घेनड़ी / Ghendi

घेनड़ी / Ghendi

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राजस्थान की पुण्य धरा पर पाली जिले में जोधपुर-उदयपुर (मेगा हाईवे) राज्य महामार्ग नं. ६७ पर स्थित सोमेसर रेलवे स्टेशन से २२ कि.मी. एवं डुठारिया के बाद हाईवे पर खिंवाड़ा मोड़ से १० कि.मी. दूर खिंवाड़ा जाने वाली सड़क पर अरावली पर्वत माला की गोद में सुमेरू नदी के किनारे एक छोटा सा गांव बसा है घेनड़ी

यहां की प्राचीनता के कोई विशेष प्रमाण तो प्राप्त नहीं होते, पर नगरजनों के अनुसार, गांव घेनड़ी ८०० वर्ष पहले खेड़ादेवी मंदिर के पास बसा हुआ था। तब यहां नाडोल के शासकों का राज था। उस समय जैनों के कुल १५ घर थे। किसी कारणवश धीरे-धीरे सभी वर्तमान जगह पर आकर बसने लगे। वर्तमान में २२ घर औली (हौती) है। पूर्व में यहां मेथी की बड़ी मात्रा में खेती होती थी। यहां की जग प्रसिद्ध मेथी दूर-दूर तक बिकती थी। एक कि.मी. दूर घेनणी ढाणी के पास आज भी खेड़ादेवी का मंदिर विद्यमान है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह’ के अनुसार श्री संघ घेनड़ी ने मुख्य बाजार में घुमटबंद मंदिर का वि.सं. १९६८, वीर नि.सं. २४३८, शाके १८३३ में निर्माण करवाकर मूलनायक  श्री शांतिनाथजी प्रभु सह धातु की एक प्रतिमा स्थापित करवाई। पूर्व में यहां ४० जैनी, एक उपाश्रय और एक धर्मशाला थी। वर्तमान में भी मंदिर घुमटबंध ही है।

अतीत से वर्तमान त : गांव वालों के अनुसार, ६० वर्ष पहले श्री संघ ने धातु की चौवीसी तथा सिद्धचक्र गट्ठा स्थापित कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की थी। गांव में साधु-साध्वीयों का आवागमन बना रहता था। उनसे बार-बार प्रेरणा पाकर, एक छोटा सा घुमटबंध जिनालय का निर्माण करवाकर, वीर नि.सं. २४८०, शाके १८७५, वि.सं.२०१० में महा सुदि ६, फरवरी १९५४ में आ.श्री हिमाचलसूरिजी की प्रेरणा से नाडोल के यतिजी द्वारा विधि-विधान से प्रतिष्ठा करवाई गई। मूलनायक श्वेतवर्णी, ११ इंची, पद्मासनस्थ श्री शांतिनाथ प्रतिष्ठित हुए।

प्रतिष्ठा के समय भारी बारिश की संभावना बनी, ऐसे में यतिजी ने मंदिर में ऊपर जाकर अभिमंत्रित बाकुले (पांच प्रकार का अनाज) फेंके, जिससे बरसाती बादल बिखर गये और देसुरी जाकर बरसे। देसुरी व घेनड़ी की प्रतिष्ठा एक दिन संपन्न हुई थी। प्रतिवर्ष महासुदि ६ को शा. वोरीलालजी मानमलजी खिवेसरा परिवार ध्वजा चढाते है। मेरी गोडवाड यात्रा’  पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पहले मूलनायक श्री शांतिनाथ प्रभु का एक मंदिर, धातु की चौवीसी, एक उपाश्रय और ओसवालों के ९ घर विद्यमान थे। वर्तमान में प्रभु की ३ प्रतिमाएं एवं देवी-देवताओं की ५ प्रतिमाएं प्रतिष्ठित है।

संयम पथ : श्रेष्ठि श्री गुलाबचंदजी सोनीमलिया की सुपुत्री जेठीबाई का १४ वर्ष की आयु में देवली पाबुजी के निवासी श्री जीवराजजी पुखराजजी पुनमिया के साथ विवाह हुआ, मगर एक वर्ष बाद ही विधवा हो गई। आपने धर्म से नाता जोड़तें हुए आ. श्री हिमाचलसूरिजी समुदाय के मु.श्री भव्यानंद विजयजी एवं वरिष्ठ सा. श्री गरिमाश्रीजी के पास पीहर घेनड़ी में महोत्सवपूर्व दीक्षा ग्रहण की एवं आपका नामकरण सा. श्री ज्येष्ठप्रभाश्रीजी रखा गया। आपने दानों कुलों के साथ नगरों का नाम रोशन किया।

५७वीं वर्षगांठ एवं प्रतिष्ठा : श्री शांतिनाथ मंदिरजी की ५७वीं वर्षगांठ व अधिष्ठायक श्री मणिभद्रवीर, श्री चक्रेश्वरी देवी प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा व लघुशांति स्नात्र महापूजन, वीर नि. २५३७, शाके १९३२, वि.सं. २०६७, महा सुदि ६, बुधवार, दि. ९.२.२०११ को, ५७वीं वर्षगांठ ध्वजारोहण एवं महा सुदि ७, गुरूवार, दि. १०.२.२०११ को प्रतिष्ठा पू.मु.श्री मोहनलालजी म.सा. के प्रशिष्य पट्टधर पू.आ.श्री मुक्तिप्रभसूरिजी एवं पू. उपाध्याय श्री डॉ. विनितप्रभ मुनिजी म.सा.आ.ठा. व साध्वीजी श्री गरिमाश्रीजी की सुशिष्या सा. श्री वल्लभश्रीजी, घेनड़ी गांव की साध्वीरत्ना सा. श्री ज्येष्ठप्रभाश्रीजी (जेठी म.सा.) आ. ठा. की पावन निश्रा में सुसंपन्न हुई।

घेनड़ी नगर : घेनड़ी के रिवाज अनुसार, राजपुरोहित समुदाय (रावला) गांव के दरवाजे से पैदल चलकर जाते है। गाड़ी या साईकिल पर बैठकर अंदर नहीं जाते। गांव में खेड़ादेवी के अलावा ६ हिंदू मंदिर है। उच्च माध्यमिक विद्यालय, बंगाली डॉक्टर (प्रायवेट), केसुली बांध से सिंचाई, पुलिस थाना खिवाड़ा, दूरसंचार, डाकघर तथा ग्राम पंचायत घेनड़ी में कुल ५००० की जनसंख्या है। गांव में एक प्राचीन सुंदर बावड़ी है।

मार्गदर्शन : मेगा हाईवे नं. ६७ पर सोमेसर रेलवे स्टेशन से २२ कि.मी. और हाईवे पर मोड़ से १० कि.मी., नाडोल से १५ कि.मी., खिवाड़ा से ७ कि.मी. और मारवाड़ जंक्शन से ४५ कि.मी. तथा जोधपुर हवाई अड्डे से १३० कि.मी. दूर स्थित घेनड़ी हेतु बस, टैक्सी और ऑटों की सुविधा उपलब्ध है।

सुविधाएं : छोटी सी धर्मशाला में ३ कमरें है। उपाश्रय तथा संघ हेतु अलग (६०x३०) रसोडा है। भोजनशाला नहीं है।

पेढी : श्री शांतिनाथ जैन देवस्थान

पाली-देसुरी रोड, गोल चौतरा, मु.पो.घेनड़ी-३०६५०२, वाया-सोमेसर, तह-रानी, जिला-पाली, राजस्थान, पेढी संपर्क : ०२९३४-२४३०४५, श्री प्रेमराजजी, मुंबई-०९८२०३५३५९६