डेण्डा / Denda

डेण्डा / Denda

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गोडवाड के जैन मंदिर अपनी उत्कृष्ट स्थापत्य और शिल्पकला के कारण पवित्र भावनाओं को जगाने वाले है। शहरों की चकाचौंध और कोलाहल से दूर शांत और एकांत स्थानों पर विद्यमान अनेक जैन मंदिर अपना एक विशिष्ट महत्व लिये हुए है। इन्हीं में से एक है गोडवाड क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर गुंदोज चौराहा से ९ कि.मी. तथा पाली रेलवे स्टेशन से वाया मंडली १८ कि.मी. दूर मनकडी नदी के किनारे डेण्डा गांव बसा है, जिसे गांववासी ५०० वर्ष प्राचीन मानते है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री संघ ने मुख्य बाजार में, शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर वि.सं. १८५८ में मूलनायक श्री शांतिनाथजी की प्रतिमा सह पाषाण की ३ और धातु की एक प्रतिमा  की प्रतिष्ठा करवाई। पहले यहां १२५ जैन घर व धर्मशाला थी। मंदिर में लगे एक प्राचीन शिलालेख से इसकी पुष्टि होती है। यद्यपि संवत् १८५८, फाल्गुन सुदि… बस इतना ही पढने में आता है, तथापि इससे प्राचीनता तो स्पष्ट होती है। पहले मूलनायक श्री शांतिनाथजी थे और वर्तमान में श्री आदिनाथजी है। सं. १८५८ से सं. २०४१ के बीच किसी जीणोद्धार के समय किसी कारणवश मूलनायकजी को बदला गया होगा।

प्राचीन और जीर्ण बने मंदिर का श्री संघ ने संपूर्ण जीर्णोद्धार करवाकर नूतन आरस पत्थर से निर्मित शिखरबद्ध जिनप्रासाद में प्राचीन मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु की श्वेतवर्णी, २१ इंची, पद्मासनस्थ प्रतिमा सह अन्य चार जिनबिंबों की यक्ष-यक्षिणी आदि प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, वीर नि.सं. २५११, शाके १९०६, नेमि सं. ३६, वि.सं. २०४१ के आषाढ वदि ५, शुक्रवार, जून १९८५ को शासन सम्राट नेमिसूरिजी की पाट परंपरा में राजस्थान दीपक, मरूधर देशोद्धारक आ. श्री सुशीलसूरिजी, मु. श्री जिनोत्तम विजयजी (हाल आचार्यश्री) आ.ठा. की पावन निश्रा में महोत्सव पूर्वक धूमधाम से संपन्न हुई।

यहां प्रतिष्ठित श्री सुविधिनाथ प्रभु को प्रतिमा की वीर सं. २५११, वि.सं. २०४१, पौष कृष्ण ६ को पाली प्रतिष्ठोत्सव पर, आ. श्री कैलाशसागरसूरिजी व आ. श्री कल्याणसागरसूरिजी आ.ठा. के वरद हस्ते डेण्डा हेतु अंजनशलाका प्रतिष्ठा करवाकर यहां प्रतिष्ठित किया गया। श्री सोहनराजजी जसराजजी पुनमिया परिवार ध्वजा के लाभार्थी बने। जैनों के वर्तमान में ४० घर है और २०० के करीब जनसंख्या है। गांव की कुल जनसंख्या एक हजार के करीब है। मंदिर के पास ठाकुरजी का मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध है। सोनाणा के बाद डेण्डा खेतलाजी प्रसिद्ध है।

तालाब के किनारे छोटा सा मंदिर है। अनेक गोत्रों के खेतलाजी डेण्डा के माने जाते है। वर्तमान में जैन मंदिर का जीर्णोद्धार चालू है।

सा. श्री निर्मोहरेखाश्रीजी, सा. अक्षयरेखाश्रीजी और सा. श्री निर्वेदरेखाश्रीजी गुरू भगवंतों की यह जन्मभूमि है। मारवाड़ ग्रामीण बैंक, ४ स्कूल, हॉस्पीटल, नजदीक स्थित हेमावास बांध से सिंचाई, पुलिस थाना-गुड़ा एंदला और गांव मं पुलिस चौकी है। अन्य मंदिर भी है।

मार्गदर्शन : यह पाली रेलवे स्टेशन से १८ कि.मी. हाईवे गुंदोज चौराया से ९ कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डे से १०० कि.मी. दूर स्थित है। यहां आवागमन के लिये बस टैक्सी और ऑटों की सुविधा है।

सुविधाएं : ३ धर्मशाला और उपाश्रय है। भोजन पूर्व सूचना देने पर बनता है। ५० लोगों हेतु बिस्तर सेट है।

पेढी : श्री आदेश्वर भगवान जैन श्वे. मंदिर पेढी

रावले के पास, मु.पो. – डेण्डा – ३०६४०१ तह.-पाली, जिला-पाली, राजस्थान

संपर् : पुजारी श्री लादूरामजी – ०९६०२८७५९४०

ट्रस्टी : श्री सोहनजी पुनमिया, पुना – ०९६६५२४४३३३

श्री उगमजी घी वाला  – ०९३७१००७६६८