गुड़ा रामजी (राणाजी की देवली) / Guda Ramji

गुड़ा रामजी (राणाजी की देवली) / Guda Ramji

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वीर प्रसूता मरूधर के पाली जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.१४ एवं मंडली से जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे क्र. ६७ पर वाया सोमेसर रेलवे स्टेशन व नाडोल से वाया खारला १५ कि.मी. एवं वाया निपल १४ कि.मी. तथा सोमेसर रेलवे स्टेशन से वाया खारला-जीवनकलां होकर २५ कि.मी. दूर सुमेरू नदी के तट पर अरावली पर्वतमाला की गोद में एक प्यारा सा गांव बसा है-गुड़ा रामाजी’ अर्थात रामाजी ा गुड़ा

नगर काफी प्राचीन है। रामाजी का गुड़ा गांव की स्थापना वि. सं. १७६७ में ठाकुर साहेब श्री रामसिंहजी मेड़तिया राठौड़ द्वारा हुई थी, इसलिये गांव का नाम श्री रामसिंहजी के नाम पर रामाजी ा गुड़ा पड़ा। धीरे-धीरे जैन परिवार यहां आकर बसने लगे, जिन्होंने परमात्मा भक्ति हेतु जिन मंदिर के निर्माण की सोची।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह  ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने बाजार में घुमटबंद जिन मंदिर सह पाषाण की २ और धातु की ८ प्रतिमाएं स्थापित करवाई। पूर्व में यहां १२० जैन, एक उपाश्रय, एक धर्मशाला थी। मेरी गोडवाड यात्रा’ पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पूर्व एक जैन मंदिर में धातु की चौवीसी व सिद्धचक्र का गट्टा प्रतिष्ठित था तथा उन दिनों यहां १२ जैन घर विद्यमान थे।

श्री संघ द्वारा वि. सं. १९९५ में मंदिर का निमार्ण कार्य प्रारंभ हुआ, मगर उसकी गति धीमी रही। श्री संघ को समय-समय पर गोडवाड रत्न पू. आ. श्री जिनेन्द्रसुरिजी व उनके पट्टधर पू. आ. श्री पद्मसूरिजी की प्रेरणा व मार्गदर्शन मिलता रहा। मंदिर में स्थापित करने हेतु, मूलनायक श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की श्यामवर्णी भव्य प्रतिमा वि. सं. २०३९, भानुवासरे (रविवार) को बिसलपुर में अंजनशलाका की हुई प्रतिमा को लाया गया।

वि.सं. २०४६, वैशाख वदि १०, सोमवार दि. १ मई १९८९ को प्रात: जालोर-नंदीश्वरद्वीप मंदिर से लाये हुए प्राचीन श्री समुतिनाथ प्रभु जिनमूर्ति का मंगल प्रवेश व प्रतिष्ठा हेतु पू. आ. श्री सुशीलसूरिजी आ. ठा. का नगर प्रवेश के साथ १३ महोत्सव का प्रारंभ हुआ।

वीर नि. सं. २५१६, शाके १९११, वि.सं. २०४६, वैशाख सुदि ६, गुरूवार, दि. ११ मई १९८९ करे प्रात: शुभ मुहूर्त में मूलनायक श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु की श्यामवर्णी पद्मासनस्थ प्रतिमा और साथ में दायें-बाएं श्री आदिनाथ व श्री शांतिनाथजी, रंगमंडप में प्राचीन मूलनायक श्री वासुपूज्य स्वामी, जालोर से लाये श्री सुमतिनाथ आदि जिनबिंब, श्री पार्श्व यक्ष, श्री पद्मावती माता, श्री नाकोडा भैरवदेव, श्री चक्रेश्वरी आदि प्रतिमाएं तथा शिखरोपरि स्वर्णकलश, दण्ड-ध्वजारोहण प्रतिष्ठा शिरोमणि पू. आ. श्री सुशीलसूरिजी आ.ठा. ६, पू.सा.श्री ललितप्रभाश्रीजी (लेहरो म.सा.) आ. ठा. २१ सह चतुर्विध संघ की उपस्थिति में महामहोत्सवपूर्वक प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

मूलनायक के पास में श्री आदेश्वर भगवान की अंजनशलाका वि. सं. २००६, मागसर सुदि ६, शुक्रवार को बाली प्रतिष्ठोत्सव पर हुई है। प्रभु के परिकर पर वीराब्द २५३१, वि.सं.२०६१, माघ शुक्ल ५, रविवार का लेख अंकित है।

पुन: प्रतिष्ठा : वीर नि.सं. २५३२, शाके १९२७, वि.सं.२०६२ के वैशाख सुदि ६, बुधवार दि. ३ मई २००६ को पूर्व प्रतिष्ठित भगवान श्री वासुपूज्यस्वामीजी, श्री सुमतिनाथ, यक्ष-यक्षिणी, देवी-देवताओं की पुन: स्थापना, ध्यानयोगी पू. आ. श्री हिरण्यप्रभसूरिजी आ. ठा. ४ सह चतुर्विध संघ की उपस्थिति में संपन्न हुई। इस मुहूर्त में नवनिर्मित जैन न्याति नोहरा’ का भव्य उदघाटन तथा शुभ बेला में ध्वजारोहण हुआ। प्रतिवर्ष ध्वजा वै. सु. ६ को शा. देवराजजी किस्तूरचंदजी सोनीगरा परिवार चढाते है।

मार्गदर्शन : रामाजी का गुड़ा सोमेसर रेलवे स्टेशन से वाया खारला होकर २५ कि.मी. और मेगा हाईवे से मात्र ९ कि.मी. दूर है। हाईवे तक सरकारी बस और आगे प्रायवेट बस, टैक्सी एवं ऑटों रिक्शा के साधन प्राप्त होते है।

सुविधाएं : नवनिर्मित सुंदर व विशाल न्याति नोहरा में सभी सुविधाएं उपलब्ध है।

पेढी : श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वे. संघ

मु. रामाजी का गुड़ा, पो.घेनडी-३०६५०२, तह.देसुरी, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर् : ०२९३४-२४३०९१.

ट्रस्टी : श्री प्रकाशजी सोनिगरा – ०९३२६१९९९९५, श्री रविन्द्र हिंगड़ – ०९८२१४२७५२७