बोया / Boya

बोया / Boya

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गोडवाड में गेटवे ऑफ गोड़वाड़ की उपाधि से अलंकृत फालना रेलवे स्टेशन से वाया बाली मात्र १० कि.मी. दूर सेवाड़ी जाने वाली मुख्य सड़क पर भव्य तालाब के किनारे बस है एक छोटा सा गांव बोया। यहां १०वीं शताब्दी का एक अति प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है, जो जालोर एवं गोडवाड़ के परमार शासकों द्वारा निर्मित है। ११वीं शताब्दी में जालोर के शासकों ने परमारों को हराकर इस प्रदेश पर अधिपत्य स्थापित किया था। उनमें से महाराव सामंत सिंहजी सोनिगरा जालोर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। उसके बाद १२वीं शताब्दी में नाडोल के चौहान शासकों द्वारा फिर से जीर्णोद्धार हुआ, तब से यह बाली जैन संघ पेढी के अधीन हो गया। पहले बोया में जैनों के ५०० घरों की बस्ती थी। परंतु मेवाड़ और नाडोल के शासकों की लड़ाई से परेशान होकर जैन लोग आसपास के गांव बाली, लुणावा, सेवाड़ी आदि में जाकर बस गये, जहां आज भी इन गावों में वे बोयावासी के नाम से जाने जाते है।

जैन तीर्थ सर्वसंग्रह  ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ द्वारा सं. १३०० के लगभग शिखरबद्ध जिनालय का निर्माण करवाकर मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा सह पाषाण की ४ और धातु की २ प्रतिमाएं स्थापित की गई। प्रतिमा पर सं. १८८३ का लेख है। एक खड़ी प्रतिमा सं. १२५२ की है। मेरी गोडवाड यात्रा पुस्तक के अनुसार, ७० वर्ष पहले एक घर था।

शिलालेख : मंदिर में लगे एक शिलालेख के अलावा वि.सं. १२४६ आषाढ सु. ४ व सं. १२४९ के शिलालेख भी है। गर्भगृह के प्रवेशद्वार पर ऊपर के भाग दायें-बायें तरफ भी शिलालेख उत्कीर्ण है, किंतु रंगरोगन पोत दिये जाने से ठीक तरह से पढने में नहीं आते है। एक लेख के अनुसार… संवत् १२५०, आषाढ वदि १४, रविवार भूडपद वास्तत्व श्राव साभण भार्या जिसवई सूत रोहड़, रामदेव-भावदेव कुटुंब सहितेन राम्बदेवेन स्तंभ लत्ता प्रदत्तादा’।

एक और अन्य लेख अनुसार… ऊँ संवत् १२५०, आषाढ सुदि १४, रवौ बहुविया – वास्तव र रोहिलसूत, धांधल तत्सूत गुणधर साल्हणाभ्या मातृ थिरम्मति श्रेयार्थ स्तम्भ लत्ता, दि. २० प्रदत्ता’।

इतिहास े पन्नों में : इस तीर्थ को २५०० वर्ष प्राचीन माना गया है। वि.सं. १२०० तक यहां श्री पार्श्वनाथ प्रभु मूलनायक के रूप में विराजमान थे। वर्तमान में यह प्रतिमा रंगमंडप में प्रतिष्ठित है। कहते है कि प्रतिमा की नाभि में से हर रोज सवेरे १० बजे अमिझरा होता है। मंदिर के नीचे भोयरा है और १२ फुट तक भोयरे की दीवारें बनी हुई है। ऐसा अनुामन है कि पहले यहां ५२ जिनालय विशाल मंदिर था। बोया का प्राचीन नाम बहुविया सं. १२५१ तक था और उससे पहले यह गांव बरवा नाम से प्रसिद्ध था।

रंगमंडप में स्थापित वि.सं. १२५२ के लेख वाली, आदिनाथ भगवान की कायोत्सर्ग मुद्रा वाली प्राचीन प्रतिमाजी विशेष दर्शनीय है। यही परिकर सहित एक प्रतिमा पर वि.सं. १२८६ का लेख है। धातु की चौबीसी पर सं. १९४ का लेख है। रंगमंडप के दायीं तरफ श्री वासुपूज्य स्वामी की मूर्ति पर सं. १२८६ के आषाढ़ सु.४ का लेख है।

