और एक हॉल की सुविधा, उत्तम भोजनशाला की व्यवस्था, उपाश्रय आदि है।

पेढी : श्री शांतिनाथ जैन देरासर पेढी

देसुरी-जोजावर रोड, हनुमान चौक

मु.पो. मगरतलाव-३०६५०२, तहसील-देसुरी, जिला-पाली, राजस्थान।

पेढी संपर् : पुजारी व मुनीम : श्री इंदजीत रावल – ०९९८२१६८५०६

ट्रस्टी-अध्यक्ष : श्री सुकनजी छाजेड़ (थाना) ०९९६७४६०२०६, श्री सुकन जी. परमार – ०९८२५६०३३१