गुड़ा लास (लास रा गुड़ा) / Guda Las

गुड़ा लास (लास रा गुड़ा) / Guda Las

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गोड़वाड़ पंचतीर्थी का प्रवेशद्वार रानी स्टेशन से वाया रमणीया गांव १४ कि.मी., खिमेल स्टेशन से वाया धणी १३ कि.मी. और फालना से वाया खुडाला धणी १४ कि.मी. दूर हिंगलाज पहाड़ी के पास बसा हुआ है गुड़ा लास

पहले यह गांव हिंगलाज पहाड़ी की तलहटी में बसा हुआ था। पहाड़ का पानी कच्चे घरों में नुकसान पहुंचाता था। इसके कारण धीरे-धीरे गांव वर्तमान जगह पर बसता गया। मुख्य बाजार के चौहटे में शिखरबंध छोटे से जिनमंदिर में २३वें तीर्थंकर मूलनायक श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ प्रभु की श्यामवर्णी २१ इंची प्रतिमा पद्मासनस्थ मूल गंभारे में स्थित है। साथ ही मुनि सुव्रत स्वामी, श्री सुपार्श्वनाथजी, श्री नेमिनाथजी एवं पूर्व के प्राचीन मूलनायक श्री आदेश्वर भगवान गंभारे के बाहर प्रदक्षिणा में विराजमान है एवं मां पद्मावती तथा पार्श्वयक्ष की मूर्तिया भी स्थापित है।

प्रथम इस तीर्थ में वरकाणा तीर्थ पर हुई ६०० जिनबिंबों की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वि.सं. १९५१, माघ सुदि ५ को भट्टारक श्री राजसूरिजी के हाथों संपन्न हुई थी। उन्हीं प्रतिमाओं में से मूलनायक के रूप में श्री आदेश्वर प्रभु की प्रतिष्ठा सं. १९५१ में हुई। कारणवश वीर नि. सं. २४४५, शाके १८४०, वि.सं.१९७५, माघ शुक्ल ५, बुधवार को, बोता के तपागच्छ श्री गुरो साहब श्री लब्सिागरजी (यति) के वरद हस्ते लास रा गुडा नगर में राज जोधपुरराव राजाजी श्री हरिसिंहजी राज्ये प्राचीन शिलालेख मंदिरजी में लगा हुआ है। श्री प्रकाशजी हस्तीमलजी ध्वजा चढाते है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रहग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने वि.सं. १९४० में शिखरबद्ध मंदिर का निर्माण करवाकर मूलनायक  श्री पार्श्वनाथजी सह पाषाण की ४ और धातु की एक प्रतिमा स्थापित हुई तब इस मंदिर का वहिवट श्री गणेशमलजी गुलाबचंदजी ढालावत करते थे। प्रतिमा का लेख सं. १९५१ का है। ४ जैन परिवार थे। एक धर्मशाला थी। वर्तमान में एक भी घर जैनों का नहीं है। मंदिर में लगे नूतन शिलालेख के अनुसार, श्री वरकाणा तीर्थ पेढी ने तीर्थ का जीर्णोद्धार करवाकर वीर नि.सं. २५१९, शाके १९१४, वि.सं. २०४९, वल्लभ सं. ३८ के मागसर शुक्ल १०, शुक्रवार, दि. ४.१२.१९९३ को वल्लभ समुदायवर्ती पंन्यास प्रवर श्री वीरेन्द्रविजयजी (वर्तमान में आचार्य श्री) आ. ठा. व साध्वीश्री कमलप्रभाश्रीजी की शिष्याएं सह चतुर्विध संघ की उपस्थिति में मूलनायक श्री चिंतामणि पार्श्वनाथादि जिनबिंबों की पुन: प्रतिष्ठा संपन्न हुई। हिंगलाज पर्वत की गोद में स्थित तीर्थ की प्राकृतिक छटा अनुपम है। पहले यहां सोनिगरा राजपूतों के परिवार थे। इसी गोत्र का पहले शासन रहा उन दिनों यहां जैनों के ६० घर थे।

भाखर (पहाड़ी) पर प्रसिद्ध हिंगलाज माता का मंदिर है। उपर ढोलियाजी का मंदिर व नीचे तलहटी में काटवाजी मंदिर (घोडा वाला महादेवजी) हैं। साथ ही तीरथ वेरी (कुंआ) महादेवजी का है, जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि इसके चमत्कारी पानी से त्वचा रोग ठीक हो जाते है। अजैन गांववालों से कई पुरानी बातें सुननें समझने को मिली। गुडा लास के भाखर में पांडवों द्वारा तपस्या करने का उल्लेख मिलता है। यहां मेणा जाति के लोग आसपास चोरियां करके इस पर्वत में छुप जाते थे। उस समय यह परिसर सुनसान रहा।

हिंगलाज माता, गुड़ा लास : लार्ड विलियम बैटिक के समय में धणी ग्राम में हिंगलाज माता की गुफा (मंदिर) के आसपास पिडारियों में मुंह छिपाया था, जिन्हें कर्नल स्लीमैन ने पराजित किया था। यह मंदिर गुडा लास की भाखरी-धणी पर पिंडारियों द्वारा निर्मित किया गया है। हिंगलाज माता की मूर्ति गुफा के भीतर उपरी भाग में एक पाषाण खंड में निर्मित की गई है। हिंगलाज का मूल स्थान बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में हिंगोल नदी के पास है। शिवपुराण में वर्णित ५२ शक्तिपीठों में सर्वप्रथम स्थान हिंगलाज माता का है।

वर्तमान में माता हिंगलाज २५ डिग्री उत्तरी अक्षांश और २३ डिग्री पूर्वी देशांतर पर दांतीवाड़ा गुड़ा लास के पर्वतीय शिखर बीच में विराजमान है। प्रागट्य एक हजार पांच सौ वर्षों से अटूट ज्योति गर्भा केसर आशीर्वाद के रूप में प्रागट्य है।

गांव की कुल जनसंख्या २००० है। उमठी बांध व बामणिया बांध से सिंचाई होती है। श्री चारभुजाजी, महादेवजी, आई माताजी और रामदेवजी के अन्य मंदिर है।

मार्गदर्शन : गोडवाड के प्रवेशद्वार फालना रेलवे स्टेशन से वाया खुडाला होकर १३ कि.मी. पर तीर्थ स्थित है। यहां आवागमन के लिये रानी, फालना, खुडाला और बाली से प्रायवेट बस, टैक्सी और ऑटों के साधन मिलते है। वरकाणा तीर्थ यहां से १५ कि.मी. दूर स्थित है।

सुविधाएं : मंदिर के पास ही धर्मशाला और उपाश्रय बने है। भोजनशाला नहीं है। ३ कि.मी. दूर रमणीया तीर्थ पर ठहरने हेतु सुंदर धर्मशाला और उत्तम भोजनशाला की व्यवस्था है। यहां की संपूर्ण व्यवस्था :- श्री वराणा तीर्थ पेढी संभालती है।

पेढी : श्री जैन स्थान देव पेढी

चौधरियों का वास, मु.पो. गुडा लास, तहसील-बाली, जिला-पाली, राजस्थान

पुजारी : श्री नेमिचंदजी – ०९४६०८७१९२१, ०९९२८२९११४४