गुंदोज / Gundoj

गुंदोज / Gundoj

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तीर्थो एवं संतों की वीरभूमि राजस्थान राज्य के मारवाड की गौरवमयी धन्य धरा पर पाली जिले से २१ किमी. दूर अहमदाबाद-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर गोडवाड का प्रवेशद्वार के रूप में प्रसिद्ध गुंदोज गांव मुख्य सडक पर स्थित है।

गुंदोज गांव की स्थापना का कोई ठोस आधार तो नहीं, पर कुलगुरुओं द्वारा प्राप्त इतिहास से ऐसा माना जाता है, कि नगर की स्थापना सं. ७११ के पूर्व में हुई थी। ‘गुन्देशा’ गोत्र की उत्त्पत्ति यही से प्रारंभ हुई। गुन्दोज ग्राम की स्थापना संवत ७११ से सद्गुरु श्री चक्रेसर सूरिजी ने की। वे जैन धर्म अंगीकार करने के पूर्व ब्राह्मण थे और गुन्दोज के निवासी थे। सं ७११ में भट्टारक श्री चक्रेसरसूरिजी ने तालाब पर प्रतिबोध दिया, जिससे भाइयों ने मिथ्यात्व का त्याग करके सच्चे आत्मकल्याणक जैन धर्म को अपनाया। उसी शुभ घडी में आ. श्री ने तालाब के किनारे कुलदेवी श्री रोहिणी माताजी की स्थापना की। वि. स. १२४८ के पूर्व पाली में गौतम गोत्र का पल्लीवाल ब्राह्मण समाज था। मुगल शासक पीराणखां ने पाली पर आक्रमण किया। पल्लीवाल ब्राह्मणों ने बहादूरी से मुकाबला किया, पर अंत में बडी संख्या में लोगों का कत्ल हुआ। कहते हैं कि शहीद ब्राह्मणों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि उनकी जो जनेऊ उतारी गई तो उसका वजन साढे सात मन (३ क्विंटल) हुआ। लाखों ब्राह्मण इस युद्ध में शहीद हुए। युद्ध के अंतिम दौर में चमत्कार हुआ और श्री माताजी ने दर्शन देकर ब्राह्मणों को पाली छोड नया गांव बसाने का आदेश दिया। मां की आज्ञा शिरोधार्य मानकर नया गांव बसाना तय हुआ। वि. स. १२४९ में श्री गांगदेवजी ने अपने पिता गुणवसाजी के नाम पर इस नगर का नाम गुंदोज रखा था। वे इस नगर का संचालन न्याय नीति से करते रहे। हाईवे पर स्थित नगर होने से यहां साधु-साध्वियों का निरंतर आवागमन बना रहता था। उनके सानिध्य में श्री गांगदेवीजी के साथ सभी ने जैन धर्म को स्वीकार कर लिया। श्री गांगदेवी के बाद श्री तीडाजी गुंदोज नगर के प्रमुख रहे।

हाईवे से श्री रेहिणी माता प्रवेश द्वार से अंदर बढते ही थोडी ही दूरी पर रावले के पास जैन मंदिर स्थित है। ६००० की कुल जनसंख्या वाले गुंदोज में जैनों के कुल २३७ घर व १२५० की जैनी जनसंख्या है।

गुंदोज में गच्छ स्थापना : गुंदऊच शाखा वडगच्छ से निकली एक शाखा है। पाली से दक्षिण में १० मिल पर गुंदौज स्थान है। इसके कई प्रतिमा लेख प्रकाशित हैं। (संदर्भ: श्री यतींद्रसूरि अभिनंदन ग्रंथ पृष्ठ क्र १६०)

