सांचोडी (चांचोड़ी, सांचोरी) / Sanchodi

सांचोडी (चांचोड़ी, सांचोरी) / Sanchodi

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राजस्थान की पुण्य भूमि में पाली जिले के गोड़वाड़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र.१४ पर ढोला चौराहा से वाया मांडल १२ कि.मी., रानी स्टेशन से करीब १३ कि.मी. और जवाली स्टेशन से १० कि.मी. दूर अरावली पर्वतमाला की श्रृंखला में गांव की छोटी पहाड़ी की सुरम्य तलहटी में तथा मांडल नदी के तट पर बसा है गांव सांचोड़ी

गांव की प्राचीनता के कोई ठोस प्रमाण तो प्राप्त नहीं होते, मगर नगरजन इसे प्राचीन मानते है। गांव में प्रवेश के साथ ही श्री मनमोहन पार्श्वनाथ प्रवेशद्वार बना है। इससे थोड़ा आगे बढने पर पहाड़ी की गोद में भव्य शिखरबद्ध जिनप्रासाद, दो गजराजों से शोभित जिनालय का प्रवेशद्वार, मूल गंभारे में प्रतिष्ठित अति प्राचीन श्वेतवर्णी, पद्मासनस्थ, ९ फणधारी श्री मूलनायक मनमोहन पार्श्वनाथ, बायीं ओर सुपार्श्वनाथ स्वामी और दायीं ओर श्यामवर्णी श्री ऋषभदेव स्वामी और गूढमंडप में प्रतिष्ठित प्रभु श्री महावीर स्वामी व श्री नमिनाथजी की प्रतिमाएं जिनालय की पवित्रता व आत्मा को परमानंद प्रदान करती है। दर्शनार्थी का मन मयूर दर्शन मात्र से झूमने लगता है। जिनालय की प्रथम स्थापना, प्रतिष्ठा आदि की प्राचीन जानकारी किसी को पता नहीं है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर वि. सं. १९३७, (वीर नि.सं. २४०७, शाके १८०२) में मूलनाय· श्री मनमोहन पार्श्वनाथ प्रभु सह पाषाण की ३ व धातु की एक प्रतिमा की स्थापना करवाई। पूर्व में यहां १२० जैन, १ उपाश्रय और एक पुस्तकालय था। मेरी गोडवाड यात्रा पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पूर्व यहां पार्श्वनाथ प्रभु का एक मंदिर, एक धर्मशाला तथा ओसवालों के कुल ३० घर विद्यमान थे। वर्तमान में ९० जैन घर और ४५० के करीब जैन जनसंख्या है।

समय के साथ जिनालय जीर्ण-शीर्ण होने लगा। गुरू भगंवतों से प्रेरणा पाकर श्री संघ ने जिनालय का सुव्यवस्थित जीर्णोद्धार करवाकर शिखरबद्ध नूतन जिनप्रासाद में वीर नि.सं. २५१५, शाके १९१०, वि. सं. २०४५, नेमि सं. ४०, माघ सुदि १३, शनिवार दि. १८ फरवरी १९८९ को राजस्थान दीपक मरूधर देशोद्धारक गुरू श्री दक्षसूरिजी के पट्टधर पू. आ. श्री सुशीलसूरिजी, पू. मुनि श्री प्रमोदविजयजी आ.ठा. की पावन निश्रा में, अति भव्य चमत्कारी मूलनायक श्री मनमोहन पार्श्वनाथ, श्री सुपार्श्वनाथ व श्यामवर्णी श्री ऋषभदेव प्रभु की प्राचीन प्रतिमाएं श्री महावीर स्वामी, श्री नमिनाथदि जिनबिंबों, गुरूचरण पादुका, यक्ष-यक्षिणि, अधिष्ठायक देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की स्थापना, ध्वज-दण्ड, कलशारोहणादि की विधिपूर्वक, महामंगलकारी प्रतिष्ठा अष्टह्निका महोत्सव सुसंपन्न हुई।

