संयम धर्म का जय हो, मोक्ष सुख के लिए संयम की आवश्यकता...

संयम धर्म का जय हो, मोक्ष सुख के लिए संयम की आवश्यकता – श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा.

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मुंबई। परम पूज्य आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी म.सा. मुंबई भायखला शेठ मोतिशा जैन मंदिर में भगवान महावीर स्वामीजी की उज्ज्वल पट्ट परंपरा के संवाहक अनेक तीर्थोद्धारक अनेक राजा महाराजा प्रतिबोधक सूरीचक्र चक्रवर्ति शासन सम्राट श्रीमद् विजय नेमि सूरीश्वरजी महाराजा पट्ट परंपरा में ७४वीं पाट पर बिराजमान थे। आपने जिनशासन में चऊमुखी प्रतिभा फैलाई थी। आज आपका समुदाय शासन सम्राटश्री के नाम से सुविख्यात है। शासन सम्राटश्रीजी की ७५वीं पाट पर साहित्य सम्राट व्याकरण वाचस्पति परम पूज्य आचार्य श्री विजय लावण्य सूरीश्वरजी म.सा. आये। आपने भी संस्कृत भाषा में साढ़े आठ लाख श्लोक का सर्जन करके जैन धर्म में श्रुत ज्ञान की अनूपम सेवा साधना की। साहित्य जगत के सम्राट कहे जाते थे। काशी के बड़े-बड़े दिग्गज पंडित इस महापुरुष को ‘पाणीनी’ का अवतार कहते थे। आपकी ७६वीं पाट पर संयम सम्राट लब्धिधारी परम पूज्य आचार्य श्री विजय दक्ष सूरीश्वरजी म.सा. आये। आपश्री कविरत्न थे। २४ तिर्थंकर भगवंतों के स्तवन स्तुति वगेरेह संस्कृत, गुजराती, हिन्दी भाषा में अति शीघ्र रचना की है। निस्पृहि-त्यागी और अद्भूत लब्धिधारी दक्ष सूरीश्वरजी थे। मुंबई के पास अगाशी तीर्थ धाम है। यहां महाराष्ट्र का सर्वप्रथम श्री समवसरण महामंदिर आदि धर्म स्थापत्यों के प्रेरणादाता है और वचनसिद्ध पुरुष थे। आपकी पट्ट परंपरा में ७७वीं पाट पर समकित सम्राट पूज्य आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी महाराज साहेब है।

भायखला शेठ मोतिशा जैन मंदिर परिसर में आपश्री के संयम जीवन के ५० साल की पूर्णाहूती एवं ५१वें वर्ष में मंगल प्रवेश निमित संयम सुवर्ण महोत्सव मनाया गया। आपश्री के दीक्षा के ५० वर्ष में अनेकविध धर्मसेवा के साथ शासन प्रभावक शासन प्रभावना के अति विशिष्ट कार्यों संपन्न हुए है। समग्र भारत में एक मात्र संपूर्ण जिनालय में अति मूल्यवान स्फटिक रत्न के सर्व जिन बिंबो देव-देवी-गुरुमूर्तियूक्त भव्य शिखरबद्ध कमल भूषण श्री आदिनाथ जिन प्रासाद का भव्य निर्माण दक्ष विहार पालीताणा में हैं। इस जिनालय के प्रेरणादाता परम पूज्य आचार्य श्री विजय प्रभाकर सूरीश्वरजी है। ऐसा ही भव्य जिनालय दक्षिण भारत में एकमात्र बेंगलोर के महालक्ष्मी ले-आऊट में एक ही भाग्यशाली द्वारा पूज्य गुरुदेवश्री की प्रेरणा से निर्मित हुआ है। अनेक जिनालयों, उपाश्रयों, धर्मशाला, साधर्मिक निवास स्थानों, उपधानों, प्रतिष्ठा, अंजन शलाका इत्यादि शुभ कार्य संपन्न हुए है। अगाशी तीर्थ श्री समवसरण महामंदिर धर्म संकुल के मार्गदर्शक पूज्यश्री है। ९ साल की आयु में दीक्षा राजस्थान के बाली नगर गांव में एवं बडी दीक्षा राजस्थान के लूणावा गांव में आज से ५० साल पहले विक्रम संवत २०२४, फाल्गुन-शुद -३ के दिन हुई थी। विश्व प्रसिद्ध धरणाशा पोरवाल निर्मित श्री राणकपूर (सादडी) महातीर्थ में पूज्यश्री की आचार्य पदवी विक्रम संवत २०५२ के वैशाख शुद-७ के दिन हुई। दीक्षा के ५० वर्ष के सुवर्ण महोत्सव निमित जिनेन्द्र भक्ति, गुरु भक्ति का उत्सव मनाया जा रहा है। दि. १७.२.२०१८ के दिन लब्धिनिधान श्री गुरु गौतम स्वामिजी का भव्य महापूजन सुबह ९:०० से १:०० बजे तक था। दोपहर में ३ से ४ बजे तक ५५४-बालकों संयम धर्म के प्रतिक समान सामाईक करके पूज्यश्री का भावभरी वंदना, शुभेच्छा अर्पण की। शाम को ७ बजे से महाराजा कुमारपाल का भव्य नाटक स्टेज शो हुआ। नामांकित कलाकारों ने यह नाटक प्रस्तुत किया।