धणी (धुणी) / Dhani (Dhuni)

धणी (धुणी) / Dhani (Dhuni)

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गोड़वाड़ पंचतीर्थों का प्रवेशद्वार रानी स्टेशन से ९ कि.मी., फालना स्टेशन से वाया खुडाला ९ कि.मी., और राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक १४ पर सांडेराव से २० कि.मी. दूर अरावली पर्वतमाला की श्रृंखला में एक छोटी सी राजमगरी’ नामक पहाड़ी की गोद में बसी है प्राचीन नगरी धणी

वि.सं. १४६० में ठाकुर साहेब श्री जसंवतसिंहजी सोनिगरा चौहान ने इस गांव की स्थापना की थी। इसका प्राचीन नाम धुणी था, जो अपभ्रंश होते-होते धणी हो गया। पहले यहां बस्ती सोनिगरा चौहान राजपूतों की थी और इसी गोत्र का शासन भी रहा। १६वीं शताब्दी की शुरूआत में, जैन परिवार यहां बसे हुए थे। जैन तीर्थ सर्वसंग्रह ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ धणी ने वि.सं. १६०० के मुख्य बाजार पहाड़ की तलहटी में शिखरबद्ध जिनालय में १६वें तीर्थंकर मूलनायक श्री शांतीनाथ दादा की प्रतिमा सह पाषाण की ६ और धातु की २ प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा करवाई। इस मंदिर की सार-संभाल श्री जेठाजी नवलाजी संभालते थे। पूर्व में यहां १२५ जैन, २ उपाश्रय, १ धर्मशाला थी एवं मंदिर के घुमट में अप्सराओं के अलग-अलग रूप देखने लायक थे। मेरी गोडवाड यात्रा पुस्तक के अनुसार, धुणी (धणी) में एक जैन मंदिर में मूलनायक श्री शांतिनाथ प्रभु की प्रतिमा प्रतिष्ठित थी एवं २ धर्मशाला, एक उपाश्रय, २५ घर पोरवालों के और एक घर ओसवाल का था।

प्रथम प्रतिष्ठा : मंदिर में लगे शिलालेखों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री संघ ने शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर वीर नि.सं. २४३९, शाके १८३४, वि.सं. १९६९, ज्येष्ठ शुक्ल ७, जून १९१३ को तपागच्छीय भट्टाकाचार्य विजय महेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. (धनारी वाला) के वरद हस्ते सम्राट संप्रतिकालीन मूलनायक श्री ऋषभदेवस्वामी प्रतिमा की प्रतिष्ठा संपन्न हुई।

द्वितीय प्रतिष्ठा : समय के साथ मंदिरजी का जीर्णोद्धार करवाकर श्रीसंघ ने जिनालय की दूसरी बार प्रतिष्ठा यतिवर्म श्रीमद् लब्धिसागरजी म.सा. (मारवाड़ जंक्शन वाला) के हस्ते वीर नि. सं. २४७७७, शाके १८७२, वि.सं. २००७, फाल्गुन कृष्ण २, मार्च १९५१ को जीर्णोद्धारित ऋषभ मंदिर में प्राचीन मूलनायक श्री ऋषभदेव प्रभु को, महोत्सवपूर्वक विराजमान किया।

तृतीय प्रतिष्ठा : तीसरे जीर्णोद्धार के बाद श्रीसंघ धणी ने श्री नेमसूरि समुदायवर्ती सूरिमंत्रसमाराधक, शासन प्रभावक पू. आ. श्री सुशीलसूरिजी, पंन्यास प्रवर श्री चंदनविजयजी आ. ठा. की पावन निश्रा में संप्रतिकालीन श्री ऋषभदेव मंदिर में, श्री शीतलनाथ और श्री वर्धमान स्वामी जिनबिंबों की प्रतिष्ठा, वी. नि, सं. २४९२, शाके – १८८७, वि. सं. २०२२, नेमि सं. १७ वर्षे ज्येष्ठ कृष्ण ७, बुधवार, मई १९६६ को चतुर्विध संघ सह महामहोत्सव पूर्व भावोल्लास से सुसंपन्न हुई। दायीं तरफ भगवान महावीर स्वामी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वीर नि.सं. २४९२, वि.सं. २०२२, फाल्गुन सु. ३ को आ. श्री कैलाशसागरसूरिजी के हाथों संपन्न हुई तथा बायीं तरफ प्रभु श्री शीतलनाथ स्वामी की अंजनशलाका प्रतिष्ठा, वि.सं. १९९८, माघ शुक्ल ६, सोमवार को श्री विजयसिद्धिसूरिजी के हस्ते संपन्न होकर यहां प्रतिष्ठित की गई।

