डुठारिया / Duthariya

डुठारिया / Duthariya

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(दुठारिया, दुगरिया)

शूरवीरों से शोभित राजस्थान प्रांत के पाली जिलें में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर मंडली गांव से पुन: जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे क्र.१४ पर मंडली गांव से पुन: जोधपुर-उदयपुर मेगा हाईवे क्र.६७ पर सोमेसर रेलवे स्टेशन से मात्र ५ कि.मी. दूर जवाली नदी के पास हाईवे पर गांव बसा है डुठारिया

कहते है कि दो परिवार प्रथम नारलाई से जैतसिंह का गुड़ा पधारे। वहां से यहीं दो परिवार वि.सं. १७३७, वैशाख सुदि १४, मई १६८१ को श्री भोमिया राठौड़ के साथ छाजेड़ गोत्र के दो भाई यहां आकर ठहरे। उससे दो परिवार होने से डुठारिया नाम पड़ा। दो + ठहरे। देशी बोली भाषा में दो को दोय तथा ठहरे को ठेहरिया बोलते है, यानि ‘दोय-ठेहरिया’ अर्थात दुठारिया शब्द का अपभ्रंश होते-होते हो गया डुठारिया। यह गांव पांचेटिया जागीर के अधीन था। जागीरदार ठाकुर गंगासिंह को कोई पुत्र नहीं था, लेकिन दूसरे भाई को भरा-पूरा परिवार था। जोधपुर दरबार महाराजा उम्मेदसिंह से यह गांव उन्हें इनाम स्वरूप मिला था। इन्हीं उम्मेदसिंहजी ने जवाईबांध का निर्माण करवाया था।

दो भाईयों का परिवार यहां स्थाई रूप से निवास करने लगा। इस फुलवारी के पौधे धीरे-धीरे वटवृक्ष के समान, अपनी नूतन शाखाओं को फैलाने लगे। दो से बढकर छाजेड़ गोत्र का यह परिवार वर्तमान में १५३ घर (घर ओली या हौती) हो चुका है। पूरे भारतवर्ष में यह एक मात्र छाजेड़ गोत्र का पूरा गांव है। एक ही गोत्र होने से कभी गांव से गांव में शादी नहीं हो सकती थी। ग्राम पंचायत सोमेसर के अधीन डुठारिया के ३६ कौम की कुल जनसंख्या ५००० के करीब है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ डुठारिया ने मुख्य बाजार में शिखरबद्ध मंदिर का निर्माण करवाकर वीर नि. सं. २४०६, शाके १८०१, वि. सं. १९३६ में, मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान सह पाषाण की तीन व धातु की एक प्रतिमा प्रतिष्ठित करवाई। ६० वर्ष पूर्व यहां १६० जैन व एक उपाश्रय था। आ. श्री. यतीन्द्रसूरिजी रचित पुस्तक मेरी गोडवाड यात्रा के अनुसार, ७० वर्ष यहां मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु का एक मंदिर, एक धर्मशाला व ओसवाल छाजेड़ गोत्र के ४० घर विद्यमान थे।

अतीत से वर्तमान : पूर्व में प्रभु-अर्चना किस तरह से होती रही यह किसी को नहीं पता। श्री संघ डुठारिया ने वीर नि.सं. २४२६, शाके १८२१, वि. सं. १९५६, ई. सन १९०० में मंदिरजी की नींव डाली। शिखरबद्ध मंदिर निर्माण में पूरे १० साल लगे। श्री संघ द्वारा नूतन निर्मित शिखरबद्ध कलात्मक जिनप्रासाद में वीर नि.सं. २५३६, शाके १८३१, वि. सं. १९६६ के जेठ सुदि १३, जून १९१० को बोतावाला जतिजी (शायद गुरोसा श्री लब्धिसागरजी रहे हों) के करकमलों से श्वेतवर्णी, १७ इंची, पद्मासनस्थ मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु सह श्री पार्श्वनाथ स्वामी, श्री नेमिनाथजी जिनबिंबों की प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इन प्रतिमाओं की अंजनशलाका कहां हुई यह शोध का विषय है। प्रतिमा लेख से भाषातज्ञ द्वारा पता लगाया जा सकता है। प्रतिवर्ष ध्वजा जेठ सु.१३ को श्री मिश्रीमलजी वनेराजजी छाजेड़ परिवार चढाते है।

उत्थापन व भूमिपूजन : समय के साथ मंदिर भी जीर्ण-शीर्ण हो गया था। श्री संघ ने निर्णय लेकर इसका आमूलचूल जीर्णोद्धार का तय करके १९ जनवरी २००८ को प्रभु प्रतिमाओं का उत्थापन करके उन्हें पास के उपाश्रय में चल प्रतिष्ठा द्वारा विराजमान किया गया। शिखर से ध्वजा उतारकर दि. १९.३.२००८ को अजमेर के पास पुष्कर तीर्थ से नदी में विसर्जित की गई। जिनालय हेतु सं. २०६४, माघ मास, १४ फरवरी २००८ में भूमिपूजन तथा वि. सं. २०६४, चैत्र सुदि ११, बुधवार, दि. १८.४.२००८ को शासन प्रभावक आ. श्री पद्मसूरिजी की निश्रा में शिलान्यास सुसंपन्न हुआ।

