लापोद / Lapod

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राजपुताना की आन-बाण और शान का गौरवशाली राज्य राजस्थान के पाली जिले में पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद-दिल्ली रेलमार्ग पर रानी स्टेशन से १५ की.मी. एवं राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर केनपुरा चौराहा से मार ५ कि.मी. की दुरी पर स्थित है गोडवाड का एक प्रसीद्ध नगर ‘लापोद’

श्री भिकमचंदजी पारेख के मकान से प्राप्त शिलालेख में, सैम. ११३२ मव यहाँ मंदिर की प्रतिष्ठा का उल्लेख प्राप्त होता है। १००० वर्ष पूर्व यहाँ जैन बस्ती व् मंदिर था। यही नगर की प्राचीनता का मुख्य प्रमाण है शिलालेख आज भी उनके यहाँ सुरक्षित है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह’ ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ ने वि.सं. १९०० के लगभग शिखरबध जैन मंदिर का निर्माण करवाकर मुलनायक श्री पार्श्वनाथ प्रभु की प्रतिमा सहित पाषाण की ७ और धातु की २ प्रतिमाओं को स्थापित किया। वर्षो पहले यहाँ ८० जैनी और ३ धर्मशालाए थी। वर्तमान में करीब १५० घर ओली (हौती) है। पारेख, सोनीगरा, मलेशा आदि गोत्रों के प्रमुख परिवार है, जो चेन्नई, बंगलोर, मुंबई और पुणे में ज्यादातर बसे है।

गाँव के मुख्य बाजार विशाल चौकोन में श्वेत पाषण से निर्मित दो सुंदर व विशाल गजराजों से शोभित प्रवेशद्वार, शिखरबध, कलात्मक जिन्प्रसाद में, वामानंदन २३वे तीर्थंकर श्री प्रतिमा के साथ मूलगंभारे में, श्री सुमतिनाथजी, श्री सुविधिनाथजी की प्रतिमाओं की, वीर नि.सं. २४८६, शाके १८८१, वि.सं २०१६ के वैशाख सुदी ६, दी.मई १९६० को, नाकोडा तिर्थोद्वारक, मेवाड़केसरी पू. आ. श्री हिमाचलसूरीश्वर्जी म.सा. आदि ठाना की पावन निश्रा में, अंजनशलाका प्रतिष्ठा भावोल्लास व् मोहत्सवपूर्वक संपन्न हुई। जिनालय में स्थापित श्री सुविधिनाथजी प्रभु की अंजनशलाका, पं. कल्याण विजयजी गणी के हस्ते, वि.सं. २००५, माघ शु. ५ को हुई है। श्री मुनिसुव्रत स्वामी की वि.सं. १९५१ में हुई है। प्रतिवर्ष वै. शु. ६ को श्री मोतीलालजी धनराजजी पारेख (बैंगलोर) परिवार ध्वजा चढाते है। मुख्य मंदिर के सामने पेढ़ी भवन में, अधिष्ठायक मंदिर बना है, जिसमे श्री मणिभद्रवीर, भोमियाजी व् नाकोडा भैरव स्थापित है।

पारेख परिवार के तीन मुमुक्षु रत्न श्री बाबुलालजी कुंदनमलजी पारेख की सुपुत्री, श्री पारसमलजी वगतारमलजी पारेख की सुपुत्री और श्री सुकनराजजी मिश्रीमलजी पारेख की सुपुत्री ने, संयम लेकर कुल व् नगर का नाम रोशन किया है, जो नगर के लिए गौरव की बात है। यहाँ शिक्षा हेतु मिडल स्कूल, श्री मोतीलालजी धनराजजी पारेख हॉस्पिटल, महावीर नि:शुल्क चिकित्सालय, ग्राम पंचायत भवन, दूरसंचार, सुंदर तालाब व ग्राम पिछोला आदि है। गाँव में महादेवजी के दो मंदिर, चमत्कारी हनुमानजी मंदिर, मामाजी व् शीतलादेवी माता मंदिर है। श्री भवरजी सोनीगरा एवं श्री कांतिलालजी के. पारेख पुणे वालों ने जानकारी प्रदान करने में सहयोग प्रदान किया।

पुन: चल प्रतिष्ठा : मुलनायक श्री पार्श्वनाथजी प्रभु की प्रतिमा किसी कारणवश प्रतिष्ठित जगह से हिल गयी, जिससे आशातना होने लगी। इसी को ध्यान में लेकर, श्री संघ ने इसकी पुन: चल प्रतिष्ठा, वीर नि.सं. २५३५, शाके १९३०, वि.सं. २०६५, ज्येष्ठ मास में, दी. २७.११.२००९ को वल्लभ समुदायवर्ती आ. श्री जयानन्दसूरीजी एवं आ. श्री विधानंदसूरीजी के वरद हस्ते, प्रतिमा को मूल जगह पुन: चल प्रतिष्ठित किया गया।

विशेष मांगलिक प्रसंग

* वि.सं. २०३२, सन १९७६ में गोडवाड सादडी रत्न पू. आ. श्री ह्रींकारसूरीजी आ. ठा. (वल्लभ समुदायवर्ती) का सानंद चातुर्मास हुआ।

* वीर नि.सं. २५३४, शाके १९२९, वि.सं. २०६४, दी. २६ अप्रैल २००८ को, पारेख परिवार द्वारा श्री सतीमाता मंदिर का जिणोरद्वार करवाकर, इसमें पगलियाजी स्थापित किये गए।

* वीर नि.सं. २५३६, शाके १९३१, वि.सं. २०६६, वैशाख सुदी ६, दी. १९ मई २०१० को, पू.आ. श्री विश्वचन्द्रसूरीजी आ. ठा., पू. आ. श्री धर्मधुरंधरसूरीजी आ. ठा., पू. आ. श्री विश्वचन्द्रसूरीजी आ. ठा., पू. आ. श्री नित्यानन्दसूरीजी आ. ठा. इस तरह चार आचार्यो की पावन पुण्य निश्रा में, जिनालय की ५०वि वर्षगाठ (स्वर्ण जयंती) का महामोहत्सव हर्षोलास से संपन्न हुआ।

* पुरानी हो गयी धर्मशाला का संपूर्ण जिणोरद्वार करवाकर, उसे नया आधुनिक रूप प्रदान कर वि.सं. २०६९ वैशाख मास, दी. ७ मई २०१३ को, पंचाहिंका मोहत्सव पूर्वक आ. श्री नित्यानंदसूरीजी आ. ठा. की निश्रा में, चतुविर्ध संघ की उपस्थिति में, भावोल्लास पूर्वक धूमधाम से इसका उद्घाटन संपन्न हुआ।

* जिन मंदिर के सामने, पेढ़ी भवन के श्री मणिभद्रवीरजी मंदिर में, श्री संघ ने दो नूतन गोखलो में, पू. आ. श्री हिरण्यप्रभसूरीजी म.सा. आ. ठा. की निश्रा में, वीर नि.सं. २५२८, शाके १९२३, वि.सं. २०५८, वैशाख मासे, दी. २४.४.२००२ को अधिष्ठायकदेव श्री नाकोड़ा भेरूजी एवं श्री भोमियाजी महाराज की प्रतिमाओं की स्थापना बाजे-गाजे के साथ धूमधाम से संपन्न हुई।

पेढी : श्री पार्श्वनाथ जैन देवस्थान पेढी, मुख्य बाजार, मु.पो.लापोद-३०६११५, स्टेशन-रानी, जिला-पाली, राजस्थान