गुडा एन्दला / Guda Endla

गुडा एन्दला / Guda Endla

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शुरविरो के प्रांत राजस्थान के पाली जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ के समीप किरवा बस स्टैंड से ४ की.मी. पश्चिम में सुकडी नदी के किनारे बसा हुआ है गाव “गुडा एन्दला“| इसके उत्तर में एन्दला, दक्षिण में नवागुडा, पूर्व में किरवा और पश्चिम में गिरवर ग्राम है|इस ग़ाव का कूल शेत्रफल २४००० बिघा है, जिसमे ५७०० बिघा में वन विभाग का ग्रास फार्म, ८०० बिघा में एन्दला तालाब और २००० बिघा में गोच्चार भूमि है |

”गुडा एन्दला” ग्राम आजादी से पूर्व की जागीर रहा है| यह गुंदोज ठीकाने के अंतगर्त था| वि. सं. १८८४ में गुंदोज व चाणोद ठीकाने में पानी के लिए लड़ाई हुआ| उसके बाद खुलासा हुआ तथा बाद में महाराणा हरीसिंहजी को बटवारे में यह प्राप्त हुआ| गुडा एन्दला के पास एन्दला ग़ाव है इसलिए इसे “एन्द्लारो गुडा” भी कहते है| मीणा बाहुल्य ग़ाव होने के कारण यह “मीणों के ग़ाव” के रूप में भी प्रसिद्ध है| यहां तक तिहाई आबादी में मीन ही रहते है | इस जाती के लोगो के कारण यह ग़ाव सुरक्षित रहा तथा आज तक किसी प्रकार की हानि नहीं हुई|

ऐतिहासिक स्थल : ग़ाव के मुखय बाजार के बीच श्री जोगमाया का मंदिर है| ग़ाव बसने से पूर्व यहां बकरी और नाहर को लड़ते देखा गया | इसमें बकरी की विजय हुई| इससे प्रसन्न होकर यहां आज से लगभग ४०० वर्ष पूर्व संवत् १६५५ में “छुरी” गाड़कर यह ग़ाव बसाया गया| आज भी सभी ग्रामवासियो की इस मंदिर के प्रति असीम आस्था है|

वि.सं. १८८४ में गुंदोज व चाणोद ठीकाना के बीच पानी के लिए लड़ाई हुआ| इसमें यहां के ठाकुर माधोसिंहजी वीरगति को प्राप्त हुए| उनका सीर गौर के सरिए में गिरा और धड से लड़ते हुए वे ६०० फीट दूर पहुच गए, वहां आज भी “छतरी” बनी हुई है|

वनवास में जाते समय पांडवो ने इस एन्दला तालाब को खुदवाया, जहां बाद में “कर्ण” ने एक वटवृश्क लगाया, जो आज भी मौजूद है| यहां औरते आज भी पूजन करती है और उनकी मनोकामना पूर्ण होती है|

“जैन तीर्थ सर्वसंग्रह” ग्रंथनुसार, श्री संघ ने शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर, वि. सं. १७५० के लगभग प्रतिष्ठा करवाई| मुलनायक श्री पार्शवनाथ प्रभु सह पाषण की ४ और धातु की ४ प्रतिमाए स्थापित हुई| यहां ६० वर्ष पूर्व ४०० जैन व उपाश्रय-धर्मशाला थी|

 

पत्रिका शिलालेख : एन्दला गुडा श्री संघ ने जीर्ण मंदिर का जिणोरद्वार करवाकरनूतन शिखरबद्ध जिनप्रसाद में १७ इंची, श्वतवर्णी, पद्मासनस्थ २३ वे तीर्थंकर श्री सहस्त्रफना पर्श्वनाथादी जिनबिंबो की प्रतिष्ठा, वीर नि. सं. २४५८, शाके १८५३, वि. सं. १९८८, जेष्ठ शुक्ल ५, शुक्रवार ,दी. २२ जून, १९३२ को अष्टाहिन्का मोहत्सवपुर्वक प्रवर पंडित श्री लाब्धिसागरजी महाराज की निश्रा में विधि-विधान से संपन्न हुई|