वि.सं. १७५५ में सूरत से आबू पर्वत के ६ री पलित संघ में श्री ज्ञानविमलसूरिजी रचित तीर्थमाला में, इस गांव को बोईऊ संबोधित किया गया है। जो इस प्रकार है… मादे मुडाडे राजपरि चेचलियोपास, बोईऊ ने पाल्डीह प्रसाद विचिग ।।४६।। (संदर्भ : प्राचीन तीर्थमाला संग्रह, भाग-१, संशोध श्री धर्मसूरिजी काशीवाले)

वर्तमान शिखरबद्ध जिनप्रासाद में मूलनायक १६वें तीर्थं·र श्री शांतिनाथ प्रभु की श्वेतवर्णी, २१ इंची, पद्मासनस्थ, सुंदर व आकर्षक प्रतिमा की प्रतिष्ठा, वि.सं. १८८३ को संपन्न हुई है। यहां अनेक प्राचीन प्रतिमाओं के साथ-साथ शिलालेख अंकित है। कभी ५०० घरों की बस्ती की जगह आज एक भी घर नहीं है। ७० वर्ष पूर्व सिर्फ एक घर बचा था। शास्त्र भी कहते है कि तीर्थ जितना प्राचीन होता जाता है, धीरे-धीरे वहां से जैन बस्ती हटने लगती है।

नूतन प्रतिष्ठा : वीर नि.सं. २५१५, शाके १९१०, वि.सं. २०४५, ई. सन् १९८८ में श्री शांतिनाथ जिनमंदिर की नूतन ध्वज, दंड व कलशारोहण प्रतिष्ठा, पू.श्री नित्यानंद विजयजी आ.ठा. के साथ पू.मु.श्री रत्नसेन विजयजी (वर्तमान में आचार्य श्री) की पावन निश्रा में संपन्न हुई।

बोया : जैन मंदिर के अलावा, यहां श्री चारभुजाजी, महादेवजी, हनुमानजी आदि प्रसिद्ध मंदिर है। गांव की जनसंख्या एक हजार के करीब है। स्कूल, हॉस्पीटल आदि सभी सुविधाएं है। बोया गांव के प्रधान साहेब श्री चंदनसिंहजी दीपसिंहजी सोनीगरा, बाली तहसील के पूर्व प्रधान है। वे लगातार १८ वर्ष तक इस पद पर रहे। इस गांव में राणावत और सोनीगरा चौहान दो परिवारों की जागीरी है। दो अलग-अलग सुंदर रावले बने है। श्री मनमोहन पार्श्वनाथ पेढी बाली यहां की संपूर्ण व्यवस्था संभालती है। प्रतिवर्ष मगसर सुदी ६ को श्रीमान शा. उम्मेदमलजी अनोपचंदजी कितावत परिवार ध्चजा चढाते है।

मार्गदर्शन : यह फालना से १० कि.मी. बाली से ४ कि.मी सेवाड़ी से ६ कि.मी. सांडेराव से २२ कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डे से १५५ कि.मी. दूर स्थित है। यहां के लिये बस टैक्सी और ऑटों हमेशा उपलब्ध रहते है।

सुविधाएं : मंदिर परिसर से जुड़ी प्राचीन धर्मशाला, ३ कमरें और उपाश्रय है। भोजनशाला नहीं है। फालना, बाली, सेवाड़ी रूककर आना ही यहां श्रेयसकर है।

पेढी : श्री शांतीनाथ जैन श्वे. ट्रस्ट बोया

रावले व पानी टंकी के पास, मु.पो.-बोया-३०६७०१

तह. एवं वाया – बाली, जिला-पाली, राजस्थान

बाली पेढी संपर् : ०२९३८-२२२०२९, ०९९५०३९३८०७

पुजारी : नारायणजी बोया