बिसलपुर (वीसलपुर) / Bisalpur (Visalpur)

बिसलपुर (वीसलपुर) / Bisalpur (Visalpur)

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राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. १४ पर सुमेरपुर मंडी से १२ कि. मी. दूर मुख्य सड़क पर स्थित है बिसलपुर’। सन् १९५७ में निर्मित जवाईबांध मात्र ४ कि.मी. की दूरी पर है। प्राचीन अखंड भारत देश के मध्य खंड में स्थित राजस्थान राज्य के पाली जिले के गोड़वाड़ क्षेत्र में, दक्षिण-पश्चिम भाग में अरावली पर्वतमालाओं की श्रंखलाओं में चारों तरफ पहाड़ों से घिरा प्राचीन ऐतिहासिक नगर है बिसलपुर’। इसका मूल नाम विसलपुर’ था, जो कालांतर में बिसलपुर हो गया।१६वीं शताब्दी में सिरोही के देवड़ा राजपूतों ने बिसलपुर को स्वतंत्र जागीर का रूप प्रदान किया। यहां के ठाकुर बारह गांवों के मालिक कहलाते थे। जैन तीर्थ सर्व संग्रह’ ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ द्वारा वि. सं. १५०० के लगभग शिखरबंध मंदिर का निर्माण कर मूलनायक श्री धर्मनाथ स्वामी के साथ-साथ पाषाण की १५ व धातु की ८ प्रतिमाएं प्रतिष्ठित हुई। प्राग्वाट इतिहास के अनुसार, वि.सं.१५१०, आषाढ शुक्ल २ के दिन बिसलपुर के सेठ भुंभव और सेठ जसा के द्वारा भराई गई भगवान शीतलनाथ स्वामी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा आ.श्री. रत्नशेखरसूरिजी द्वारा की गई।

यह भी कहा जाता है कि बिसलपुर के प्राचीन जैन मंदिर का शिलान्यास राणकपुर तीर्थ मंदिर के शिलान्यास (सं. १४४६) के दिन हुआ था। यहां मूलनायक भगवान श्री शांतिनाथ के रूप में पूजे जाते थे। यह प्राचीन मूर्ति सं. १४९९ में भरवाई गई थी। जिनकी पुन: प्रतिष्ठा सं. १९५२ में हुई थी, जो कालांतर में श्री धर्मनाथजी के रूप में पूजे जाने लगे। यहां तीनों ही बातों में ‘संवत’ समानता के पास है – सं. १५००, १५१० व १४९९, परंतु मूलनायक के बारे में हर बार अलग-अलग नाम है। कुछ भी हो मगर यहां का इतिहास १५वीं सदी से प्रारंभ जरूर होता है। यहां की प्राचीनता राणकपुर के समान ६०० वर्ष की है। समय के साथ जिनालय के जीर्ण हो जाने पर जीर्णोद्धार हुआ एवं वीर नि.सं. २४६१, शाके १८५६ व वि. सं. १९९१, वैशाखु सुदी १०, सोमवार दि. १३ मई १९३५ को जगतगुरू योगीराज आ. श्री शांतीसूरीश्वरजी म.सा. के करकमलों से प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभ अवसर के साथ-साथ श्री मारवाड़ प्रांतिक जैन श्वेतांबर कॉन्फेंरस (अधिवेशन) का आयोजन भी आ. श्री की निश्रा में संपन्न हुआ था।