श्री शांतिनाथजी मंदिर: रोहिणी नदी के किनारे बसे गुंदोज के रावले के पास मुख्य बाजार में भव्य शिखरबंध, श्वेत पाषाण से निर्मित दो विशाल गजराजों से शोभित कलात्मक जिनप्रासाद में, १६वें  तीर्थंकर चक्रवर्ती श्री शांतिनाथ प्रभु की २१ इंची, श्वेत और मनभावन सुंदर प्रतिमा मूलनायक के रूप में स्थापित है। करीब ३६५ वर्ष पूर्व गुरु भगवंतों की प्रेरणा पाकर श्री संघ ने जिनालय का निर्माण करवाया था। वर्षो प्राचीन यह जैन मंदिर पोरवाल समाज के हाथों से बनाया गया था। उस समय यहां पोरवालों के ३०० घर मौजूद थे, जो धीरे-धीरे दूसरे गांवों में जाकर बस गए। वर्तमान में श्री शांतिनाथ जैन संघ, इस जिनालय का संचालन कर रहा है। परिवर्तन संसार का नियम है। समय के साथ मंदिर भी जीर्ण होने लगा। जीर्णोद्धार की आवश्यकता को ध्यान में रखकर श्री संघ ने ५५ वर्ष पहले निर्माण कार्य का प्रारंभ किया। निर्माण की पूर्णता पर श्री संघ ने महोत्सव पूर्वक, वीर नि. स. २४८६, शाके १८८१, विक्रम संवत् २०१६, ज्येष्ठ वदि ६, दि. १९ मई १९६० को , नीति समुदायवर्ती जोजावररत्न आ. श्री जिनेन्द्र सूरिजी म.सा. आ. ठा. के वरद हफ्ते प्रतिष्ठा संपन्न हुई है। ध्वजा का लाभ श्री सरदारमलजी हंसजी काकरियां परिवार को प्राप्त हुआ। काल का प्रवाह गतिमान रहा और ५० साल बीत गए। वीर नि. स. २५३६, वि. स. २०६६, ज्येष्ठ वदि ६ गुरुवार दि. ३ जून २०१० को वल्लभ समुदायवर्ती आ. श्री नित्यानंदसूरिजी आ. ठा. साहित्यकार आ. श्री भद्रगुप्तसूरिजी के शिष्य मु. श्री शीतलरत्न विजयजी आ. ठा. की पावन निश्रा में जिनालय की स्वर्ण जयंती ५० वीं वर्षगाठ को अष्टाहिन्का महोत्सवपूर्वक मनाया गया। दि. २.६.२०१० को श्री प्रासाद देवी की स्थापना की गई एवं आमंत्रण सह पता- निर्देशिका का निर्माण किया गया। जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ के अनुसार, इस शिखरबंध मंदिर का निर्माण श्री संघ द्वारा वि.स. १६९८ में हुआ था। प्रतिमा लेख संवत् १८९३ का है। उस समय शांतिनाथजी के साथ पाषाण की ११ धातु की २० प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा हुई थी। चंद्रप्रभु स्वामी प्रतिमा पर सं १८९३ मधु-सित-१० का लेख है। दूसरी पाशर्वनाथ पर सं १८२७ वे. सु. १० का लेख खुदा है व महावीर स्वामी प्रतिमा लेख में वीर नि. स. २४९३, वि. स. २०२३ पौष कृ. ५, सोमवार को आ. श्री प्रतापसूरिजी व आ. श्री धर्मसूरिजी द्वारा मुंबापुरी चेम्बुर में अंजनशलाकाग्रंथ हुई। इसी मंदिर में करीब ३०-३२ सालों से मेहमान रूप में श्री शंखेश्वर पाशर्वनाथ विराजमान थे। श्री संघ ने मंदिर परिसर में शिखरबंध दूसरे का निर्माण करवाकर, नूतन जिनमंदिर में मूलनायक श्री शंखेश्वर पाशर्वनाथ प्रभु आदि जिनिबंबों की प्रतिष्ठा कराई। इसके साथ ही श्री पंचतीर्थी के चरणपादुका की स्थापना, ध्वजा दंड कलशारोहण वि.स. २०५६, फाल्गुन सुदि २स., बुधवार, दि. ८ मार्च २००० को पू. आ. श्री पद्ममसूरिजी आ. ठा. के वरद हस्ते अंजनशलाका प्रतिष्ठा संपन्न हुई। ध्वजा का लाभ श्री सोहनराजजी घासीरामजी वोरा परिवार ने लिया था। गांव करीब हजार साल पुराना है और इस गांव के तालाब पर प्राचीन शिलालेख व छतरियां बनी हुई है। आ. श्री वल्लभसूरिजी का गुरुमंदिर निर्माणाधीन है।

श्री रोहिणी माता :  वि. स. १२४९ में श्री गांगदेवजी द्वारा स्थापित गुंदोज नगर में किसी कारणवश उस समय मंदिर का निर्माण नहीं हो सका। बाद में वि. स. १२९७ में माताजी मंदिर की प्रतिष्ठा श्री गांगदेवजी द्वारा सर्वप्रथम गुंदोज नगर में हुई में हुई। इसके बाद किसी भी जीर्णोद्धार का उल्लेख प्राप्त नहीं होता। ८५० वर्षो के बाद इसके बाद मंदिर के काफी जीर्ण हो जाने से गुंदेशा बंधु जैन समाज ने इसका पूर्ण २०४५ ज्येष्ठ वदि ६, शुक्रवार दि. २६ मई १९८९ के शुभ मुहूर्त पर हर्षोल्लास से प्रतिष्ठा से प्रतिष्ठा संपन्न हुई। श्री गुंदेशा बंधु जैन समाज का २५वां महाधिवेशन माता की छत्रछाया में, २१ व २२ नवंबर २०१२ को संपन्न हुआ एवं गुदेशा रत्नमाला का विमोचन भी हुआ।

गुंदोज के संयमी: गुंदोज की पावन भूमि से मु. श्री पद्मरत्न विजयजी, सा. श्री अंजनाश्रीजी एवं सा. श्री लेहरो महाराज की शिष्या सा. श्री दक्षरत्नाश्रीजी ने जिनशासन को समर्पित होकर कुल एवं गोत्र का नाम रोशन किया।