नूतन जिनालय में प्रतिमा मां ा प्रवेश : निरंतर जारी कार्य से छ: वर्ष में नवनिर्मित देदीप्यमान देवविमान स्वरूप गगनचुंबी विशाल शिखरबद्ध जिन प्रासाद में आगामी ७ फरवरी २०१४ से ९ फरवरी २०१४ तक त्रिदिवसीय महोत्सव द्वारा प्राचीन व नूतन जिनबिंबों का जिनालय मंगलप्रवेश, प्रतिष्ठा शिरोमणि पू. आ. श्री पद्मसूरिजी आ.ठा. की पावन निश्रा में संपन्न होने जा रहा है।

प्रतिष्ठा : वीर नि.सं. २५४०, शाके १९३५, वि.सं. २०७० के वैशाख सुदि १२,११ मई २०१४ को खतरगच्छीय पू. उपाध्याय प्रवर श्री मणिभद्रसागर विजयजी आ. ठा. की शुभ निश्रा में, नूतन निर्मित जिनमंदिर की मंगलकारी प्रतिष्ठा संपन्न होने जा रही है।

दादावाड़ी : गांव के बाहर विशाल भूखंड पर निर्मित बगीची के मध्य भाग में सुंदर सी दादावाड़ी का निर्माण हुआ है जिसकी प्रतिष्ठा वीर नि.सं. २४८१, शाके १८७६ व वि. सं. २०११ के वैशाख सुदि १०, मई १९५५ को पूज्य कवि कुलकिरीट खरतरगच्छीय आचार्य भगवंत श्री जिनकवींद्रसागरसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा के करकमलों से संपन्न हुई थी। इस दादावाड़ी में दादा जिनकुशलजी की गुरू प्रतिमा व चरण पादुका प्रतिष्ठित है।

एक और मतावली के अनुसार, इसकी प्रतिष्ठा पुणे के यतिवर्य श्री नेमिचंदजी मारवाड़ जंक्शन के यतिवर्य श्री लब्धिसागरजी के वरद हस्ते संपन्न हुई थी। इनमें सही क्या है, यह शोध का विषय है। अभी हाल ही में कुछ महीनों पहले, दादावाड़ी की ५९वीं ध्वजा समारोह पर, वैशाख सुदि १०, २० मई २०१३ को ध्वजा लाभार्थी श्री रमेशजी मदनजी छाजेड़ परिवार ने ध्वजा चढाई। उपा. प्रवर श्री मणिभद्रसागरजी की निश्रा में हुए, इस महोत्सव में दादावाड़ी में विराजित गोले-काले भैरव संबंधी दोष का निवारण किया। उनका उत्थापन होकर पुन: प्रतिष्ठा सुसंपन्न करवाई।

संयम पथ : श्रीमान सुकनराजजी छाजेड़ की धर्मपत्नी और २ पुत्रिया कु. सविता व मंजुला ने दीक्षा ग्रहण कर एवं पुखराजजी छाजेड़ की पुत्री नारंगी ने संयम पथ अपनाकर छाजेड़ कुल व डुठारियां का नाम जैन शासन में रोशन किया है। इनका सा. श्री कल्पल्ताश्रीजी, सा. तिलकप्रभाश्रीजी तथा सा. चंद्रकलाश्रीजी नामकरण संपन्न हुआ था।

डुठारिया : पू. गोड़वाड़ बांकली रत्न आ. श्री विश्वचंद्रसूरिजी, उपा. श्री दिव्यचंद्र विजयजी आ. ठा. ३ एवं पू. सा. श्री गरिमाश्रीजी, सा. श्री वल्लभश्रीजी आ. ठा. ९ का चातुर्मास (पांच मास का) वि. सं. २००० में सुसंपन्न हुआ था। स्व. श्री फूलचंद हुकमीचंदजी छाजेड़ परिवार ने, गांव हेतु जलयोजना टाकी का निर्माण करवाकर, गांव की पानी समस्या का समाधान किया। डुठारिया में १०वीं तक स्कूल, सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल, पास के ढारियां बांध से सिंचाई, दूरसंचार, पोस्ट इत्यादि सभी सुविधाएं उपलब्ध है। यहां श्रावण और भादरवा के नाम से २ अरट (कुआं) प्रसिद्ध है। गांव में श्री खेतेश्वर महादेव, करणी माता, आई माता, हनुमानजी, ठाकुरजी व जोगमाया के मंदिर है।

मार्गदर्शन : नेशनल हाईवे क्र.१४ से ३० कि.मी., सोमेसर रेलवे स्टेशन से ५ कि.मी., जवाली स्टेशन से ५ कि.मी. पाली से ४० कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डे से १२० कि.मी. दूर हाईवे पर स्थित डुठारिया हेतु सरकारी बसें, टैक्सी और ऑटों की सुविधा मिलती है।

सुविधाएं : गांव में दो धर्मशाला, उपाश्रय व भोजनशाला की उत्तम सुविधा उपलब्ध है।

पेढी : श्री ऋषभदेव जैन श्वे.पेढी

मेन बाजार रोड, ठाकुरजी मंदिर के पास, वाया-सोमेसर,

मु.पो. डुठारिया-३०६५०३, तह. रानी, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर् :  पुजारी : श्री पुरणदारस – ०९७८३६१३४४७

ट्रस्टी : श्री सोहनराजजी – ०९८२०४८९५५५, श्री रमेशजी मदनराजजी  – ०९४४४७९०१६९

श्री रमेशजी निहालचंदजी, पूणे – ०९८२२०४००५१