अधिवेशन में प्रमुख अतिथि जगत सेठ श्री फतेहचंदजी साहेब घेलड़ा-कलकत्ता, श्री नवलखाजी-अजीमगंज और श्री जवाहरजी लोढा-आगरा एवं संपूर्ण भारतवर्ष से प्रतिनिधि पधारे थे। तीन दिन चले इस अधिवेशन में समाज की विविध कुरीतियों पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किये गये। प्रतिष्ठा व अधिवेशन पर लगभग २५००० लोगों की उपस्थिति थी। इस प्रतिष्ठा और महाधिवेशन के अवसर पर वि. सं. १९९१ वैशाख सुदि १०, सोमवार, दि.१३ मई, १९३५ को आ. श्री. शांतिसूरिजी को योगेन्द्र चूड़ामणि, युग प्रधान व हिज होलीनेस और श्री वल्लभसूरिजी पट्टधर पंन्यास श्री ललितविजयजी को उपाध्याय पद समर्पित किया गया तथा गुरूदेव व पधारे हुए गणमान्य महानुभावों को मानपत्र अर्पित किये गये। वि.सं. १९९३ में उपा. श्री ललितविजयजी को आचार्य पद प्रदान करने के साथ-साथ मरूधरदेशोद्धारक’ पदवी से सम्मानित किया गया।

१. श्री संभवनाथजी मंदिर : बिसलपुर पहाड़ी की तलहटी में पहाड़ की ढलान पर विशाल परिसर में भव्य-दिव्य शिखरबंध जीर्णोद्धारित प्राचीन जिनप्रासाद में मूलनाय· श्री संभवनाथादि जिनबिंबों की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वीर नि. सं. २४९३, शाके १८८८, वि.सं. २०२४, वैशाख शुक्ल ६, सोमवार दि. १५ मई १९६७ को पुष्य नक्षत्र में ९.५३ बजे जोजावर रत्न आ. श्री जिनेन्द्रसूरिजी आ.ठा. के वरद हस्ते हुई। इसके साथ-साथ ध्वजा दंड व कलशारोहण भी हुआ। श्री शांतिलालजी साकलचंदजी ने ध्वजा का लाभ लिया।

प.पू.आ. श्री पद्मसूरिजी आ.ठा. की निश्रा में श्री शामला पाश्र्वनाथ आदि जिनबिंब, श्री माणिभद्रदेव, श्री शासनदेवी स्थापना, ध्वज-दंड-·लशारोहणादि वीर नि.सं. २५१६, शाके १९११, वि. सं. २०४६, वैशाख सुदि ६, सोमवार, दि.३०.४.१९९० को अष्टाह्निका महोत्सव के साथ संपन्न हुए।

जिनालय में प्रतिष्ठित श्यामवर्णी श्री अजितनाथ प्रभु लेख के अनुसार, यह वि.सं. १९२२ शाके १७८६, ई. सन् १८६५ की प्रतिष्ठित है। वल्लभ समुदायवर्ती आ. श्री इन्द्रदिनसूरिजी के हस्ते कु. जया व कु. जक्षा मुठालिया की दीक्षा वि.सं. २०४८, कार्ति· वदि ११(मगसर वदि ११), शुक्रवार दि. २०.११.१९९२ को संपन्न हुई। श्री जैन नवयुवक मंडल ने रजत महामहोत्सव का आयोजन पू. आ. श्री विश्वचंद्रसूरिजी आ. ठा. की निश्रा में वि. सं. २०६१, पौष वदि १४, शुक्रवार, दि. ३०.१२.२००५ को पूर्ण किया।

२. श्री दादावाड़ी व नया मंदिर : बिसलपुर में दादावाड़ी जिनमंदिर में श्री पार्श्वनाथजी भगवान की प्रतिष्ठा वि.सं. २००९, फाल्गुन सुदि ५, ई. सन् १९५३ को संपन्न हुई। इसके पश्चात दादावाड़ी में एक चौमुखजी मंदिर का निर्माण हुआ, जो नया मंदिरजी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में नीचे भाग में मूलनायक श्री संभवनाथजी चौमुखजी तथा ऊपर के भाग में, प्राचीन मंदिर के मूलनायक श्री धर्मनाथजी भगवान चौमुखजी की प्रतिष्ठा, वीर नि.सं. २४९३, वि.सं. २०२३, माघ सुदि १० भानुवासरे (रविवार)फरवरी १९६७ को, आ. श्री जिनेन्द्रसूरिजी के करकमलों से संपन्न हुई। दादावाड़ी के गुरू मंदिर में नीति समुदायवर्ती गोड़वाड़ के जोजावर रत्न आ. श्री जिनेन्द्रसूरिजी गुरूमूर्ति की प्रतिष्ठा वि.सं. २०३३ के वैशाख सुदि १५ ई. सन् १९७७ को आपश्री के पट्टधर शिष्य पू. आ. श्री पद्मसूरिजी की प्रतिष्ठा व दायी तरफ स्वस्तिक बना है।

