सेसली / Sesli

सेसली / Sesli

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राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर सांडेराव से २१ कि.मी., गोडवाड के प्रवेशद्वार फालना रेलवे स्टेशन से ९ कि.मी., तीर्थ बाली से ३ कि.मी. और पुनाडिया गांव से ४०० मीटर दूर पूर्व दिशा में मध्य भाग में नदी के किनारे बसे सेसली गांव के मध्य भाग में नदी के किनारे बसे सेसली गांव के मध्य भाग में भव्य शिखरबंध जिनमंदिर में अत्यंत कलात्मक दर्शनीय, प्रीतिकारक परिकर से युक्त मनोरम श्वेत पाषाण के अति मनोहारी श्री सेसली पार्श्वनाथ प्रभु पद्मासन मुद्रा में विराजमान है। दर्शक के अंत:करण में शुभ विचार का विपुल वैभव प्रगट करते ये प्रभुजी २३ इंच ऊंचे (७५ सें. मी.) तथा १९.५ इंच चौड़े है। प्रतिमाजी का अभूतपूर्व अलौकिक दिव्य सौंदर्य अंतस्थल में शीतलता का अनुभव कराता है।

प्राचीनता : बाली तहसील में बसे सेसली गांव में जैनों का एक भी घर न होने के बावजूद प्रभु दर्शनार्थ भक्तों का तांता लगा रहता है। तथ्य प्रमाणित करते है कि अतीत काल में यह नगरी जाहोजलाली, वैभवशाली एवं समृद्धशाली थी। १२वीं शताब्दी में यहां श्रेष्ठि श्री मांडण संघवी ने सात लाख रूपये सद्व्यय करके एक भव्य-दिव्य शिखरबंध जिनालय का निर्माण करवाकर, वि.सं. ११८७ के आषाढ सुदि ७, शनिवार को भट्टारक श्री आनंदसूरि के करकमलों से प्रतिमा को महोत्सवपूर्वक गादीनशीन किया।

इस प्रभावशाली प्रतिमा के कारण श्री १०८ पार्श्वनाथ में अपना अलग स्थान रखती है। भक्त इन्हें दादा पार्श्वनाथ कहकर पुकारते है। संघवी मांडण ढालावत थे, इसलिये प्रतिवर्ष आज भी इस मंदिर पर वर्तमान में बाली स्थित इनके वंशजों की ओर से ध्वजा चढाई जाती है। ढालावतों के ज्यादातर घर खिमेल में है। काल के प्रवाह में जीर्ण हुए इस जिनप्रासाद का जीर्णोद्धार सं. १२५२ में किया गया, साथ ही प्रतिमाजी पुन: प्रतिष्ठित किये गये। ऐसा भी कहते है कि यह प्रतिमा बाली ग्राम से अग्रिकोण में स्थित लालराई गांव के एक ध्वंस बने मंदिर में लाकर स्थापित की गई है। इसके परिकर पर वि.सं. १४९३, आषाढ वदि ७, रविवार का लेख अंकित है। प्राचीन खंडहर बने मंदिर से सं. १२३३ के साल के दो शिलालेख मिले है। प्राचीन जैन लेख संग्रह भाग-२ में, लेख क्र.३४६-३४८ पर प्रकाशित हुए है। इसका विवेचन भी पृष्ठ २३६ से २३८ पर आया हुआ है। वि. सं. २०२० में पुन: जीर्णोद्धार संपन्न हुआ व आषाढ सुदि १४ को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा तथा भाद्रपद सुदि १० को बड़ा मेला लगता है। यहां कई बार नागदेवता के दर्शन होते है व तेला (३ उपवास) कर फिर से अदृश्य हो जाते है। प्रतिमाह यहां पूनम करने सैकड़ों भक्त आते है व स्वामीवात्सल्य का आयोजन होता है। इस दिन सेसली बोया पूनम ग्रुप के भक्त यहां पर भक्ति करते है।

श्री सेसली पार्श्वनाथजी को भी सेसली दादा पार्श्वनाथजी कहते है। प्रतिमा संप्रतिकालीन है। तीर्थ की प्राचीनता का प्रमाण वि.सं. १६५५ में रचित प.पू. गुरूदेव श्री प्रेमविजय कृत, ३६५ श्री पार्श्वनाथ जिन नाममाला में श्री सेसली दादा पार्श्वनाथ का नाम आता है। वि. सं. १६६७ में रचित प.पू. श्री शांतिकुशलजी कृत १०८ नाम गर्भित श्री गोड़ी पार्श्वनाथ स्तवन में भी प्रभु को प्रणाम किया गया है। वि.सं. १७२१ में रचित पू. उपा. मेघविजयजी कृत नाममाला में प्रभु को धनदायक पार्श्वनाथ के नाम से प्रशंसा की गई थी।

वि.सं. १७४६ में रचित पू. गुरू श्री शीलविजयजी कृत तीर्थमाला व १८वीं सदी में रचित पू. श्री कल्याणसागरजी कृत चैत्य परिपाटी में श्री सेसली पार्श्वनाथ का नाम आता है।

मंदिर परिसर की एक छत्री में प्रतिष्ठित दादाश्री पार्श्वनाथ प्रभु के चरण-युगल (पादुका) की प्रतिष्ठा वि.सं. १८६०, जेठ शुक्ल प्रतिपदा, रविवार को संपन्न हुई है। साथ ही संभवनाथ प्रभु की प्रतिष्ठा भी हुई। यह प्रतिमा व पादुका के लेख से ज्ञात होता है।

यह तीर्थ श्री मनमोहन पाश्र्वनाथजी पेढी, बाली के अंतर्गत है। वही यहां की संपूर्ण व्यवस्था संभालती है।

मार्गदर्शन : बाली नगर से मात्र ३ कि.मी. की दूरी पर मीठड़ी नदी के किनारे यह तीर्थ बसा है। यहां से भद्रंकरनगर मात्र १.५ कि.मी. व लुणावा ४ कि.मी. की दूरी पर है। यहां के लिये फालना रेलवे स्टेशन व बाली से प्रायवेट बस, टैक्सी, ऑटों के साधन प्राप्त होते है। नजदीक का हवाई अड्डा जोधपुर यहां से १५५ कि.मी.दूर है।

सुविधाएं : यात्रियों के लिये सर्वसुविधायुक्त आधुनिक २० कमरों की सुंदर धर्मशाला है। बड़े हॉल, उपाश्रय, बड़ी संख्या में बिस्तर सेट आदि सारी सुविधाएं उपलब्ध है। साथ ही भोजनशाला की भी उत्तम व्यवस्था है।

पेढी : १. श्री सेसली पार्श्वनाथ तीर्थ पेढी

मु.पो. सेसली-३०६७०१, वाया-बाली, जिला-पाली, राजस्थान

संपर् : पेढी – ०२९३८-२२२०६९

अध्यक्ष : श्री बाबूलाल बी. मंडलेशा – ०९८२१०६८२२०

मैनेजर : श्री मंसारामजी – ०९८२९५९२५०४, नरोत्तम भाई – ०८८७५०४७२३३

२. श्री मनमोहन पार्श्वनाथ जैन पेढी ट्रस्ट-बाली

संपर्क : पेढी – ०२९३८-२२२०२९

मैनेजर : श्री इंदरचंदजी जैन – ०९९५०३९३८०७