प्रतिष्ठा के एक दिन पूर्व यानि महा सुदि १२, शुक्रवार, दि. १७.२.१९८९ को श्रीसंघ के कुसंप को सदुपदेश से सुसंप में बदलकर श्री संघ में एकता करवाई। ध्वजा के लाभार्थी श्री वनेचंदजी धुलाजी लुणीया परिवार है। प्रभु श्री महावीर स्वामी और श्री नमिनाथजी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वरकाणा तीर्थ प्रतिष्ठोत्सव पर वीर नि. सं. २४८४, शाके १८७९, वि. सं. २०१४, फाल्गुन सु.३, शुक्रवार, मार्च १९५८ को गुरू वल्लभसुरिजी पट्टधर आ. श्री समृद्धसूरिजी के करकमलों से हुई है। भमती में एक ओर अकबर प्रतिबोधक जगदगुरू आ. श्री हीरसूरिजी के प्राचीन चरणपादुका स्थापित है। एक गोखले में वीर नि. सं. २४८२, शाके १८७६, नि.सं. २०१२ के वैशाख सुदि ५, शुक्रवार, मई १९५६ को प्रतिष्ठित दादागुरू श्री जिनदत्तसूरिजी के पावन-चरण-युगल प्रतिष्ठित है।

श्री संघ ने जिनालय में नवनिर्मित कलात्मक देहरियों में नूतन श्री नाकोडा भैरवदेव, श्री घंटाकर्ण महावीर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा एवं अधिष्ठायक देव-देवियों तथा दादा गुरूदेव के पावन पगलीयों की पुन: प्रतिष्ठा सप्तदिवसीय महोत्सव द्वारा वीर नि.सं. २५३७, शाके १९३२, वि.सं. २०६७, वैशाख सुदि ६, सोमवार, दि. ९ मई २०११ को गच्छाधिपति शांतिदूत आ. श्री नित्यानंदसूरिजी के विद्वान शिष्य, तत्वचिंतक, पू. पंन्यास प्रवर श्री चिदानंदविजयजी आ.ठा. के करकमलों से हर्षोल्लास से सुसंपन्न हुई।

साहित्य सम्राट पू. आ. श्री लावण्यसूरिजी के विद्वान शिष्य, आध्यात्मिक, आ.श्री विकासचंद्रसूरिजी की यह पावन पवित्र जन्मभूमि है।

ग्राम पंचायत सांचोड़ी की कुल जनसंख्या ६००० के करीब है। यहां १२वीं तक शिक्षा, सरकारी हॉस्पीटल, दूरसंचार, डाकघर इत्यादी प्रमुख सुविधाएं उपलब्ध है।

मार्गदर्शन : नेशनल हाईवे क्र. १४ से १२ कि.मी., जवाली स्टेशन से १० कि.मी., रानी स्टेशन से १३ कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डे से १३० कि.मी. दूर स्थित सांचोड़ी गांव हेतु बस, टैक्सी तथा ऑटो की सुविधा मिलती है।

सुविधाएं : सांचोड़ी में जैन उपाश्रय, ३ धर्मशालाएं, आराधना भवन, न्याति नोहरा में एक हॉल व दो कमरे, पेढी भवन, जैन बगीची तथा भोजनशाला की सुंदर व्यवस्था है।

पेढी : श्री मनमोहन पार्श्वनाथ जैन देवस्थान पेढी

जैन मंदिर रोड, गांधी चौ·, मु.पो.-सांचोड़ी-३०६११५,

तह.रानी, जिला-पाली (राजस्थान)

पेढी संपर् : ०२९३२-२७२२४१

पुजारी : प्रेमसुखजी – ०९१६६५१७०४७

ट्रस्टी : श्री बख्तावरमलजी लुणीया – ०९९५०६४९१०२,

श्री चंपालालजी मुंबई – ०९९८७७९५५५६