खुडाला / Khudala

खुडाला / Khudala

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राष्ट्रीय राजमार्ग नं. 14 पर सांडेराव से 13 कि.मी. व गेटवे ऑफ गोड़वाड़ की उपाधि से विभूषित फालना रेलवे स्टेशन से मात्र 1 कि.मी. दूर राणकपुर रोड पर स्थित है खुडाला गांव। भव्य प्रवेश द्वार से जाने पर, गांव के मध्य रावला के पास भव्य शिखरबंध जिनालय में, 15वें तीर्थंकर मूलनायक श्री धर्मनाथ प्रभु की श्वेतवर्णी, पद्मासनस्थ लगभग 60 सें. मी. ऊंची प्रतिमा प्रतिष्ठित है। 13वीं शताब्दी की यह प्रतिमा बड़ी चमत्कारी व कलात्मक परिकर सह भव्य-दिव्य है। प्रतिमा कुमारपाल के समय की है।

कहते हैं कि पोरवाल वंशज श्री रामदेव के पुत्र श्री सुराशाह ने इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया व उनके भ्राता श्री नलधर द्वारा, इस प्रभू प्रतिमा को वि. सं. 1243, माघ वदि 5, सोमवार को प्रतिष्ठित किया गया। इस संदर्भ में प्रभु प्रतिमा पर व नवचौकी के एक स्तंभ पर क्रमश: ये लेख उत्कीर्ण हैं। – संवत् 1243 माघ वदि 5 सोमे श्री रामदेव पुत्र श्री नलधरेण उतलस्य मोक्षार्थ ॥

संवत् 1243 माघ वदि 5 सोमवासरे रामदेव पुत्र प्राग्वाट वंशे सुराशाहेन लेखो लिखित

800 वर्ष प्राचीन वही प्रतिमा आज भी विद्यमान है। मंदिर की अन्य 3 धातुमय प्रमिमाओं के लेख से भी प्राचीनता प्रकट होती है, जो निम्नरुपेण अंकित है –

  1. संवत् 1523 वर्षे वैशाख सुदि 11 बुधे श्री प्राग्वाट वंशे शा गांगदेव की स्त्री कपुराई के पुत्र शा. वछराज श्रावक ने अपनी स्त्री पांची और पुत्र वसुपाल सहित निज श्रेय के लिए, अंचल गच्छीय जयकेशरीसूरि के उपदेश से विमलनाथ का बिम्ब कराया, उनको संघ ने स्थापन किया।’
  2. संवत 1543 येष्ठ सुदि 11 शनौ प्राग्वाट ज्ञातीय बिसलपुर के निवासी पोरवाड शेठ शर्मा की भार्या जीनी के पुत्र जीवा और जोगा ने, अपनी स्त्री गोमती के पुत्र हर्ष, हीरा व कमलापुत्र काढा, तागोजी के श्रेयार्थ पुत्री, जाना, घरणा तथा समस्त संघ कुटुम्ब सहित श्री पार्श्वनाथ का बिम्ब कराया, जिसकी प्रतिष्ठा श्री ज्ञानसागरसूरि के शिष्य श्री उदयसागरसूरि ने की।’
  3. संवत् 1955 फाल्गुन वदि 5 गुरौ आहोर नगरे, श्री आदेश्वर के बिंब की प्रतिष्ठा कराई, श्री राजेन्द्रसूरिजी ने प्रतिष्ठा अंजनशलाका की। यह जिनमंदिर विशाल व प्राचीन है, मूल गंभारा, गुढ़ मंडप, नवचौकी, सभामंडप, श्रृंगार चौकी व शिखरबंधी रचनावाले मंदिर का अंतिम जीर्णोध्दार के प्रसंग पर मीनाकारी, चीनी व मकराने की पंचरंगी लादियों का सुंदर काम होने से, दर्शकों को असीम आनंद प्राप्त होता है। हाल ही में इसे सोने से युक्त कलाकारी से कलात्मक रुप देकर वैभवपूर्ण बनाया गया है। सुंदर पट रचनाओं ने इसकी शोभा में चार चांद लगाए हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही एक अपूर्व शांति का अनुभव होता है। मन पवित्रता से भर जाता है। सामने मूलनायक की सौम्य आकृति जैसे मन मोह लेती है। प्रति वर्ष येष्ठ कृष्ण 6 को ध्वजा चढ़ाते हैं। कुल मिलाकर मंदिर के प्राचीन स्वरुप को विकसित कर नया रुप दिया गया है और इस भव्य बनाया गया है।

जीर्णोद्धार व प्रतिष्ठा : खुडाला गांव में जीर्णोध्दार पश्चात, महाप्रभावक श्री धर्मनाथ भगवान की पुन: प्रतिष्ठा अंजनशलाका, महामहोत्सव पूर्वक वि. सं. 2043, वैशाख सुदि 6, सोमवार दि. 4 मई 1987 को, प. पू.आ.भ. श्री दर्शनसागरसूरिजी के करकमलों द्वारा संपन्न हुई। इस प्रसंग पर आचार्यश्री ने, अपने शिष्य उपा. श्री नित्योदयसागरजी को आचार्य पद से अलंकृत करके आ. श्री नित्योदयसागरसूरिजी नामकरण किया।