चतुर्थ प्रतिष्ठा : श्री संघ धणी ने चौथे जीर्णोद्धार के बाद वीर नि.सं. २५१३, शाके १९०८, वि.सं.२०४३, वैशाख शुक्ल १३, सोमवार, १३ मई १९८७ को, संप्रतिकालीन श्री ऋषभदेव जिनप्रासाद में श्वेतवर्णी, २१ इंची, पद्मासनस्थ मूलनायक श्री ऋषभदेवस्वामी जिनबिंब को नूतन कलात्मक परिकर सहित गर्भगृह में श्री शांतिनाथजी (प्राचीन मु.), श्री पार्श्वनाथजी स्थापित गूढमंडप में श्री शीतलनाथजी, श्री महावीर स्वामी आदि जिनबिंब, श्री गौमुखयक्ष, श्री चके्रश्वरी यक्षिणी, अधिष्ठायक श्री मणिभद्रदेव, श्री नाकोडा भैरवदेव प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा तपोगच्छाधिपति आ. श्री नीति समुदायवर्ती, प्रतिष्ठा शिरोमणि पू. आ.श्री पदमसूरिजी आ.ठा. की पावन निश्रा में चतुर्विध संघ सह अष्टाहिन्का महोत्सवपूर्वक ध्वज दंड व कलशारोहणादि हर्षोल्लास से संपन्न हुए। प्रतिवर्ष वैशाख सुदि १३ को श्रीमान पूनमचंदजी लालचंदजी मुठलिया परिवार ध्वजा चढाते है।

गांव में वोरवाल जैनों के ६० घर है और ३५० जैन जनसंख्या है। गांव में श्री वनेचंदजी कानाजी परिवार से ४ श्राविकाओं ने दीक्षा ग्रहण करके गांव धणी व कुल का नाम रोशन किया है।

धणी में १०वीं तक स्कूल, हास्पीटल, दूरसंचार, पुलिस चौकी – फालना आदि सभी सुविधाएं उपलब्ध है। श्री महादेवजी, हनुमानजी, गणेशजी और माताजी के अन्य हिंदू मंदिर है। गांव की कुल जनसंख्या ३५०० के करीब है।

मार्गदर्शन : फालना रेलवे स्टेशन से वाया खुडाला ९ कि.मी. स्थित धणी हेतु प्रायवेट बस, टैक्सी और ऑटों की सुविधा मिलती है। यहां से उदयपुर हवाई अड्डा १७० कि.मी., जोधपुर १५३ कि.मी. रमणीया तीर्थ १० कि.मी., रानी स्टेशन ९ कि.३मी. और वरकाणा तीर्थ २१ कि.मी. दूर है।

सुविधाएं : उपाश्रय, जैन धर्मशाला, न्याति नोहरा की सुविधा है। ६ अटैच कमरे की धर्मशाला में रहने की सुविधा के साथ-साथ भोजनशाला की भी अच्छी व्यवस्था है।

पेढी : श्री ऋषभदेव भगवान जैन देवस्थान, मु.पो. धणी-३०६११८, तह.बाली,  स्टे.फालना, जिला-पाली, राजस्थान, पेढी संपर् : ०२९३८-२८८१२२,

मुनीमजी : श्री सोहनराजजी, ट्रस्टी : श्री हस्तीमलजी – ०९८२१४३४५३४, श्री संपतजी मुठलिया – ०९२१४४१९९९९