ज्ञान व साहित्यप्रेमी: श्री मांगीलालजी हीराचंदजी नागौरी (उम्र ७८ वर्ष) का जन्म दि. ४.१०.१९३५ को गुंदोज में हुआ। आप श्री ने ई सन् १९४४ में श्री हेमचंद्राचार्य ज्ञान भंडार की स्थापना कर करीब ५००० बहुमूल्य पुस्तकों का संग्रह कर ज्ञानपिपासु सज्जनों की प्यास बुझाई। हिन्दी, प्राकृत, संस्कृत भाषा की दुर्लभ पुस्तकों, हस्तलिपियां, प्राचीन ग्रंथ, फोटोग्राफी, धातु की प्राणी मूर्तियों का सुंदर संकलन अपाके इतिहास प्रेमी होने का परिचय है। महाराष्ट्र में पुणे महानगरपालिका द्वारा आपश्री का २६ जनवरी २०११ को महापौर श्री मोहनसिंह राजपाल के हस्ते गौरव पदक देकर सम्मान हुआ। समाज की विविध संस्थाओं द्वारा भी अनेक बार बहुमान हुआ।

परमात्मा भक्त आंगीकार: श्री अमृतलालजी भवरलालजी पुनमिया प्रसिद्ध आगींकार ने, पूरे हिन्दुस्तान में स्वद्रव्य से, अब तक १९९८० अंगरचना कर एक कीर्तिमान बनाया। अब तक ४८ गोल्ड मेडल और ७७२ सोने की चेनों से सम्मानित होने वाले श्री अमृतलालजी भवरलालजी पुनमिया, जैनशासन रत्न, गोडवाड रत्न, अंगरचना सम्राट, ४ बार राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित है एवं एक उत्कृष्ट मंच संचालक हैं। वे कहीं से भी मिलने वाली राशि सदैव जीवदया में समर्पित करते हैं। आपके पास ३५ से ४० लाख मूल्य का आंगी का साहित्य है। पूरे वर्ष में वे स्वद्रव्य से, करीब १० किलो केशर द्वारा केशर महाभिषेक व अंगरचना में उपयोग करते हैं।

प्रसिद्ध साइकिल खिलाडी : राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित श्री विनोद भवरलालजी पुनमिया ने, गुंदोज का नाम भारत ही नहीं अपितु विश्व में प्रसिद्ध कर दिया। आपश्री ने साइकिल द्वारा दिल्ली से मुंबई की १४८५ किमी. की दूरी को, मात्र ३१ घंटे में पूर्ण कर तथा २५ मार्च २००७ को पुणे मुंबई डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस ट्रेन सें १८ मिनट पहले मुंबई से पुणे (१४० किमी.) पहुँचकर विश्व कीर्तिमान बनाया और कुल, गांव एवं देश का नाम रोशन किया।

उपरोक्त सभी गोडवाड रत्नों का हार्दिक अभिनंदन…

गुंदोज: यहां १२वीं तक स्कूल, श्री बाबूलालजी नागौरी परिवार निर्मित हॉस्पिटल, मारवाड ग्रामीण बैंक, कुल ७ स्कूल, डाकघर, दूरसंचार, गुंदोज बांध से सिंचाई आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।

मार्गदर्शन: गुंदोज नेशनल हाईवे क्र, १४ पर पाली रेलवे स्टेशन से २१ किमी. और जोधपुर हवाई अड्डे से १०० किमी. दूस स्थित है। यहां के लिए सरकारी बसें, प्रायवेट बसें, टैक्सी, ऑटो आदि सारे साधन उपलब्ध है।

सुविधाएं :   यहां कुल ३ धर्मशालाएं , १०० x १०० के तीन हॉल १५ कमरे व १५० बिस्तर के सेट उपलब्ध हैं। नूतन धर्मशालाएं, बुद्धजी धर्मशाला, धनजीबा, उपाश्रय आराधना भवन की सुविधा है। उत्तम भोजनशाला, आयंबिल खाता की अच्छी सुविधाएं हैं। यहां से पाली रोड पर ९ किमी. दूर श्री सुशील वाटिका निर्माणाधीन है। श्री शांतिनाथ जैन युवक मंडल, रोहा मुंबई, श्री गुंदोजा जैन युवा संघ,पुणे श्री शांतिनाथ जैन युवक मंडल , चेन्नई यहां की सहयोगी संस्थाएं है।

पेढी: श्री शांतिनाथजी जैन देवस्थान पेढी:रावले के पास, मुख्य बाजार मु. पो. गुंदोज ३०३४४२ तहसील जिला पाली, राजस्थान, पेढी संपर्क : मुनीमजी : श्री बाबूलालजी ०२९३२-२४८०९४,०९६६०१०२७४६

अध्यक्ष: श्री भवरलाल जी कांकरिया, रोहा ०९४२०६४९९७७

सेक्रेटरी : श्री शांतिलालजी लोढा, गुंदोज ०९८३३७९११५०