ढोला / Dhola

ढोला / Dhola

SHARE

(ढोलां रो गुड़ो)

पाली जिलें में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर किरवा नदी के किनारे आबाद है एक नगर ढोला’। इस गांव की प्राचीनता करीब ५५० वर्ष है। चूकिं ढोलाजी राजपुरोहित ने नगर बसाया इसलिये उनके नाम पर इस गांव का नाम ढोला पड़ा। नगर बसाने के ५० वर्ष बाद ढोलाजी राजपुरोहित ने रायगुर राजपुरोहितों को लाकर यहां बसाया।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ के अनुसार, बाजार में श्रीसंघ ने घूमटबंध जिनालय का निर्माण करवाया और मूलनायक श्री आदिनाथ प्रभु सह पाषाण की ३ व धातु की २ प्रतिमाएं प्रतिष्ठित करवाई। वि. सं. १८०० के लगभग मंदिर का निर्माण हुआ। ६० वर्ष पूर्व यहां ४० जैन व एक उपाश्रय था। प्रतिमा पर वि. सं. १९५१ का लेख है। मेरी गोडवाड यात्रा पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पहले यहां एक जैन मंदिर में भी ऋषभदेव प्रभु की प्रतिमा प्रतिष्ठित थी। एक धर्मशाला व जैन ओसवालों के कुल १२ घर है।

अतीत से वर्तमान : वीर नि.सं. २४२१, शाके १८१६, वि.सं. १९५१, माघ शुक्ल ५, गुरूवार, फरवरी १८९५ को पू. भट्टारक आ. श्री राजसूरीश्वरजी द्वारा वरकाणा तीर्थ के प्रतिष्ठोत्सव पर हुए ६०० जिनबिंबों की अंजनशलाका महोत्सव में यहां के प्राचीन श्यामवर्णीय श्री आदिनाथ प्रभु की अंजनशलाका हुई है। प्राचीन मूलनायक के आसपास श्री शीतलनाथजी व विमलनाथजी प्रतिष्ठित है।

प्रतिमा लेख (सं. १९५१) से ज्ञात होता है यहां जीर्णोद्धार होकर उन दिनों यहां प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। मगर पूर्ण जानाकरी प्राप्त नहीं होती। कालांतर में मंदिर के जीर्ण हो जाने पर गुरू भगवंतों से प्रेरणा पाकर श्री संघ ने जीर्णोद्धार करवाया और नूतन शिखरबद्ध जिनालय में वीर नि.सं. २५२२, शाके १९१७, वि.सं. २०५२ को, वैशाख सुदि ६, बुधवार, दि. २४ अप्रैल १९९६ को प्रतिष्ठा शिरोमणि पू. आ. श्री पद्मसूरिजी के करकमलों से प्राचीन श्री आदिनाथजी, शीतलनाथजी व विमलनाथादि जिनबिंबों की स्थापना तथा इस अवसर पर नए तीन प्रतिमाजी, जिनमें प्रमुख श्वेतवर्णी श्री आदिनाथ प्रभु, श्री संभवनाथ, श्री सुपार्श्वनाथादि जिनबिंबों की अंजनशलाका प्रतिष्ठा हर्षोल्लास से संपन्न हुई। प्रतिवर्ष वैशाख सु. ६ को श्री रतनचंदजी सरदारमलजी पगारिया परिवार ध्वजा चढाते है। वर्तमान में यहां ४५ घर व २०० की जनसंख्या है।

ढोला : ग्राम पंचायत ढोला की कुल जनसंख्या २००० के करीब है। गांव में ११वीं तक स्कूल, सरकारी अस्पताल, ग्रामीण बैंक, दूरसंचार आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध है। नगर के प्राचीन शिवालय में लगे गोल्ड शिलालेख के अनुसार, सं. २०१० जेठ सु. १०, सोमवार को प्रतिष्ठा हुई है। कांतिलालजी बाफना परिवार निर्मित श्री हनुमानजी मंदिर की प्रतिष्ठा, सं. २०६२, वैशाख , सुदि ६, बुधवार, दि. ३ मई २००६ को संपन्न हुई है।

मार्गदर्शन : नेशनल हाईवे क्र. १४ पर स्थित, गांव ढोला रानी रेलवे स्टेशन से १४ कि.मी. दूर है। यहां से पाली ४२ कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डा १२० कि.मी. दूर है। ढोला के लिये सरकारी व प्रायवेट बसें, टैक्सी व ऑटों की सुविधा हर समय उपलब्ध है।

सुविधाएं: धर्मशाला, उपाश्रय और भोजनशाला की सुविधा उपलब्ध है।

पेढी  : श्री आदेश्वर जैन श्वे. पेढी

नेशनल हाईवे नं.१४, मेन बाजार, मु.पो.ढोला,

तह.रानी, जिला-पाली, राजस्थान

मु.पो.ढोला, तह.रानी, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर् : पुजारी श्री भंवरलालजी ०२९३८-२५०४५६,

श्री रूपचंदजी लुणिया : ०८०९४१४९१४९, ०९८६९६५५१९०

श्री अनराजजी सोलंकी, मुंबई – ०२२ २८४४३७९०