जाखोड़ा / Jakhoda

जाखोड़ा / Jakhoda

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राष्ट्रीय राजमार्ग नं.१४ पर स्थित सुमेरपुर से सांडेराव जाते समय २ कि.मी. के बाद दायीं तरफ जाखोड़ा मोड़ से ५ कि.मी. के बाद दायीं तरफ जाखोड़ा मोड़ से ५ कि.मी. अंदर की तरफ जाखोड़ा पहाड़ी की तलहटी में प्राचीन तीर्थ जाखोड़ा के सौधशिखरी श्वेतांबर जिनालय में चक्रवर्ती सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ भगवान की १५०० वर्ष प्राचीन, पद्मासनस्थ प्रवाल वर्ण की लगभग ३५ से.मी. ऊँची (१८ इंच) की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से पांचों इंन्द्रियों के विषय प्रतिकूल से अनुकूल बन जाये, मनोहर मुख मंडल ने जैसे जन्म-जन्म के दु:ख हर लिये हो, ऐसे शांतिनाथ प्रभु की कलात्मक परिकरयुक्त प्रतिमा, चंद्र से शीतल, सुर्य से तेजस्वी अहर्निश उदयांकर है। इसका अंतिम जीर्णोद्धार ९० साल पहले होक र माघ शुक्ल ५ को प्रतिष्ठा हुई थी।

प्राचीनता : कहा जाता है कि इस प्रभु प्रतिमा की अंजनशलाका १५०० वर्ष पूर्व आचार्य श्री मानतुंगसुरीश्वरजी के शुभहस्ते संपन्न हुई थी। वि.सं. की १५वीं शताब्दी में श्री मेघकवि द्वारा रचित तीर्थमाला में इस तीर्थ का वर्णन मिलता है, जो इसकी प्राचीनता का प्रमाण है। मूलनायक प्रभु के परिकर पर सं. १५०४ का लेख उत्कीर्ण है। इसके अनुसार सं. १५०४ में श्री यक्षपुरी नगर में तपागच्छीय श्री सोमसुंदरसूरिजी के शिष्य श्री जयचंद्रसुरिजी ने मूलनायक श्री पार्श्वनाथ की मूर्ति के परिकर की प्रतिष्ठा की, लेकिन इस परिकर के बारे में यह मान्यता है कि किसी अन्य मंदिर से, श्री पार्श्वनाथ भगवान का यह परिकर लाकर यहां लगाया गया है। जैन-अजैन सभी यहां दर्शनार्थ आते है, क्योंकि यहां अधिष्ठायक भैरूदेवजी अत्यंत चमत्कारी है। प्रतिवर्ष माघ सु.५ को किशोरजी खिवान्दी वाले ध्वजा चढाते है।

विशिष्टता : जाखोड़ा गांव में पर्वतों की गोद में शिखरबंध धवल मंदिर एकांत में जंगल में मंगल के समान होने के बावजूद भी अपने चमत्कारों से यहां के निवासियों को चमत्कृत कर रहा है। कहते है कि गांव में पेयजल का भारी संकट था। इस पथरीली भूमि में पानी मिलने की संभावना ही नहीं थी। एक दिन अधिष्ठायक देव ने कोलीवाड़ा के चान्दाजी को सपने में मंदिर के निकट ही पानी होने का संकेत दिया, तदनुसार वहां कुआं खुदवाया। जैन-जैनेतर और भी अनेक तरह के चमत्कारों का वर्णन करते है। मंदिर में पाषाण की ७ व धातु की २ प्रतिमाएं है। यहां कार्तिक पूर्णिमा व चैत्री पूर्णिमा पर हजारों श्रद्धालु दर्शनार्थ आते है। पचास हजार वर्गफीट के विशाल परिसर से युक्त तीर्थ अपने प्राकृतिक सौंदर्य से सुशोभित है।

अन्य मंदिर : मुख्य मंदिर के ठीक सामने उपाश्रय की पहली मंजिल पर पोमावा निवासी श्रीमान संघवी श्री मूलचंदजी राठौड़ परिवार ने आ. श्री सुशीलसूरिजी एवं आ. श्री चंद्रोदयसूरिजी से प्रेरणा पाकर स्वद्रव्य से इस जिनालय का निर्माण करवाके वीर नि.सं. २५१४, वि. सं. २०४४, मार्गशीर्ष शुक्ल ६, गुरूवार दि. २६.११.१९८७ को नीति समुदायवर्ती आ. श्री पद्मसूरिजी के हस्ते, मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु आदि ५ जिनबिंब, धातु, चौवीसी, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की अंजनशलाका प्रतिष्ठा करवाकर ध्वज, दंड व कलश आरूढ किये व तीर्थपेढी को जिनमंदिर समर्पित किया। श्री जैन आराधना भवन का निर्माण भी इसी परिवार द्वारा ·रवाया गया।

जाखोड़ा : गांव की कुल जनसंख्या ४००० है। दसवीं तक स्कूल है। मुख्य व्यवसाय खेती व पशुपालन है। तीर्थ पर ५०० बिस्तर के पूरे सेट उपलब्ध है और किराये पर दिये जाते है। श्री महादेवजी, हनुमानजी के अन्य मंदिर है। पहाड़ी पर चामुण्डा माता का मंदिर है।

सुविधाएं : भव्य प्रवेशयुक्त विशाल धर्मशाला है, जिसमें १५ सादा कमरे व २ हॉल है। प्राचीन शैली की बनी धर्मशाला में आधुनिकता के अभाव में, यात्रिक यहां ठहरना पसंद नहीं करते और सुमेरपुर ठहरकर ही यहां आते है। इसी के चलते यात्रिक भी यहां कम आते है, जिससे तीर्थ का विकास भी नहीं हो पा रहा है। भोजनशाला की उत्तम व्यवस्था है। बिस्तर आदि बड़ी संख्या में उपलब्ध है। प्रवेशद्वार पर ही पेढी बनी हुई है। छोटा सा गांव है, अत: सारा सामान सुमेरपुर मंडी से लाना पड़ता है। वर्तमान में यहां एक भी जैन घर नहीं है। हालांकि पहले ५-७ घरों की बस्ती थी।

मार्गदर्शन : तीर्थ पर आने हेतु नजदीक का रेलवे स्टेशन जवाईबांध १२ कि.मी. व फालना अंदर के रास्ते १८ कि.मी. व वाया सांडेराव होकर ३२ कि.मी. दूर पड़ता है। यह तीर्थ जोधपुर हवाई अड्डा से करीब १५५ कि.मी. कोरटा से १५ कि.मी. दूर स्थित है। इन स्थानों से बस व टैक्सी द्वारा जाखोड़ा तीर्थ पहुंचा जा सकता है। बस स्टैंड मंदिर से २०० मीटर दूर है।

पेढी : श्री शांतिनाथ भगवान जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढी

मु.पो.जाखोड़ा, तहसील-सुमेरपुर, स्टे.जवाईबांध

वाया-कोलीवाड़ा, जिला-पाली, राजस्थान, पिन-३०६९०२

संपर् : ०२९३३-२२४०४५

मुनीमजी : दीपकुमार-०९४६१२४१८६६,९८८७७६२८९९

पुजारी : बंसी भाई – ०८८७५३८६७१०

ट्रस्टी : श्री चंपालालजी – ०९३२२०४१५९१, श्री भबुतमलजी – ०९४१४१२३९०२