३. श्री विमलनाथजी मंदिर : नगर के मध्य भाग में विमलपुरा है, जो पहले नयापुरा के नाम से जाना जाता था। नयापुरा में सेठ श्री उम्मेदमलजी फौजमलजी का निवास स्थान व छोटा बगीचा फूलबाग था, जिसमें उन्होंने गृह मंदिर का निर्माण करवाकर, श्री विमलनाथ स्वामी आदि जिनबिंबों की प्रतिष्ठा आ.श्री हेमप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में संपन्न करवाई। मूलनायक श्री विमलनाथजी एवं चैत्य में प्रतिष्ठीत श्री सुपार्श्वनाथ प्रतिष्ठा की अंजनशलाका, वीर नि. सं. २४९८, शाके १८९३, वि.सं. २०२८ के ज्येष्ठ शु.२, बुधवार, जून १९७२ को जालोर में पं. श्री कल्याणविजयजी व श्री सौभाग्य विजयजी के द्वारा हुई है।

फूलबाग में रायण का वृक्ष है, जहां आदेश्वर भगवान के चरण-युगल बनवाये व वि.सं. २०३०, ज्येष्ठ शु. १४ शनिवार को आ.श्री पद्योतनसूरिजी (बिसलपुर रत्न) के वरद हस्ते प्रतिष्ठा संपन्न करवाई और मंदिर के प्रांगण में श्री शत्रुंजयगिरिराज की भव्य रचना ·रवाई। नयापुरा में पुरानी पोल थी, जिसका पुन: निर्माण करवाकर एक शानदार हाथीपोल बनवाई तथा उपाश्रय श्री उम्मेद भवन, श्री वर्धमान तप आयंबिल खाता गोमती भवन का निर्माण करवाया। पूरे मंदिर में कांच का कलात्मक सुंदर नक्कशी करवाया।

४. श्री ेशरिया विमलनाथजी गौशाला : गांव के बाहर पेयजल बावड़ी (पेजका) के नजदीक गौशाला में एक छोटे से मिनी शिखरबंध जिनालय में केशरिया विमलनाथ प्रभु स्थापित है। विशाल परिसर में गौशाला फैली हुई है। पास ही कमल फूल के आकार का मंदिर निर्माणाधीन है।

५. निर्माणाधीन लोटस टेम्पल : कोशेलाव निवासी श्रीमान शा. बाबूलालजी धनराजजी कोठारी परिवार द्वारा नवनिर्माणाधीन कमलाकार जिनमंदिर की प्रथम मंजिल पर मूलनायक श्री विमलनाथादि की चौमुखी प्रतिमाएं एवं तल मंजिल के गुरू मंदिर में श्री राजेन्द्रसूरिजी, श्री शांतिसूरिजी, श्री वल्लभसूरिजी, श्री नेमिसूरिजी की चौमुखी प्रतिमाएं एवं गुरू गौतमस्वामी अधिष्ठायक देव-देवी, यक्ष-यक्षिणी की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। वर्तमान में १५०० वर्ष प्राचीन जिन प्रतिमाजी की यहां हर रोज पूजा होती है।