श्री धर्मनाथ दादा की शीतल छाया में नवनिर्मित चौमुखी जिनप्रासाद में, श्री मुनिसुब्रत स्वामी, श्री केशरियाजी, श्री पद्मप्रभुजी, श्री चिंतामणी पार्श्वनाथजी, श्री नाकोड़ा भैरवदेव आदि देव-देवियों की प्राण प्रतिष्ठा, वि. सं. 2052, येष्ठ सुदि 6, गुरुवार दि. 23 मई, 1996 को, आ. श्री नित्योदयसागरजीसूरिजी एवं पंन्यास श्री चंद्राननसागरजी के हस्ते संपन्न हुई। खुडाला रत्न ‘आ. श्री यशोवर्मसूरिजी’ की यह जन्मभूमि है। अनेक पुण्य आत्माओं ने भी संयम मार्ग अपनाकर नगर का नाम रोशन किया है।

जिनालय में मीनाकारी के अदभुत कार्य की पूर्णता पर, वि. सं. 2068, वैशाख सुदि 7, शनिवार दि. 28.4.2012 को, श्री धर्मनाथ जिनालय के रजत जयंती वर्ष में गच्छाधिपति आ. श्री नित्यानंदसुरिजी के आज्ञाकारी पंन्यास प्रवर श्री चिदानंदविजयजी गणीवर्य की निश्रा में गणधर गौतमस्वामी व सुधर्मस्वामी तथा नूतन निर्मित मंदिर में श्री नाकोड़ा भैरवदेव की अद्भुत आकर्षक प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस प्रसंग पर दि. 27.4.2012 को जिनालय उद्धाटन, रजतरथ का संघार्पण, नूतन गेट नं. 1 व 2 का उद्धाटन, प्रभू का रजत भंडार, भैरूजी की रजत आंगी का अर्पण महोत्सव भी हुआ।

श्री वल्लभ गुरुदेव: खुडाला आ. श्री वल्लभसूरिजी एवं पट्टालंकार, मरुधरोध्दारक आ. श्री ललितसूरिजी की कर्मभूमि व तपोभूमि रही है। इसी तीर्थभूमि पर वि. सं. 2006 माघ शु. 9, शुक्रवार, दि. 27.1.1950 को आ. श्री ललितसूरिजी का स्वर्गवास हुआ। इस समय आ. श्री वल्लभसूरिजी भी पास ही थे। दूसरे दिन माघ शु. 10, शुनिवार दि. 28.1.1950 को फालना स्वर्णमंदिर परिसर में अगि् संस्कार हुआ। बाद में गुरु छत्री में चरणयुगल की स्थापना हुई।

श्री शांतिनाथजी घर मंदिर: नवापुरा वास में स्थित, दो मंजिली इमारत की पहली मंजिल पर गृहमंदिर में मु. श्री शांतिनाथ दादा की प्रतिमा स्थापित है।

‘श्री राजेन्द्र प्रवचन कार्यालय’ द्वारा वाचनालय व पुस्तक प्रकाशन का सुदर कार्य, यहीं के मंत्री श्रीयुत निहालचंदजी फौजमलजी पुनमिया द्वारा संचालित रहा। वर्तमान में इस भवन में श्री राजेन्द्रसूरिजी की स्थापना कर सुबह-शाम आरती व हर रोज सामाईक समूह में होती है।

खुडाला: यहां जैन परिवारों की कुल 606 घर ओली (हौती) व 3000 जनसंख्या है। स्कूल, कॉलेज, हॉस्पीटल, दूरसंचार, होटल, डाकबंगला, विश्रांतिगृह, ट्रेन, सरकारी बस, बैंक, पुलिस थाना इत्यादि वर्तमान युग की सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। मिठड़ी नदी के किनारे बसा खुडाला की सिंचाई व्यवस्था जवाई बांध से जुड़ी है। पाली लोकसभा व बाली विधानसभा से जुड़ा खुडाला श्री इन्दरचंदजी राणावत के नेतृत्व में प्रगति पथ पर अग्रसर है।

मार्गदर्शन: फालना रेलवे स्टेशन से मंदिर मात्र 2 कि.मी., जोधपुर हवाई अड्डे से 145 कि.मी., उयदपुर से 130 कि.मी. और राणकपुर से 35 कि.मी. दूर स्थित, खुडाला हेतु आवागमन के सारे साधन उपलब्ध हैं। सरकारी, प्राइवेट बस, टैक्सी, ऑटो इत्यादि पहुंचने के साधन हैं।

सुविधाएं: कंकुतिलक भवन धर्मशाला, श्री जैन अतिथि भवन में आधुनिक वातानुकुलित 17 रुम तीन बेड वाले हैं। हॉल काफी विशाल है। लिफ्ट भी है। गांव में भोजनशाला, आयंबिलशाला, 4 उपाश्रय, आ. श्री ललितसूरि आराधना भवन है। सभी सुविधाएं सुचारु रुप से कार्यरत हैं। फालना के स्वर्ण मंदिर में ठहरने हेतु कुल 81 रुम हैँ और भोजनशाला की उत्तम व्यवस्था है। संचालन खुडाला पेढ़ी करती है।

पेढ़ी: जैन श्वेताम्बर धर्मनाथ – पार्श्वनाथ देवस्थान जैन ट्रस्ट, सेवगो की वास, रावला चौक, मु. पो. खुडाला – 306116, तहसील- बाली, स्टेशन – फालना, जिला – पाली, राजस्थान

पेढ़ी संपर्क: 02938-236300,

मुनीमजी: श्री लालचंदजी गुंगलिया – 09314236300

अध्यक्ष: श्री इन्दरचंदजी राणावत, मुंबई – 09821093555,

श्री सूरजमलजी जैन, मारवाड़ – 09680736901,

श्री महेन्द्र जोधावत, पुना – 09822041601

संपर्क: श्री जैन अतिथि भवन, खुडाला

मैनेजर: श्री अरविंदजी जैन – 02938-236020, 09772101121

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