दो गजराजो से शोबित प्रवेशद्वार, भव्य विशाल देवमंड़प , रंगमंडप व भमती में अनेक तीर्थ दर्शन पट तथा श्वेत पाषण से निर्मित कलात्मक छात्रों में, श्री आदेश्वर भगवान के चरणयूगल प्रतिष्ठित है| प्रतिवर्ष श्री मानमलजी गमनाजी खांटेड परिवार ध्वजा चढाते |

श्री नाकोडा रथ मंदिर : यहां संपूर्ण भारतवर्ष में अपने ढंग का अधितीय धीमंजिला शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण बोराणा दोषी परिवार की ओर से हो रहा है|नेशनल हाईवे नं. १४ से लगकर नीर्माणधीन श्री नाकोडा रथ मंदिर का शिलनिआस , वि.सं. २०५७, मार्गशीर्ष वादी ८, दी. ८ दिसंबर २००१ को, आ. श्री सुशीलसूरीजी या. ठा. की पावन निश्रा में संपन्न हुआ| धीमी गति से चालू कारय अभी भी अधुरा है| निकट भविष्य में जल्दी ही प्रतिष्ठा की अपेक्षा है|  इसी मुहर्त में नूतन भोजनशाळा भवन एवं श्री अतिथि भवन का उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ| वि. सं. २०४५ में आ. श्री सुशीलसूरीजी व आ. श्री जिनोत्तम सूरीजी आ. ठा. 7 तथा गोडवाड़ दीपिका सा. श्री ललितप्रभाश्रीजी आ. ठा. १५ का चातुर्मास धूमधाम से संपन्न हुआ था, जिसमे ५१ उपवास, मासक्षमन, १५ उपवास आदि अनेक विधा तपश्चाए बड़ी संखया में हुई | दी. ३.९.१९९८ को आ. श्री के ८२वे जन्मोत्सव पर एवं तपश्चाओ के अनुमोदनार्थ पंचाहिनका मोहत्सव संपन्न हुआ|

सा. श्री केशरश्रीजी , हंसाश्रीजी, गरिमाश्रीजी आदि ९ साध्वीजी भगवंत और मू. श्री कलयाणयशविजयजी सहित नगर में कूल १० दीक्षाए संपन्न हुई| वि. सं. २०६५ के पौष मॉस में सोमवार दी. २८.१२.२००९ को पं. प्रवर मू. श्री चिदानंदविजयजी के हस्ते “गुडा एन्दला” स्मारिका का विमोचन संपन्न हुआ|इसी दिन मानमलजी खांटेड परिवार (गुडा एन्दला) द्वारा आयोजित श्री सम्मेतशिखरजी पंचतिथि संघ का आगमन भी हुआ था|

धार्मिक : जैन मंदिर के अलावा श्री चारभुजा, हनुमानजी, शिवजी, रामदेवजी, आदिनाथजी, पिंपलेश्वर और शंकरपुरीजी का मठ है|

जनसंख्या : यहां की आबादी १० हजार के करीब है और १२०० घरो की बस्ती है| जैनों की २०६ घर तथा १००० के करीब जैन संखया  है| एन्दला बांध से मुखयात सिंचाई होती है |

यहां उच्च माधयमिक विधालय, बालिका विधालय, राजकीय अस्पताल , स्वास्थय केंद्र, पोस्ट ऑफिस, ग्रामीण बैंक, दूरसंचार केंद्र आदि सुविधाए है| बैलगाड़ी के पहिए बांध कर नृत्य कियाजातं है| औरतो लुम्बर करती है|

पेढी : श्री चिंतामणी पाश्र्वनाथ जैन संघ पेढी, मेन बाजार, माताजी चौ·, मु.पो. – गुड़ा एन्दला-३०६६२२, तहसील व जिला – पाली, राजस्थान