श्री भैरव नेत्र चिकित्सालय : बिसलपुर की दूसरी महत्वपूर्ण पहचान है – ऑंख अस्पताल वाला। यहां भैरव नेत्र यज्ञ समिति द्वारासंचालित नेत्र चिकित्सालय ने मानव सेवा अर्थात नेत्रदान व सेवा में बहुत ही ख्याति प्राप्त की है। १४ मार्च १९३३ को जन्में श्री राजमलजी जैन ने सन् १९६६ में श्री नाकोड़ा भैरव नि:शुल्क दवाखाना की स्थापना करके सन्र १९६८ के दानवीरों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र शिविरों का आयोजन प्रारंभ किया। सन् १९७९ में श्री भैरव नेत्र चिकित्सालय की स्थापना की। इनके प्रयत्नों से लाखों लोगों को दृष्टिदान मिला है। वे सन् १९८७ ई. में राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैलसिंह द्वारा सम्मानित हुए। पंखर समाजसेवी का हार्दिक अभिनंदन।

बिसलपुर : यहां जैनों के ५०० घर है और ३००० के करीब जैनों की जनसंख्या है। गोड़वाड़ क्षेत्र के ९९ गांवों में सबसे ज्यादा पुण्यभूमि से जिनशासन को समर्पित करीब ३६ अनमोल रत्नों ने संयम लेकर कुल, गांव और देश का नाम उज्जवल किया है। ऐसी गौरवमयी भू-जननी को शत्-शत् अभिवादन। पू. आ. श्री पद्योतनसूरिजी व पू. आ. श्री चंद्रसूरीश्वरजी एवं पू. आ. श्री देवगुप्तसूरिजी की यह जन्मभूमि है। ५ श्रावक व ३१ श्राविकाओं ने दीक्षा ग्रहण कर रिकार्ड बनाया है। वि.सं. १९०३ में मणिविजयजी दादा का चातुर्मास हुआ।

श्री संभवनाथ जैन नवयुव मंडल, बिसलपुर संघ की सहयोगी इकाई है। इसने सन् १९९२ मे संगठन की स्थापना की और विशाल दर्शन’ पता-निर्देशिका, बिसलपुर का प्रकाशन किया। गांव में कुल ५ जैन मंदिर है। धार्मिक पाठशाला है। श्री मंडल भवन रथ घर है। अजैनों में पहाड़ी स्थित गुफा में चामुण्डा माता का मंदिर प्रसिद्ध है और पशु-पक्षियों का अन्न क्षेत्र बना है।

श्री श्नेश्वरजी मंदिर, श्री महादेव मंदिर, श्री माताजी मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, श्री चारभुजाजी मंदिर, श्री आशापुरा मंदिर इत्यादी यहां के प्रसिद्ध मंदिर है। दूरसंचार, जवाईबांध से सिंचाई की व्यवस्था, डाकबंगला, भैरव हास्पीटल, मारवाड़ ग्रामीण बैंक, श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पंचायत भवन, कन्या शाला, आर्युवेदिक हास्पीटल, पेयजल बावड़ी (पेजका), प्रा. विद्यालय इत्यादी सुविधाएं नगर में उपलब्ध है।

मार्गदर्शन : बिसलपुर जवाईबांध रेलवे स्टेशन से मात्र ४ कि.मी., फालना रेलवे स्टेशन से वाया पेरवा १६ कि.मी और जोधपुर हवाई अड्डा से १६५ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। यहां के लिये सुमेरपुर, फालना और जवाईबांध से बस, टैक्सी और ऑटो की सुविधा है।

सुविधाएं : गांव में कई धर्मशालाएं, उपाश्रय, आराधना भवन, न्याति नोहरा, पेढी भवन, गौशाला, आयंबिल भवन, भोजनशाला इत्यादी सुविधाएं है।

पेढी : श्री संभवनाथ जैन ट्रस्ट

मुख्य बाजार, मु.पो.बिसलपुर-३०६१२६

स्टेशन+वाया-जवाईबांध, तहसील-सुमेरपुर, जिला-पाली, राजस्थान

पेढी संपर्क : ०२९३३-२४४१३८, मुनीमजी : मोहनजी – ०७५६८९४९०२२, श्री दिलीप जैन – ०९९८३१४९५६५

अध्यक्ष : श्री हरीशजी वोतावत – ०९६१९६६१८८८, सचिव – श्री पारसजी कोठारी – ०९३२०२०७३५५